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Success Story: पारंपरिक खेती छोड़ पति के साथ अश्वगंधा की खेती करने लगी यह महिला, अब हर महीने कर रही अच्छी कमाई

Success Story: मध्य प्रदेश का खंडवा जिला अब अपनी पारंपरिक फसलों के अलावा औषधीय खेती के लिए भी जाना जाता है। अपने पतियों के साथ अश्वगंधा जैसी औषधीय फसलें (Medicinal Crops) उगाकर इस क्षेत्र की कुछ आदिवासी महिलाएं न केवल लाखों डॉलर कमा रही हैं, बल्कि उन्होंने पूरे समुदाय को भी प्रेरित किया है। अपनी लगन और मेहनत से ये महिलाएं एक नई राह पर चल रही हैं, जिसने न केवल उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाया है, बल्कि पूरे समाज के लिए महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) का एक सशक्त उदाहरण भी पेश किया है।

Cultivation of ashwagandha

औषधीय फसलें (Medicinal Crops) उगाना किया शुरू

कला बामने, पुष्पा कोगे, सरस्वती पाटिल, मंजू दीदी, अनीता दीदी, कल्पना दीदी, रुक्मिणी दीदी और आशा दीदी खंडवा के खालवा विकासखंड की कुछ प्रसिद्ध महिलाएं हैं। उन्होंने गेहूं, अरहर, चना और तिलहन की सामान्य फसलों की बजाय औषधीय फसलें उगाना शुरू कर दिया। जब उन्हें कृषि विज्ञान केंद्र और नमामि आजीविका मिशन द्वारा प्रशिक्षित किया गया, तो अश्वगंधा की खेती (Cultivation of Ashwagandha) में उनकी रुचि विशेष रूप से बढ़ गई।

इन महिलाओं के अनुसार, पारंपरिक फसलें (Traditional Crops) उन्हें केवल जीविका चलाने लायक आय प्रदान करती थीं, लेकिन अश्वगंधा जैसी औषधीय फसलों ने उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने में मदद की है। उन्होंने एक एकड़ में अश्वगंधा उगाना शुरू किया और पहले साल की उपज उनकी उम्मीदों से बढ़कर रही। वे अब इसकी खेती बड़े पैमाने पर कर रही हैं और इसके परिणामस्वरूप वे अधिक आत्मविश्वास महसूस कर रही हैं।

अश्वगंधा (Ashwagandha) को क्या खास बनाता है?

आयुर्वेद में अश्वगंधा को एक ज़रूरी औषधि माना जाता है। कई दवाओं और आहार पूरकों में इसकी जड़ें शामिल हैं। इसका उपयोग प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने और तनाव, नींद की कमी और थकावट जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है। यह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अश्वगंधा की उच्च मांग को स्पष्ट करता है।

यह फसल काफी मात्रा में उत्पादन करती है, खासकर जब इसे कम सिंचाई मिलती है। इसे एक ऐसी फसल माना जाता है जो सूखे को झेल सकती है। लागत भी कम होती है क्योंकि इसमें कम उर्वरक और कीटनाशकों का उपयोग होता है। पारंपरिक खेती की तुलना में, अनीता और उनके सहकर्मी बहुत ज़्यादा पैसा कमा रहे हैं – अश्वगंधा की जड़ से लगभग 35,000 रुपये प्रति क्विंटल।

महिलाओं की सफलता

सामाजिक परिवर्तन (Social Change) और महिलाओं का सशक्तिकरण इन महिलाओं की सफलता न केवल उनके लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक सामाजिक क्रांति का प्रतीक है। इन महिलाओं की सफलता को देखकर आस-पास के गाँवों के पुरुष किसान अश्वगंधा और अन्य चिकित्सीय फसलों में तेज़ी से दिलचस्पी ले रहे हैं। खेती के अलावा, महिलाएँ दूसरी महिलाओं को सिखा भी रही हैं और उनका मार्गदर्शन भी कर रही हैं। सरकारी सहायता की आवश्यकता है। ये महिलाएँ चाहती हैं कि सरकार द्वारा इस तरह की खेती को और बढ़ावा दिया जाए।

औषधीय फसलों (Medicinal Crops) पर विशेष सब्सिडी

यदि सरकार ऐसी योजना लागू करती है जिसमें औषधीय फसलों के लिए विशेष सब्सिडी, बीज उपलब्धता, विपणन सहायता और बाजार लिंकेज (Subsidy, seed availability, marketing assistance and market linkage) शामिल है, तो इस कार्यक्रम से अधिक किसान लाभान्वित होंगे। साथ ही, औषधीय खेती के परिणामस्वरूप राज्य की अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम मिलेगा। खंडवा की ये महिलाएँ आज यह साबित कर रही हैं कि अगर दृढ़ इच्छाशक्ति और सही दिशा हो तो सब कुछ संभव है। अश्वगंधा की खेती (Cultivation of Ashwagandha) के परिणामस्वरूप उनकी जीवनशैली और उनके खेतों की सूरत दोनों बदल गई है। आज, ये महिलाएँ अपने लिए काम करती हैं, स्वतंत्र हैं और दूसरों के लिए रोल मॉडल हैं।

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