WheatInnovation – सीकर के किसान ने विकसित की मजबूत नई किस्म
WheatInnovation – गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए राजस्थान के सीकर से एक अहम पहल सामने आई है। यहां के किसान विकास कुमार सैनी ने करीब नौ वर्षों के प्रयास के बाद गेहूं की ऐसी किस्म तैयार की है, जिसे मौसम की मार झेलने में सक्षम बताया जा रहा है। हाल ही में वे अपनी फसल के नमूने के साथ भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पहुंचे, जहां लगभग साढ़े छह फीट ऊंचे पौधों ने कृषि विशेषज्ञों और किसानों का ध्यान आकर्षित किया। इस नई किस्म को लेकर दावा है कि तेज हवा, बारिश या आंधी के दौरान भी फसल आसानी से नहीं गिरती।

अजय राज नाम से पंजीकरण की प्रक्रिया
विकास कुमार सैनी ने अपनी विकसित किस्म का नाम ‘अजय राज’ रखा है। उनका कहना है कि यह प्रयोग लंबे समय तक चयन और परीक्षण के बाद संभव हो पाया। उन्होंने इस किस्म के संरक्षण और अधिकार के लिए प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैराइटीज एंड फार्मर्स राइट्स अथॉरिटी में आवेदन भी किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उनकी विकसित किस्म का स्वामित्व सुरक्षित रहे और भविष्य में इसका व्यावसायिक उपयोग नियमों के तहत हो सके।
सीकर में वे लगभग 40 बीघा जमीन पर इस गेहूं की खेती कर रहे हैं। उनके अनुसार पारंपरिक किस्मों की तुलना में उन्हें अधिक उत्पादन और बेहतर आर्थिक परिणाम मिले हैं। हालांकि अंतिम आकलन व्यापक स्तर पर परीक्षण के बाद ही संभव होगा।
उत्पादन और मजबूती पर दावा
किसान के मुताबिक यह किस्म तेज हवा या बारिश के दौरान भी आसानी से नहीं गिरती, जिससे कटाई के समय नुकसान कम हो सकता है। एक स्थान पर 40 से 45 क्विंटल तक उत्पादन मिलने का दावा किया गया है। राजस्थान जैसे राज्य में जहां पशु चारे की कमी अक्सर सामने आती है, वहां इस किस्म के लंबे और मजबूत तनों को उपयोगी बताया जा रहा है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी नई किस्म में रोग प्रतिरोधक क्षमता और अनुकूलन की विशेषता हो, तो वह किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। हालांकि किसी भी नई फसल को बड़े पैमाने पर अपनाने से पहले विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में परीक्षण जरूरी माना जाता है।
पोषण तत्वों पर विशेष ध्यान
विकास कुमार सैनी का कहना है कि यह गेहूं केवल उत्पादन के लिहाज से ही नहीं, बल्कि पोषण के दृष्टिकोण से भी बेहतर है। उनके अनुसार इसमें लगभग 11.06 ग्राम प्रोटीन, 18 मिलीग्राम पोटैशियम, 3.15 ग्राम शुगर और 3.92 ग्राम फाइबर पाया गया है। इसके अलावा सोडियम, आयरन, कैल्शियम और विटामिन ए जैसे तत्व भी इसमें मौजूद बताए गए हैं।
यदि ये दावे व्यापक वैज्ञानिक परीक्षणों में प्रमाणित होते हैं, तो यह किस्म पोषण सुरक्षा की दिशा में भी अहम भूमिका निभा सकती है। वर्तमान समय में उपभोक्ता ऐसे अनाज की मांग कर रहे हैं जो स्वाद के साथ स्वास्थ्यवर्धक भी हो।
अन्य राज्यों के लिए संभावनाएं
किसान का दावा है कि यह किस्म अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। हालांकि कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी भी नई किस्म को विभिन्न राज्यों की मिट्टी और मौसम के अनुसार परखना जरूरी है। यदि परीक्षण सफल रहते हैं, तो यह किस्म किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो सकती है।
लगभग सात फीट तक पहुंचने वाली इस फसल की ऊंचाई इसे पारंपरिक गेहूं से अलग बनाती है। फिलहाल उपलब्ध फसल की लंबाई साढ़े छह फीट बताई गई है। आने वाले समय में अनुसंधान संस्थानों द्वारा मूल्यांकन के बाद ही इसके व्यापक उपयोग की तस्वीर साफ हो पाएगी।

