Success Story: रिटायर्ड फौजी ने यूट्यूब से सीखा फसल उगाने का तरीका, अब कमा रहे हैं मोटी रकम
Success Story: सीमा पर सेना में सेवा देने के बाद, सूबेदार नीलेश कुमार अब खगड़िया के खेतों में एक नई क्रांति ला रहे हैं। जनवरी 2023 में, सेना छोड़ने के बाद, नीलेश ने पारंपरिक फसलों (Traditional Crops) की जगह ड्रैगन फ्रूट उगाना शुरू किया। एक यूट्यूब वीडियो देखने के बाद, उन्होंने इसे आज़माने का फैसला किया। उन्होंने मार्च 2024 में आसनसोल से 900 पौधों का ऑर्डर दिया। 800 खंभे भी लगाए गए, और एक क्रांतिकारी कृषि पद्धति की शुरुआत हुई।

सुबेदार, सेवानिवृत्त, खगड़िया में ड्रैगन फ्रूट (Dragon Fruit) उगाने वाले पहले किसान नीलेश कुमार हैं। बाज़ार के दुकानदारों ने पहले तो इसे लेने से इनकार कर दिया, लेकिन जब नीलेश ने दूसरों को इसे खाने के लिए मजबूर किया, तो माँग इतनी बढ़ गई कि वे इसे खाने में असमर्थ हो गए।
कृषि का विकासशील स्वरूप
नीलेश के अनुसार, उन्होंने अब तक ड्रैगन फ्रूट की खेती (Dragon Fruit Cultivation) पर लगभग 8 लाख रुपये का निवेश किया है, लेकिन उनकी मेहनत आखिरकार रंग लाई है। प्रत्येक खंभे पर चार-चार पौधे उग रहे हैं, और फल का वज़न 900 ग्राम तक है। बाजार मूल्य 200 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ गया है। लाभ कमाने के अलावा, नीलेश स्थानीय किसानों के लिए एक आदर्श बन गए हैं। अब वह इस खेती को आठ कट्ठे से बड़े पैमाने पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। उनके सपने के अनुसार, गाँव की छवि तभी बदलेगी जब प्रत्येक किसान एक नया दृष्टिकोण अपनाएगा।
ड्रैगन मिशन सरकार
नीलेश के अनुसार, वह बिहार सरकार की ड्रैगन फ्रूट विकास योजना (Dragon Fruit Development Scheme) के तहत सब्सिडी के पात्र हैं। खगड़िया के बागवानी विभाग के यशवंत कुमार के अनुसार, इस पहल के तहत प्रति एकड़ 2.70 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है। इस सब्सिडी के लिए दो भुगतान होते हैं, जहाँ दूसरे वर्ष 40% और पहले वर्ष 60% दिया जाता है।
किसान नीलेश ने कहा कि हालाँकि उन्होंने अकेले शुरुआत की थी, अब वे सरकारी सहायता से इसे आगे बढ़ाएँगे, जिससे आर्थिक तंगी कम होगी और वे बाजार की माँग को पूरा कर सकेंगे। इस उत्पादन का बाजार मूल्य हर महीने 30,000 से 50,000 डॉलर के बीच है।

