DragonFruitFarming – हजारीबाग में नई फसल से बढ़ती उम्मीदें
DragonFruitFarming – झारखंड का हजारीबाग जिला लंबे समय से अपनी उपजाऊ जमीन और खेती-किसानी की परंपरा के लिए जाना जाता रहा है। यहां के किसान समय-समय पर नई फसलों के प्रयोग कर राज्य ही नहीं, बल्कि देशभर में अपनी अलग पहचान बनाते रहे हैं। स्ट्रॉबेरी और स्वीट कॉर्न जैसी फसलों की सफल खेती के बाद अब जिले में ड्रैगन फ्रूट को लेकर उत्साह बढ़ता दिख रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय जलवायु और मिट्टी की बनावट इस फल के लिए अनुकूल साबित हो सकती है, जिससे किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

मिट्टी और जलवायु को बताया अनुकूल
गोरिया करमा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक पंकज कुमार के अनुसार हजारीबाग की मिट्टी में वह गुण मौजूद हैं जो ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन के लिए जरूरी माने जाते हैं। जिले में मानसून का आगमन सामान्य से करीब दो सप्ताह पहले हो जाता है, जिससे पौधों को शुरुआती दौर में पर्याप्त नमी मिलती है। यही नहीं, पहली बारिश से पहले पौधों में फूल आना शुरू हो जाता है। नवंबर और दिसंबर के महीनों में अच्छी धूप मिलने से फलों का विकास बेहतर तरीके से होता है। अनुसंधान केंद्र में किए जा रहे प्रयोगों से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिससे किसानों का भरोसा भी मजबूत हुआ है।
छतों तक पहुंची नई खेती
ड्रैगन फ्रूट की बढ़ती मांग और कम जगह में उत्पादन की संभावना ने कई लोगों को आकर्षित किया है। कुछ किसान अपने घरों की छतों पर भी इस पौधे की खेती कर रहे हैं। इससे यह साफ है कि यह फसल केवल बड़े खेतों तक सीमित नहीं है। सीमित संसाधनों में भी इसे अपनाया जा सकता है। पौधों की देखभाल अपेक्षाकृत सरल है और एक बार पौधा स्थापित हो जाने के बाद लंबे समय तक फल देता रहता है। यही कारण है कि युवा किसान भी इसे आजमाने में रुचि दिखा रहे हैं।
बाजार में अच्छी कीमत
व्यावसायिक दृष्टि से ड्रैगन फ्रूट को लाभदायक फसल माना जाता है। बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और एक फल की कीमत आम तौर पर 100 से 150 रुपये तक मिल जाती है। आकर्षक पैकिंग के कारण यह फल ग्राहकों के बीच अलग पहचान बनाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस पौधे की एक खास बात यह है कि इसकी शाखा से ही नया पौधा तैयार किया जा सकता है। इससे बीज या जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं पड़ती। रोपाई के लगभग दो साल बाद पौधे फल देना शुरू कर देते हैं और उसके बाद कई वर्षों तक उत्पादन जारी रहता है।
आर्थिक रूप से मजबूत विकल्प
कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वैज्ञानिक तरीके से एक एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती की जाए, तो शुरुआती दो वर्षों के बाद प्रति वर्ष लगभग 5 से 6 लाख रुपये तक की आय संभव है। पारंपरिक फसलों की तुलना में यह राशि कहीं अधिक मानी जाती है। हालांकि शुरुआती निवेश और संरचना तैयार करने में खर्च आता है, लेकिन लंबे समय में यह फसल किसानों के लिए स्थिर आमदनी का स्रोत बन सकती है। यही वजह है कि इसे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने वाली फसल के रूप में देखा जा रहा है।
नई पहचान की ओर बढ़ता जिला
हजारीबाग के किसानों ने हमेशा प्रयोगधर्मी खेती को अपनाकर नई राह बनाई है। यदि आने वाले समय में जिले में बड़े पैमाने पर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू होती है, तो यह क्षेत्र एक नए कृषि मॉडल के रूप में उभर सकता है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सही प्रशिक्षण और बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने पर यह पहल जिले की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है।

