AgricultureMarketing – किसानों की उपज को बेहतर बाजार दिलाने की नई व्यवस्था लागू
AgricultureMarketing – राज्य सरकार ने किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने और बाजार तक सीधी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कृषि विपणन व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत किया है। अब जिला से लेकर पंचायत स्तर तक कृषि पदाधिकारियों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय कर दी गई है, ताकि किसानों की उपज खेत से बाजार तक बिना किसी रुकावट के पहुंच सके। यह पहल चतुर्थ कृषि रोड मैप के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य कृषि उत्पादों की बिक्री, भंडारण और मूल्य संवर्द्धन की पूरी श्रृंखला को व्यवस्थित करना है।

कृषि विपणन को लेकर पहली बार तय हुई स्पष्ट जवाबदेही
पहली बार राज्य में कृषि विपणन से जुड़े कार्यों के लिए पदाधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई है। कृषि विभाग ने इसके लिए अपने ढांचे में बदलाव करते हुए विपणन निदेशालय का गठन किया है। इस निदेशालय के माध्यम से क्षेत्रीय स्तर पर कार्यों के बेहतर संचालन की योजना बनाई गई है। अब किसानों को बाजार भाव की जानकारी देने, उनकी उपज को ग्रामीण हाट और बाजार प्रांगण तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सीधे कृषि पदाधिकारियों को सौंपी गई है।
जिला स्तर पर कृषि विपणन पदाधिकारी की अहम भूमिका
जिला कृषि विपणन पदाधिकारी सह विशेष पदाधिकारी को जिले में बाजार प्रांगणों के विकास की जिम्मेदारी दी गई है। वे किसानों के उत्पादों को संगठित करने वाले एफपीओ, जीआई टैग प्राप्त उत्पादों और अन्य कृषि वस्तुओं के निर्यात से जुड़े कार्यों की निगरानी करेंगे। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने और उससे जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी इन्हीं के पास होगी।
भंडारण और बाजार भाव से जुड़े कार्यों पर विशेष फोकस
किसानों को फसल का सही दाम दिलाने के लिए भंडारण और बाजार भाव की भूमिका अहम मानी जा रही है। जिला स्तर पर भंडारण सुविधाओं का विस्तार, कोल्ड स्टोरेज की स्थापना और बाजार भाव की नियमित जानकारी किसानों तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा कृषि मेले, स्थानीय बाजारों की निगरानी और किसानों व व्यापारियों के बीच बेहतर समन्वय बनाने का काम भी किया जाएगा।
राष्ट्रीय संस्थाओं से समन्वय की जिम्मेदारी
कृषि विपणन पदाधिकारी को एपीडा जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करने का दायित्व भी सौंपा गया है। इसके साथ ही नाबार्ड की विभिन्न योजनाओं को जिले में प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी जोर दिया जाएगा। मखाना बोर्ड, कृषि विज्ञान केंद्र और विश्वविद्यालयों के साथ तालमेल बनाकर किसानों को आधुनिक तकनीक और नई संभावनाओं से जोड़ने की योजना है।
किसानों के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम
सरकार का मानना है कि केवल बाजार उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को सही जानकारी और प्रशिक्षण देना भी जरूरी है। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, गोष्ठियां और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के जरिए किसानों को फसल प्रबंधन, भंडारण, मूल्य संवर्द्धन और विपणन से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी जाएगी।
अवर कृषि पदाधिकारी निभाएंगे सहयोगी भूमिका
अवर कृषि पदाधिकारी जिला कृषि विपणन पदाधिकारी के कार्यों में सहयोग करेंगे और बाजार प्रांगण स्तर की सभी व्यवस्थाओं की देखरेख करेंगे। बाजार प्रांगणों में आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास, कोल्ड स्टोरेज निर्माण और दैनिक संचालन की जिम्मेदारी इन्हीं के पास होगी। इससे स्थानीय स्तर पर समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो सकेगा।
किसानों को मिलेगा उपज का बेहतर मूल्य
नई व्यवस्था से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सरकारी तंत्र के माध्यम से उन्हें बाजार से जोड़ने, उचित मूल्य दिलाने और निर्यात की संभावनाएं तलाशने का प्रयास किया जा रहा है। कृषि विभाग का मानना है कि इससे किसानों की आय में स्थायी वृद्धि होगी और राज्य का कृषि क्षेत्र अधिक संगठित और प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।

