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Success Story: पढ़ें बंजर धरती से सोना उगाने वाले रोहतास के किसान विजय बहादुर सिंह की प्रेरक गाथा

Success Story: बिहार के रोहतास जिले के राजपुर ब्लॉक स्थित सबेया गांव के एक साधारण किसान विजय बहादुर सिंह ने वह कर दिखाया है जो असंभव प्रतीत होता था। उन्होंने अपनी अटूट मेहनत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लगभग 2.0 हेक्टेयर (Innovative Agriculture) वाली ऐसी बंजर और रेतीली भूमि को उपजाऊ बना दिया, जिसे लोग खेती के योग्य नहीं समझते थे। आज उनकी यह भूमि केवल एक खेत नहीं, बल्कि कृषि जगत के लिए एक जीवंत प्रदर्शनी बन चुकी है, जहाँ दूर-दूर से लोग आधुनिक खेती के गुर सीखने आते हैं।

Success story

केवीके वैज्ञानिकों का साथ और तकनीकी ज्ञान का संगम

विजय बहादुर सिंह की सफलता के पीछे कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन रहा है। उन्होंने रेतीली मिट्टी के (Land Management) की बारीकियों को समझा और वैज्ञानिकों की सलाह पर पारंपरिक खेती के बजाय बागवानी फसलों को चुनने का साहसी निर्णय लिया। उन्होंने सीखा कि कैसे सही तकनीकी हस्तक्षेप और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार के जरिए प्रकृति के प्रतिकूल हालातों को भी अनुकूल बनाया जा सकता है।

वर्मी-कम्पोस्ट और मल्चिंग से मिट्टी का कायाकल्प

मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए विजय बहादुर सिंह ने साल 2010 से ही वर्मी-कम्पोस्ट का उत्पादन शुरू किया। उन्होंने रासायनिक खादों के बजाय (Organic Farming) पर जोर दिया और जैविक व अजैविक मल्चिंग का उपयोग करके मिट्टी की नमी को संरक्षित किया। मात्र तीन वर्षों के भीतर, उनके खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता में इतना सुधार हुआ कि उत्पादकता कई गुना बढ़ गई, जिससे बंजर भूमि अब हरी-भरी फसलों से लहलहाने लगी है।

सिंचाई की उन्नत विधियों से जल प्रबंधन की मिसाल

ऊँची और रेतीली जमीन होने के कारण यहाँ सिंचाई की पारंपरिक विधियाँ पूरी तरह विफल साबित हो रही थीं। इस चुनौती से निपटने के लिए विजय बहादुर ने (Modern Irrigation) तकनीकों को अपनाया, जिसमें ड्रिप सिंचाई, माइक्रो स्प्रिंकलर और रेन-गन जैसी विधियाँ शामिल हैं। पानी की एक-एक बूंद का सटीक उपयोग सुनिश्चित करके उन्होंने न केवल जल संरक्षण किया, बल्कि कम पानी में भी अधिक पैदावार लेने का बेहतरीन उदाहरण पेश किया।

ऑफ-सीजन सब्जियों की खेती और आर्थिक समृद्धि

रोहतास जिले में आमतौर पर चावल और गेहूं की फसल ली जाती है, जिससे बरसाती मौसम में सब्जियों की किल्लत रहती है। विजय बहादुर ने इस (Market Opportunity) को पहचाना और ऑफ-सीजन सब्जियों का उत्पादन शुरू किया। जब बाजार में सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही होती हैं, तब उनकी फसल तैयार होती है, जिससे उन्हें बहुत कम लागत में शानदार मुनाफा प्राप्त होता है।

फसलों का आर्थिक रिपोर्ट कार्ड: लागत कम, मुनाफा ज्यादा

विजय बहादुर सिंह की सफलता को आंकड़ों के जरिए भी समझा जा सकता है। उनकी कुछ प्रमुख फसलों का (Economic Performance) वाकई प्रभावशाली है। ओएल और स्पंज लौकी जैसी फसलों से उन्हें 3.9 से लेकर 9.45 तक का बीसी अनुपात (लाभ-लागत अनुपात) प्राप्त हुआ है। हल्दी, टमाटर और करेले की खेती से वे लाखों का शुद्ध लाभ कमा रहे हैं, जो उनकी उन्नत कृषि प्रबंधन और मेहनत का प्रमाण है।

नीलगायों के आतंक का स्वदेशी और सस्ता समाधान

खेती में सफलता के बीच नीलगायों और आवारा पशुओं के आतंक ने एक बड़ी बाधा खड़ी कर दी थी। इससे निपटने के लिए विजय बहादुर ने एक (Innovative Invention) किया—पैराशूट के धागे से बना एक विशेष सुरक्षात्मक जाल। स्थानीय बुनाई कौशल से तैयार इस जाल की लागत मात्र 5 रुपये प्रति फुट है और यह तीन साल तक चलता है। यह सस्ता और टिकाऊ जाल अब पूरे क्षेत्र के किसानों के बीच बेहद लोकप्रिय हो रहा है।

केंचुआ पालन: खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी का जरिया

सिर्फ फसलों तक सीमित न रहकर उन्होंने कृषि को एक व्यापारिक मॉडल के रूप में विकसित किया है। वह वर्मी-कम्पोस्ट के साथ-साथ केंचुओं की बिक्री भी करते हैं, जिससे वह सालाना (Additional Income) के तौर पर 25 से 3 लाख रुपये तक कमा रहे हैं। यह आय अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणा (Success Story) है कि कैसे एकीकृत कृषि प्रणाली के माध्यम से आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है।

मास्टर ट्रेनर के रूप में मिली राष्ट्रीय और राजकीय पहचान

विजय बहादुर सिंह (Success Story) की उपलब्धियों को देखते हुए बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने उन्हें वर्ष 2012-13 में ‘सबसे प्रगतिशील किसान’ के रूप में सम्मानित किया। आज वह (Master Trainer) की भूमिका निभा रहे हैं और जिला प्रशासन व कृषि विभाग के क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में अन्य किसानों को प्रशिक्षित करते हैं। डीएओ और डीएचओ जैसे उच्च अधिकारी भी उनके ज्ञान का उपयोग कृषि विकास योजनाओं में कर रहे हैं।

निष्कर्ष: आधुनिक भारत के नए किसान का चेहरा

विजय बहादुर सिंह की कहानी (Success Story) यह साबित करती है कि यदि किसान वैज्ञानिक सलाह और आधुनिक तकनीकों को ईमानदारी के साथ अपनाए, तो बंजर भूमि भी सोना उगल सकती है। उनके (Farming Innovation) ने न केवल उनके परिवार की समृद्धि सुनिश्चित की है, बल्कि पूरे रोहतास जिले के किसानों को एक नई दिशा दिखाई है। वह सही मायने में ‘अन्नदाता’ के साथ-साथ एक ‘कृषि वैज्ञानिक’ के रूप में उभरे हैं।

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