AGRICULTURE

Groundnut Farming – बिहार और यूपी में बढ़ी मूंगफली खेती की मांग

Groundnut Farming – उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अब बिहार के कई जिलों में भी मूंगफली की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसे नगदी फसल माना जाता है, इसलिए किसान इसमें अधिक रुचि दिखा रहे हैं। मौजूदा समय, यानी मार्च से अप्रैल की शुरुआत, इसकी बुवाई के लिए सबसे अनुकूल माना जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस अवधि में सही तरीके से बुवाई की जाए, तो फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है। माधोपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने इस खेती से जुड़ी तकनीकी जानकारी साझा की है, जो किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

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कम अवधि में तैयार होने वाली फसल

डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह के अनुसार, मूंगफली एक ऐसी फसल है जिसे ज्यादा समय तक खेत में नहीं रखना पड़ता। बुवाई के लगभग 100 से 110 दिनों के भीतर इसकी कटाई की जा सकती है। यह विशेषता इसे अन्य कई फसलों से अलग बनाती है, क्योंकि किसान कम समय में उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। बाजार में इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता। यही कारण है कि इसे एक भरोसेमंद आय का स्रोत माना जा रहा है।

खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी और तैयारी

मूंगफली की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी का चयन बेहद महत्वपूर्ण होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बलुई मिट्टी इस फसल के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी करनी चाहिए और उसमें पर्याप्त मात्रा में सड़ी हुई गोबर की खाद मिलानी चाहिए। प्रति हेक्टेयर लगभग 250 क्विंटल जैविक खाद का उपयोग मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने में मदद करता है। इससे पौधों को शुरुआती अवस्था में जरूरी पोषण मिल पाता है और उनकी वृद्धि बेहतर होती है।

उत्पादन क्षमता और सिंचाई प्रबंधन

एक हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की खेती के लिए लगभग 75 से 80 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है। उचित देखभाल और वैज्ञानिक तरीकों के इस्तेमाल से प्रति हेक्टेयर 30 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। हालांकि, इस फसल में नमी बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। अन्य फसलों की तुलना में इसे अधिक सिंचाई की जरूरत पड़ती है। खासकर फूल आने, खूंटी बनने और फल विकसित होने के समय पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। कई किसान अब नमी बनाए रखने के लिए स्प्रिंकलर सिस्टम का इस्तेमाल भी कर रहे हैं, जिससे पानी की बचत के साथ बेहतर परिणाम मिल रहे हैं।

बेहतर पैदावार के लिए उन्नत किस्में

विशेषज्ञों का सुझाव है कि बेहतर उत्पादन के लिए उन्नत किस्मों का चयन करना जरूरी है। DH 86, GG 8 और प्रकाश जैसी किस्में किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही हैं, क्योंकि ये बेहतर उपज देने के लिए जानी जाती हैं। इसके अलावा, यदि किसान जून के मध्य या जुलाई की शुरुआत में भी इसकी बुवाई करते हैं, तो अक्टूबर तक फसल तैयार हो जाती है। सही समय पर कटाई करने से गुणवत्ता बनी रहती है और बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

कीट प्रबंधन और गुणवत्ता पर ध्यान जरूरी

मूंगफली की खेती में कीटों और रोगों से बचाव भी महत्वपूर्ण होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर फसल की निगरानी करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उचित उपाय अपनाने चाहिए। संतुलित तरीके से कीट नियंत्रण करने से फसल की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और उत्पादन पर नकारात्मक असर नहीं पड़ता। इसके साथ ही, खेत में साफ-सफाई और उचित देखभाल भी जरूरी है, जिससे फसल स्वस्थ बनी रहती है।

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