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Tomato Farming Success story- बागपत के किसान ने बदली खेती की दिशा

Tomato Farming Success story- उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के लहचौड़ा गांव में रहने वाले किसान आदेश कुमार ने पारंपरिक खेती से अलग राह चुनकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। कभी गन्ना, धान और गेहूं जैसी फसलों पर निर्भर रहने वाले आदेश अब टमाटर की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। बढ़ती लागत और घटती आय ने उन्हें कुछ साल पहले खेती छोड़ने पर मजबूर कर दिया था, लेकिन सही सलाह और प्रशिक्षण ने उनकी सोच बदल दी। आज उनकी मेहनत क्षेत्र के किसानों के लिए उदाहरण बन चुकी है।

Tomato farming bagpat farmer story

पारंपरिक फसलों से असंतोष की वजह

आदेश कुमार बताते हैं कि पारंपरिक फसलों में लागत लगातार बढ़ रही थी, जबकि बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा था। उर्वरक, बीज और सिंचाई पर होने वाला खर्च बढ़ता जा रहा था। कई बार मौसम की मार भी झेलनी पड़ती थी। ऐसे में मेहनत के मुकाबले आमदनी कम होती जा रही थी। इसी दौरान उन्होंने खेती में बदलाव करने का मन बनाया और नई संभावनाओं की तलाश शुरू की। यही खोज उन्हें सब्जी उत्पादन की ओर ले गई।

यूट्यूब और कृषि विज्ञान केंद्र से मिला मार्गदर्शन

टमाटर की खेती का विचार आने के बाद आदेश कुमार ने पहले जानकारी जुटानी शुरू की। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध वीडियो से खेती की बारीकियां समझीं। इसके साथ ही बागपत स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में जाकर विशेषज्ञों से प्रशिक्षण लिया। वहां उन्हें उन्नत बीज चयन, पौध तैयार करने की विधि, पोषक तत्व प्रबंधन और रोग नियंत्रण के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिक शुभम सिंह की सलाह ने उन्हें सही दिशा दिखाई। वैज्ञानिक पद्धति अपनाने के बाद उनकी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार हुआ।

एक एकड़ में लाखों का सालाना लाभ

वर्तमान में आदेश कुमार लगभग एक एकड़ भूमि पर टमाटर की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि साल भर में करीब तीन लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है। औसतन एक बीघा से लगभग 60 हजार रुपये तक का शुद्ध लाभ मिलता है, जो पारंपरिक फसलों की तुलना में काफी अधिक है। बाजार में फिलहाल टमाटर का भाव करीब 20 रुपये प्रति किलो चल रहा है। वे मानते हैं कि यदि कीमत बढ़े तो मुनाफा और बेहतर हो सकता है। सही समय पर बुवाई और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर फसल तैयार करने से आय स्थिर बनी रहती है।

बिक्री व्यवस्था से बढ़ा फायदा

आदेश कुमार की उपज का बड़ा हिस्सा दिल्ली की मंडियों में भेजा जाता है। वहीं लगभग आधी फसल सीधे खेत से ही व्यापारियों को बेच दी जाती है। इससे उन्हें परिवहन पर होने वाला अतिरिक्त खर्च बच जाता है। स्थानीय स्तर पर सौदा तय हो जाने से भुगतान भी समय पर मिल जाता है। इस रणनीति ने उनकी आय को और संतुलित किया है। वे बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखते हैं और उसी के अनुसार आपूर्ति तय करते हैं।

रोग नियंत्रण और देखभाल पर विशेष ध्यान

टमाटर की खेती में कीट और रोग का खतरा रहता है। आदेश बताते हैं कि नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। पौधों की समय-समय पर जांच, संतुलित खाद का उपयोग और जरूरत पड़ने पर उचित दवा का छिड़काव करने से नुकसान कम किया जा सकता है। वे खेत में स्वच्छता और जल निकास की व्यवस्था पर भी ध्यान देते हैं। इन सावधानियों से फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन बेहतर मिलता है।

आसपास के किसानों के लिए बनी मिसाल

आदेश कुमार की सफलता से प्रेरित होकर आसपास के कई किसान अब सब्जी खेती की ओर रुख कर रहे हैं। वे अपने अनुभव साझा करते हैं और प्रशिक्षण लेने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि बदलते समय में किसानों को बाजार की मांग के अनुसार फसल चयन करना चाहिए। सही जानकारी और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। लहचौड़ा गांव में उनकी पहल ने यह साबित कर दिया है कि नई सोच और मेहनत से खेती में भी बेहतर भविष्य संभव है।

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