AGRICULTURE

TomatoFarming – गोंडा के किसान ने जैविक तरीके से टमाटर उगाकर बढ़ाई आय

TomatoFarming – उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक किसान ने जैविक पद्धति अपनाकर सब्जी उत्पादन का अलग उदाहरण पेश किया है। विकासखंड वजीरगंज क्षेत्र के किसान संदीप कुमार मौर्य अपने खेत में रासायनिक खाद और दवाइयों की जगह प्राकृतिक तरीकों से टमाटर की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरीके से फसल की गुणवत्ता बेहतर रहती है और मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहती है। खेत में तैयार होने वाले टमाटर की गुणवत्ता अच्छी होने के कारण स्थानीय बाजार में इसकी मांग भी बनी रहती है। इससे उन्हें संतोषजनक कीमत मिल जाती है और खेती से आमदनी भी बढ़ रही है।

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नौकरी छोड़कर खेती की ओर बढ़े कदम

संदीप कुमार मौर्य बताते हैं कि उन्होंने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी, लेकिन कुछ पारिवारिक कारणों से आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सके। इसके बाद रोजगार की तलाश में दिल्ली चले गए और वहां एक निजी कंपनी में काम करने लगे। कुछ समय बाद उन्होंने अपने गांव लौटने का निर्णय लिया और खेती को ही अपना मुख्य काम बनाने की ठानी। गांव वापस आने के बाद उन्होंने सब्जी उत्पादन से शुरुआत की और धीरे-धीरे इसे अपने लिए स्थायी आय का जरिया बना लिया।

पड़ोसी किसान से मिली प्रेरणा

संदीप बताते हैं कि टमाटर की खेती शुरू करने का विचार उन्हें अपने ही गांव के एक किसान को देखकर आया। आसपास के खेत में टमाटर की अच्छी पैदावार देखकर उन्होंने भी इस फसल को अपनाने का फैसला किया। उनका मानना है कि टमाटर ऐसी सब्जी है जिसकी बाजार में मांग लगभग पूरे साल बनी रहती है। इसी कारण उन्होंने अपने खेत में लगभग एक एकड़ क्षेत्र में टमाटर की खेती शुरू की। भविष्य में वे इस खेती को और बड़े पैमाने पर करने की योजना भी बना रहे हैं।

नवीन 2000 किस्म से बेहतर उत्पादन

संदीप कुमार मौर्य अपने खेत में नवीन 2000 किस्म के टमाटर की खेती कर रहे हैं। उनके अनुसार यह किस्म गोंडा के मौसम और मिट्टी में अच्छी तरह विकसित हो जाती है। इस किस्म की पैदावार भी संतोषजनक मिलती है। फसल की देखभाल के लिए वे खेत में बांस और रस्सी का सहारा देते हैं, जिससे टमाटर के पौधे ऊपर की ओर बढ़ते हैं और फल जमीन से ऊपर रहते हैं। इससे टमाटर पर दाग या सड़न की समस्या कम हो जाती है और फल का रंग भी बेहतर आता है। अच्छी गुणवत्ता होने पर बाजार में इसकी कीमत भी बेहतर मिलती है।

जैविक तरीकों से तैयार होती है फसल

किसान संदीप बताते हैं कि वे अपने खेत में गोबर की खाद, जैविक घोल और प्राकृतिक दवाओं का उपयोग करते हैं। इससे पौधों को पोषण मिलता है और फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों से भी काफी हद तक बचाव हो जाता है। उनका कहना है कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी की सेहत प्रभावित होती है, इसलिए वे प्राकृतिक तरीकों को प्राथमिकता देते हैं। जैविक तरीके से तैयार टमाटर स्वाद और गुणवत्ता के कारण बाजार में अलग पहचान बना लेते हैं।

लागत कम, आय की उम्मीद बेहतर

संदीप कुमार मौर्य के अनुसार एक एकड़ में टमाटर की खेती करने में लगभग 10 से 15 हजार रुपये तक का खर्च आता है। इसमें पौध तैयार करना, खेत की तैयारी और अन्य जरूरी काम शामिल होते हैं। पिछले वर्ष उनके खेत से प्रतिदिन करीब ढाई से तीन कुंतल टमाटर की तुड़ाई होती थी। इस बार भी उन्हें अच्छी पैदावार की उम्मीद है। उनका मानना है कि यदि किसान मेहनत और सही तकनीक के साथ खेती करें तो सब्जी उत्पादन ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ाने का अच्छा माध्यम बन सकता है।

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