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AGRICULTURE

BitterGourdFarming – देसी करेला खेती से किसान को मिल रहा है बेहतर मुनाफा

BitterGourdFarming – उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के किसान नारायण सिंह इन दिनों देसी करेला की खेती से अच्छी आमदनी हासिल कर रहे हैं। उन्होंने सीमित जमीन पर खेती शुरू की, लेकिन सही तकनीक और अनुभव के बल पर इसे लाभकारी बना दिया। करीब डेढ़ बीघा खेत में उगाई गई इस फसल की मांग इतनी बढ़ गई है कि व्यापारी पहले ही खेत पर आकर खरीद तय कर लेते हैं। नारायण सिंह का कहना है कि देसी करेला स्वाद और गुणों में अलग होता है, जिससे बाजार में इसकी कीमत भी बेहतर मिलती है।

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अपने ही बीज से घटाई लागत

नारायण सिंह की खेती की खास बात यह है कि वे हर साल अपने खेत की फसल से ही बीज तैयार करते हैं। इससे उन्हें बाहर से बीज खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती और लागत काफी कम हो जाती है। उनका मानना है कि स्थानीय परिस्थितियों में तैयार किए गए बीज ज्यादा बेहतर उत्पादन देते हैं और फसल भी मजबूत रहती है।

खेती से पहले की तैयारी पर खास ध्यान

किसान बताते हैं कि करेले की खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई की जाती है। इसके बाद खेत में गोल आकार के बेड बनाए जाते हैं ताकि पानी का सही निकास हो सके। हर बेड में 2 से 3 बीज डाले जाते हैं। उन्होंने करीब 500 ग्राम बीज से अपनी पूरी खेती तैयार की है। यह तरीका पौधों को पर्याप्त पोषण देने में मदद करता है।

बेल वाली फसल के लिए खास व्यवस्था

करेला बेल वाली फसल होती है, जो जमीन पर फैलती है। ऐसे में नारायण सिंह बेल के नीचे सूखी घास, पराली या भूसा बिछाते हैं। इससे कई फायदे होते हैं। फल सीधे मिट्टी के संपर्क में नहीं आते, जिससे सड़न की संभावना कम हो जाती है। साथ ही नमी बनी रहती है और खेत में खरपतवार भी कम उगते हैं। इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और फल साफ-सुथरे दिखते हैं।

उत्पादन और कमाई का संतुलन

नारायण सिंह के अनुसार, इस खेती में मुख्य खर्च खाद, पानी और दवाइयों पर आता है, जबकि बीज का खर्च नहीं होता। वे रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद का अधिक उपयोग करते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता बढ़ती है। एक बार फसल लगाने के बाद करीब चार महीने तक लगातार तुड़ाई होती रहती है। हर तुड़ाई में अच्छी मात्रा में करेला निकलता है और कुल उत्पादन लगभग 20 क्विंटल तक पहुंच जाता है।

बाजार में मिल रही अच्छी कीमत

देसी करेले की बाजार में कीमत 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक मिल रही है। बेहतर गुणवत्ता और स्वाद के कारण इसकी मांग बनी रहती है। व्यापारी सीधे खेत पर पहुंचकर फसल खरीद लेते हैं, जिससे किसान को बाजार जाने की जरूरत भी कम पड़ती है। इस तरह कम लागत और बेहतर कीमत के कारण किसान को अच्छा मुनाफा मिल रहा है।

सेहत और स्वाद दोनों में खास

देसी करेला स्वाद में थोड़ा ज्यादा कड़वा होता है, लेकिन यही इसकी खासियत भी है। इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है, खासकर डायबिटीज के मरीजों के लिए। इसी वजह से बाजार में इसकी मांग बनी रहती है और किसान को इसका सीधा फायदा मिलता है।

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