AGRICULTURE

Floriculture – बागपत के किसान फूलों की खेती से बढ़ा रहे हैं आय के नए अवसर

Floriculture – उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में खेती का स्वरूप धीरे-धीरे बदलता दिखाई दे रहा है। पारंपरिक फसलों के साथ-साथ अब कई किसान नकदी फसलों की ओर भी कदम बढ़ा रहे हैं। इनमें फूलों की खेती एक ऐसा विकल्प बनकर उभरी है, जिससे किसानों को बेहतर आमदनी की उम्मीद मिल रही है। जिले के रटोल गांव में कुछ किसान वर्षों से फूलों की खेती कर रहे हैं और उनकी यह पहल आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बनती जा रही है। खेतों में खिले रंग-बिरंगे फूल न केवल खेतों की खूबसूरती बढ़ाते हैं, बल्कि किसानों के लिए आय का नया रास्ता भी खोल रहे हैं।

Bagpat flower farming income opportunity

रटोल गांव में बढ़ रहा फूलों की खेती का रुझान

रटोल गांव में इन दिनों कई खेतों में फूलों की फसल दिखाई देने लगी है। गांव के किसान मानते हैं कि पारंपरिक अनाज या गन्ने की खेती के मुकाबले फूलों की खेती से जल्दी नकद आय मिलने की संभावना रहती है। यही कारण है कि धीरे-धीरे अधिक किसान इस ओर रुचि दिखा रहे हैं।

यहां के खेतों में अलग-अलग किस्म के फूल उगाए जा रहे हैं, जिनकी मांग स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के शहरों में भी रहती है। खास बात यह है कि फूलों की खेती में थोड़ी अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है, लेकिन यदि सही तरीके से इसकी देखरेख की जाए तो इसका आर्थिक लाभ भी बेहतर मिलता है।

किसान रिजवान ने आगे बढ़ाई पारिवारिक परंपरा

रटोल गांव के किसान रिजवान भी फूलों की खेती से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अपने खेत में सूरजमुखी जैसे दिखने वाले एक खास किस्म के फूल की खेती की है, जिसे स्थानीय किसान ‘मार्किट’ नाम से पहचानते हैं। खेतों में खिले इन फूलों का दृश्य दूर से ही लोगों का ध्यान खींच लेता है।

रिजवान बताते हैं कि उनके परिवार में फूलों की खेती कई पीढ़ियों से की जा रही है। उनके पिता और दादा भी इसी तरह फूल उगाकर बाजार में बेचते थे। अब उन्होंने भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस खेती को अपनाया है। उनका कहना है कि खेती का यह तरीका उनके परिवार की पहचान बन चुका है और इससे उन्हें स्थिर आय भी मिलती है।

बाजार में अच्छी कीमत मिलने से बढ़ा उत्साह

किसान रिजवान के अनुसार ‘मार्किट’ नाम से पहचाने जाने वाले इस फूल की बाजार में अच्छी मांग रहती है। स्थानीय मंडियों में इसकी कीमत करीब 250 रुपये प्रति किलो तक मिल जाती है। इसी वजह से यह फसल किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभदायक साबित हो रही है।

फूलों की मांग साल भर बनी रहती है। शादी-समारोह, धार्मिक आयोजन, सजावट और अन्य कार्यक्रमों में फूलों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। यही कारण है कि किसानों को अपनी उपज बेचने में ज्यादा कठिनाई नहीं होती। मांग स्थिर रहने से किसानों को यह भरोसा भी मिलता है कि उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलेगा।

मेहनत और सही देखभाल से मिलता है बेहतर परिणाम

फूलों की खेती सामान्य फसलों की तुलना में थोड़ी अलग होती है। इसमें समय-समय पर सिंचाई, पौधों की देखभाल और रोगों से बचाव का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। किसान रिजवान का कहना है कि यदि खेती को वैज्ञानिक तरीके से किया जाए और खेत की नियमित निगरानी रखी जाए तो इससे अच्छा उत्पादन मिल सकता है।

उन्होंने बताया कि फूलों की खेती में शुरूआत में कुछ अधिक मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन जब पौधे पूरी तरह विकसित हो जाते हैं तो उनकी देखभाल अपेक्षाकृत आसान हो जाती है। इस फसल से होने वाली आमदनी किसानों के लिए अतिरिक्त आय का साधन बन सकती है।

क्षेत्र के अन्य किसान भी हो रहे प्रेरित

रटोल गांव में फूलों की खेती को देखकर आसपास के कई किसान भी इस दिशा में रुचि दिखा रहे हैं। किसान मानते हैं कि यदि बाजार की मांग को ध्यान में रखकर फसल का चयन किया जाए तो खेती से बेहतर लाभ कमाया जा सकता है।

कृषि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि नकदी फसलों की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर सकती है। बागपत जैसे कृषि प्रधान जिलों में यदि किसान फूलों की खेती को अपनाते हैं तो यह उनकी आय बढ़ाने के साथ-साथ खेती को अधिक विविधतापूर्ण बनाने में भी सहायक हो सकता है।

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