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AGRICULTURE

AgriBusiness – पारंपरिक खेती छोड़ एलोवेरा से किसानों की आय में हुआ बड़ा बदलाव

AgriBusiness – देश में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और किसान अब केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रहना चाहते। पहले जहां धान और गेहूं जैसी फसलें ही आय का मुख्य साधन थीं, वहीं अब किसान नई और लाभकारी खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में भी यही बदलाव साफ दिखाई दे रहा है, जहां किसान एलोवेरा की खेती को अपनाकर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह फसल कम लागत और कम पानी में भी अच्छी आमदनी दे सकती है।

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एलोवेरा बना किसानों के लिए कमाई का नया जरिया

मुरादाबाद के कई किसानों ने पारंपरिक खेती से हटकर एलोवेरा उगाना शुरू किया है। यह फसल खासतौर पर उन किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है, जिनके पास सीमित संसाधन हैं। बताया जा रहा है कि एक एकड़ जमीन में एलोवेरा की खेती से सालाना 3 से 4 लाख रुपये तक का मुनाफा कमाया जा सकता है। इस वजह से किसान धीरे-धीरे इस विकल्प की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

कम पानी और कम लागत में तैयार होती है फसल

कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदी रत्ता के अनुसार, एलोवेरा की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे कम पानी में भी आसानी से उगाया जा सकता है। बलुई दोमट मिट्टी में यह फसल अच्छी तरह विकसित होती है। एक एकड़ में करीब 12 से 14 हजार सकर्स लगाकर खेती शुरू की जा सकती है। एक बार पौधे लगाने के बाद यह फसल कई वर्षों तक उत्पादन देती रहती है, जिससे बार-बार बुवाई की जरूरत नहीं पड़ती।

हर तरह की जमीन में संभव है खेती

विशेषज्ञों का कहना है कि एलोवेरा ऐसी फसल है जिसे लगभग हर प्रकार की जमीन में उगाया जा सकता है, बशर्ते वहां पानी का जमाव न हो। जहां पानी की कमी है, वहां भी यह फसल सफलतापूर्वक की जा सकती है। यही वजह है कि सूखे या सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में भी किसान इसे अपनाने लगे हैं।

सरकारी सहायता से बढ़ रहा रुझान

एलोवेरा की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से भी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों को इस फसल पर करीब 30 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल सकती है। इससे शुरुआती लागत कम होती है और किसान इसे अपनाने के लिए अधिक प्रेरित होते हैं। यह सहायता छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी मानी जा रही है।

प्रसंस्करण की सुविधा का होना जरूरी

हालांकि, विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि एलोवेरा की खेती करते समय प्रोसेसिंग यूनिट की उपलब्धता बेहद जरूरी है। कटाई के बाद पत्तियों को 4 से 5 घंटे के भीतर प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाना होता है। यदि इसमें देरी होती है, तो पत्तियों में मौजूद जेल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों प्रभावित हो सकती हैं, जिससे बाजार में कीमत कम मिलती है।

एक पौधे से अच्छी पैदावार

एलोवेरा की पैदावार भी किसानों के लिए आकर्षण का बड़ा कारण है। एक पौधे से औसतन 2 से 3 किलो तक पत्तियां प्राप्त हो सकती हैं। यदि सही तरीके से देखभाल की जाए तो यह फसल 10 से 12 साल तक लगातार उत्पादन देती रहती है। इससे किसानों को लंबे समय तक स्थिर आय मिल सकती है।

कृषि में बदलाव का संकेत

एलोवेरा की खेती का बढ़ता रुझान इस बात का संकेत है कि किसान अब बाजार की मांग और लाभ को ध्यान में रखकर फसल चुन रहे हैं। पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैकल्पिक फसलों को अपनाने से उनकी आय में सुधार हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही मार्गदर्शन और बाजार की सुविधा मिलती रहे, तो यह खेती किसानों के लिए और भी लाभकारी साबित हो सकती है।

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