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Success Story: लाख की खेती कर इस युवा किसान ने बदली अपनी किस्मत, कमाई जानकर चौंक जाएंगे आप

Success Story: गुमला के रायडीह ज़िले के बामलकेरा नामक एकांत बस्ती के मूल निवासी भूषण किड़ो ने लाख की खेती करके एक मिसाल कायम की है। उन्होंने सरकारी नौकरी के लिए कड़ी मेहनत की, लेकिन जब उन्हें सफलता नहीं मिली, तो उन्होंने हार नहीं मानी। बल्कि, लगन से लाख की खेती (Lac Cultivation) को अपना पेशा बना लिया और आज वे सालाना लाखों रुपये कमाते हैं। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार का जीवन स्तर ऊँचा उठाया है, बल्कि रोज़गार की तलाश में बाहर जाने वाले युवाओं के लिए भी एक मिसाल कायम की है।

Success story

लाख की खेती से आया बदलाव

भूषण ने बताया कि मैट्रिक तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कई सरकारी नौकरियों (Government Jobs) के लिए कोशिश की, लेकिन असफल रहे। बेरोज़गारी के इस दौर में उन्हें परिवार का भरण-पोषण करने की चिंता सताने लगी। इसी बीच, गुमला स्थित एक निर्माण कंपनी ने लाख की खेती का प्रशिक्षण देना शुरू किया। भूषण ने इस मौके का फ़ायदा उठाया और प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने पाया कि सेमियालता के पौधे लाख उत्पादन के लिए आदर्श होते हैं। निगम द्वारा पौधे दिए जाने के बाद, उन्होंने अपनी 50 दशमलव एकड़ ज़मीन पर सेमियालता के पौधे लगाए।

खेती और कमाई के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल

भूषण ने सेमियालता के पौधों की देखभाल की और उन्हें एक मीटर की दूरी पर दो मीटर के अनुपात में लगाया। एक साल बाद, उन्होंने इन पौधों पर उपयुक्त दवा का छिड़काव और लाख लगाना शुरू किया। उन्होंने केवल 6 महीनों में 1.5 से 2 लाख रुपये कमाए, जो एक बहुत ही शानदार परिणाम था। इस उपलब्धि से प्रेरित होकर, भूषण ने खेती और सेमियालता (Cultivation and Semiprecious) के पौधों की नर्सरी शुरू की। वह इन पौधों को बेचकर सालाना 50,000 रुपये अतिरिक्त कमाते हैं। लाख की खेती में आसानी और कम रखरखाव की आवश्यकता के कारण, सेमियालता के पौधों की बाजार में काफी मांग है। उनके अनुसार, इससे हर साल 5 से 6 लाख रुपये की आय होती है।

दूसरों के लिए प्रेरणा

ऐसे दौर में जब कई युवा काम की तलाश में अपने गृह राज्य छोड़ रहे हैं, भूषण की उपलब्धियाँ एक प्रेरणा बन गई हैं। बाहर जाकर अच्छी कमाई करने के बजाय, वह लोगों को घर पर ही लाख उगाने का सुझाव देते हैं। भूषण ने अपनी नर्सरी में सैकड़ों पौधे तैयार किए हैं ताकि लाख किसानों को सेमियालता (Semialta) के पौधे आसानी से मिल सकें। गुमला, सिमडेगा और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे गाँवों से भी लोग इन पौधों को खरीदने आते हैं, जो 20 रुपये प्रति पौधे की दर से बिकते हैं। भूषण के प्रयासों से न केवल उनके परिवार का जीवन स्तर ऊँचा हुआ है, बल्कि उनके बच्चे गुमला के प्रतिष्ठित निजी स्कूलों में पढ़ पा रहे हैं।

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