Farmer Success Story – बिना पढ़े किसान ने 60 एकड़ में रचा कमाई का नया मॉडल
Farmer Success Story – मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के बसाड़ गांव से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो पारंपरिक सोच को चुनौती देती है। यहां के किसान नीलकंठ गौहरलाल ने बिना औपचारिक शिक्षा के खेती में ऐसी पहचान बनाई है, जो आज कई पढ़े-लिखे लोगों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। अक्षरों की समझ न होने के बावजूद उन्होंने अपने अनुभव और मेहनत के दम पर 60 एकड़ जमीन पर खेती को सफल व्यवसाय में बदल दिया है और हर साल अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं।

परिवार से मिली सीख ने तय किया रास्ता
नीलकंठ गौहरलाल बताते हैं कि उन्होंने कभी स्कूल का रुख नहीं किया। बचपन से ही खेतों में पिता और दादा के साथ काम करते हुए उन्होंने खेती की बारीकियां सीखी। यही अनुभव धीरे-धीरे उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। पिछले तीन दशकों से वह लगातार खेती कर रहे हैं और समय के साथ अपनी समझ को और मजबूत करते गए। उनके लिए खेती केवल पेशा नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा बन चुकी है।
विविध फसलों से बनाई मजबूत आय
उनकी खेती की खासियत एक ही फसल पर निर्भर न रहना है। खेतों में केला, कपास, गन्ना, सोयाबीन, मक्का और चना जैसी कई फसलें उगाई जाती हैं। इसके साथ ही मौसम के अनुसार सब्जियों की खेती भी करते हैं, जिससे आय के अलग-अलग स्रोत बने रहते हैं। इस मल्टी क्रॉपिंग पद्धति के कारण उन्हें हर साल करीब 10 से 15 लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है। फसलों का यह संतुलन उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव से भी काफी हद तक सुरक्षित रखता है।
गांव में रोजगार का बना आधार
नीलकंठ की खेती का फायदा सिर्फ उन्हें ही नहीं मिल रहा, बल्कि गांव के अन्य लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। उनके खेतों में 15 से अधिक लोग काम करते हैं, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। उनका मानना है कि गांव के लोगों को काम मिलना और आत्मनिर्भर बनना सबसे बड़ी उपलब्धि है। इसी सोच के साथ वह अपने खेतों को रोजगार का केंद्र बनाने में जुटे हैं।
नई तकनीकों को अपनाने में आगे
हालांकि वे पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन आधुनिक खेती के महत्व को अच्छी तरह समझते हैं। समय-समय पर कृषि विभाग के अधिकारियों और वैज्ञानिकों से सलाह लेकर नई तकनीकों को अपनाते हैं। इससे उनकी फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार हुआ है। उनका कहना है कि सीखने के लिए पढ़ाई जरूरी नहीं, बल्कि जिज्ञासा और मेहनत होनी चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा उत्पादन
नीलकंठ के खेतों में उगाया गया केला अब केवल स्थानीय मंडियों तक सीमित नहीं है। उनकी उपज देश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ विदेशों तक भी पहुंच रही है। बेहतर गुणवत्ता और सही प्रबंधन के कारण उनके उत्पाद की मांग लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि उनकी आमदनी में भी लगातार इजाफा हो रहा है।
अनुभव और मेहनत की मिसाल
बसाड़ गांव के इस किसान की कहानी यह दिखाती है कि सफलता के लिए केवल डिग्री ही जरूरी नहीं होती। अनुभव, निरंतर मेहनत और नई चीजें सीखने की इच्छा किसी भी व्यक्ति को आगे बढ़ा सकती है। नीलकंठ गौहरलाल ने यह साबित कर दिया है कि खेती में सही रणनीति और लगन के साथ बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है।

