OnionFarming – सही तकनीकों से प्याज की खेती में बढ़ रही किसानों की आय
OnionFarming – झारखंड के बोकारो जिले के पेटवार क्षेत्र के किसान शशि कुमार ने पिछले कुछ वर्षों में प्याज की खेती को एक लाभदायक व्यवसाय में बदल दिया है। उन्होंने खेती के पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अच्छी कमाई का उदाहरण पेश किया है। उनका कहना है कि प्याज ऐसी फसल है जिसे साल भर उगाया जा सकता है, और किसान इसे उत्पादन व बीज दोनों उद्देश्यों से उगाते हैं।

बल्ब विधि से बेहतर उत्पादन
शशि कुमार के अनुसार, प्याज की खेती में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली तकनीक बल्ब विधि है। इसमें पहले बीज बोकर छोटे-छोटे बल्ब तैयार किए जाते हैं, जो लगभग दो महीने में तैयार हो जाते हैं। इसके बाद इन्हें खेत में दोबारा लगाया जाता है। इस प्रक्रिया से फसल को बेहतर पोषण मिलता है और उत्पादन भी संतोषजनक होता है। सही तरीके से अपनाने पर इस विधि से प्रति एकड़ करीब 100 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
सीमित सिंचाई में भी कारगर तरीका
बल्ब विधि की एक खास बात यह है कि यह उन किसानों के लिए भी उपयोगी है जिनके पास सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं होती। खासकर गर्मी के मौसम में यह तरीका बेहतर परिणाम देता है। बीज बोने का उपयुक्त समय जनवरी से मार्च के बीच माना जाता है, जबकि तैयार बल्बों को कुछ महीनों तक सुरक्षित रखकर बाद में रोपाई की जाती है। सही समय पर बाजार में फसल बेचने से बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
सीधी बुवाई का सरल विकल्प
दूसरी प्रमुख तकनीक सीधी बुवाई की है, जिसमें बीज सीधे खेत में छिड़क दिए जाते हैं। इस विधि में श्रम और प्रबंधन दोनों कम लगते हैं, जिससे छोटे किसानों के लिए यह एक आसान विकल्प बन जाता है। हालांकि, इस तरीके में फसल तैयार होने में करीब पांच महीने का समय लगता है, लेकिन उत्पादन लगभग 115 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच सकता है।
रोप विधि से मिलती है बेहतर गुणवत्ता
तीसरी तकनीक रोप विधि के रूप में जानी जाती है। इसमें पहले नर्सरी तैयार की जाती है और पौधों के 40 से 45 दिन का होने पर उन्हें मुख्य खेत में लगाया जाता है। इस विधि से तैयार प्याज की गुणवत्ता बेहतर होती है और बाजार में इसकी मांग भी ज्यादा रहती है। उत्पादन के लिहाज से यह तरीका काफी प्रभावी है और प्रति एकड़ 120 क्विंटल से अधिक पैदावार मिल सकती है।
रोग प्रबंधन और देखभाल जरूरी
प्याज की खेती में फंगस और थ्रिप्स जैसे कीट और रोग आम समस्या होते हैं। इनसे बचाव के लिए समय-समय पर निगरानी और उचित दवाओं का उपयोग जरूरी है। किसान शशि कुमार का कहना है कि अगर फसल की सही देखभाल की जाए, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
लागत और मुनाफे का संतुलन
प्याज की खेती में प्रति एकड़ लगभग 15 से 20 हजार रुपये तक खर्च आता है। हालांकि, यदि सही तकनीक अपनाई जाए और फसल को उचित समय पर बाजार में बेचा जाए, तो किसान एक एकड़ से लगभग एक लाख रुपये तक का मुनाफा कमा सकते हैं। यही वजह है कि अब कई किसान इस फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

