NandiShalaYojana – पशुपालकों को उन्नत सांड देने की सरकारी पहल
NandiShalaYojana – किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से पशु विभाग की ओर से नंदी शाला योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को उन्नत नस्ल का सांड उपलब्ध कराया जाता है, ताकि देसी गायों के साथ बेहतर नस्ल का संवर्धन हो सके और उच्च गुणवत्ता वाले बछड़े या बछिया प्राप्त हों। छतरपुर जिले में यह योजना लागू है, लेकिन विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अब भी कई किसान इसकी जानकारी से वंचित हैं।

क्या है योजना का उद्देश्य
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मातादीन पटेल के अनुसार, योजना का मुख्य मकसद स्थानीय गायों की नस्ल सुधारना है। जब देसी गायों का मेल उन्नत नस्ल के सांड से कराया जाता है, तो पैदा होने वाले पशु अधिक स्वस्थ और उत्पादक माने जाते हैं। इससे दूध उत्पादन में सुधार और पशुपालन की आय में वृद्धि की संभावना बढ़ती है।
किन नस्लों के सांड मिलते हैं
योजना के अंतर्गत साहीवाल, थारपारकर, हरियाणा, गिर, गौलव, मालवी, निमाड़ी और केनकथा जैसी नस्लों के सांड उपलब्ध कराए जाते हैं। विभाग की ओर से सांड के साथ शुरुआती 60 दिनों के लिए पशु आहार भी दिया जाता है, ताकि पशुपालक को प्रारंभिक देखभाल में सुविधा हो।
पात्रता की शर्तें
योजना का लाभ सभी वर्ग के पशुपालक ले सकते हैं। इसके लिए आवेदक के पास पर्याप्त कृषि भूमि के साथ कम से कम पांच गौवंशीय पशु होने चाहिए। जिनके पास कृषि भूमि नहीं है, वे भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते उनके पास 20 या उससे अधिक पशुधन हो। पात्र लाभार्थियों को कुल लागत पर 75 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जाता है।
आवेदन की प्रक्रिया
योजना का लाभ लेने के इच्छुक पशुपालक अपने नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र पर संपर्क कर सकते हैं। वहां से विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के बाद निर्धारित आवेदन पत्र भरना होता है। विभागीय स्तर पर जांच के बाद पात्रता तय की जाती है और चयनित हितग्राही को सांड उपलब्ध कराया जाता है।
घटती रुचि के कारण
अधिकारियों का कहना है कि पहले किसान इस योजना के प्रति अधिक उत्साहित रहते थे। उस समय खेती में बैलों का उपयोग आम था, इसलिए उन्नत नस्ल के सांड की मांग भी ज्यादा रहती थी। लेकिन अब ट्रैक्टर के बढ़ते उपयोग के कारण बैल पालन में रुचि कम हुई है। यही वजह है कि कई किसान योजना का लाभ लेने आगे नहीं आते।
जागरूकता बढ़ाने की जरूरत
पशु विभाग का मानना है कि यदि पशुपालकों को नस्ल सुधार के लाभों के बारे में सही जानकारी दी जाए, तो वे इस योजना का अधिक उपयोग कर सकते हैं। उन्नत नस्ल के पशु न केवल दूध उत्पादन बढ़ाते हैं, बल्कि पशुपालन को अधिक लाभकारी भी बना सकते हैं।
नंदी शाला योजना पशुपालन क्षेत्र में सुधार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य बेहतर नस्ल और उत्पादन क्षमता को बढ़ावा देना है। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और सही मार्गदर्शन से इसका लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जा सकता है।

