Success Story: रोहतास के महान प्रगतिशील किसान की प्रेरक सफलता की कहानी
Success Story: आज के समय में जब खेती को घाटे का सौदा माना जाने लगा है, ऐसे में बिहार के रोहतास जिले के एक किसान ने यह साबित कर दिया कि वैज्ञानिक खेती, नवाचार और मेहनत से बंजर ज़मीन भी सोना उगल सकती है। हम बात कर रहे हैं श्री विजय बहादुर सिंह, जो आज पूरे जिले में एक सफल और नवाचारी किसान के रूप में पहचाने जाते हैं।

किसान का परिचय (Success Story)
नाम: श्री विजय बहादुर सिंह
पिता का नाम: स्व. सीताराम सिंह
ग्राम: सबेया
प्रखंड: राजपुर
जिला: रोहतास, बिहार
पिन कोड: 802219
मोबाइल: +91 8002119937
बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने का सपना
श्री विजय बहादुर सिंह के पास लगभग 2.0 हेक्टेयर ऊँची व बलुई (सैंडी) बंजर भूमि थी, जहाँ पारंपरिक खेती संभव नहीं थी। उनका लक्ष्य स्पष्ट था —
बंजर ज़मीन में भी फसल उगाना और उसे लाभकारी बनाना।
इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), रोहतास के वैज्ञानिकों से मार्गदर्शन लिया और समेकित भूमि एवं जल प्रबंधन तकनीकों को अपनाया।
वैज्ञानिक खेती से बदली ज़मीन की किस्मत
पिछले 3 वर्षों में उन्होंने अपनी भूमि में कई नवाचार किए, जैसे:
वर्मी-कम्पोस्ट का उत्पादन एवं उपयोग
जैविक एवं अकार्बनिक मल्च का प्रयोग
फसल चक्र (Crop Rotation) का वैज्ञानिक चयन
ड्रिप, माइक्रो-स्प्रिंकलर, स्प्रिंकलर एवं रेनगन जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियाँ
इन उपायों से मिट्टी की उर्वरता, जलधारण क्षमता और फसल उत्पादन में कई गुना सुधार हुआ।
वर्मी-कम्पोस्ट: सफलता की नींव
वर्ष 2010 से श्री सिंह ने वर्मी-कम्पोस्ट का उत्पादन शुरू किया ताकि भूमि की जैविक ज़रूरतें पूरी हो सकें।
शुरुआत में उन्होंने वर्षा ऋतु में सब्ज़ियों की खेती की, जिससे उन्हें अच्छा लाभ मिला क्योंकि इस मौसम में रोहतास जिले में सब्ज़ियों की उपलब्धता कम रहती है।
यहीं से उन्हें समझ आ गया कि सब्ज़ी उत्पादन उनके लिए सबसे लाभकारी विकल्प हो सकता है।
फसल विविधीकरण से बढ़ी आमदनी
इसके बाद उन्होंने पूरे वर्ष एक ही खेत में अलग-अलग फसलों की खेती शुरू की।
प्रमुख फसलों का आर्थिक प्रदर्शन
| फसल | शुद्ध लाभ (₹) | बी.सी. अनुपात |
|---|---|---|
| ओल | 3,40,000 | 3.9 |
| स्पंज गार्ड | 4,25,000 | 9.4 |
| करेला | 5,15,000 | 8.6 |
| हल्दी | 2,00,000 | 3.5 |
| लौकी | 2,20,000 | 4.3 |
| टमाटर | 4,35,000 | 5.3 |
इसके अलावा उन्होंने भिंडी, खीरा, बैंगन, पालक, मेथी, चना, प्याज, लहसुन, सरसों, स्ट्रॉबेरी, चुकंदर, मूली, गाजर, पत्ता गोभी और फूल गोभी जैसी कई फसलों का भी सफल परीक्षण किया।
खेती के साथ अतिरिक्त आय का ज़रिया
खेती के अलावा श्री विजय बहादुर सिंह:
केंचुआ (वर्मी) विक्रय से सालाना 2.5 से 3 लाख रुपये की अतिरिक्त आमदनी कर रहे हैं।
यह आय उनकी खेती को और अधिक स्थिर और सुरक्षित बनाती है।
नीलगाय से बचाव का अनोखा समाधान
फसलें बढ़ने के साथ नीलगाय और आवारा पशुओं की समस्या भी सामने आई। इसका समाधान उन्होंने खुद खोजा।
उन्होंने:
पैराशूट धागे से सुरक्षात्मक जाल तैयार किया
लागत: लगभग ₹5 प्रति फीट
उपयोग अवधि: लगभग 3 वर्ष
यह जाल न केवल नीलगाय बल्कि सभी आवारा पशुओं से खेत की रक्षा करता है और आज यह तकनीक आसपास के किसानों में तेज़ी से लोकप्रिय हो रही है।
सम्मान और पहचान
उनकी नवाचारी सोच और मेहनत को देखते हुए:
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर (भागलपुर) ने वर्ष 2012–13 में उन्हें
“सर्वाधिक प्रगतिशील किसान” पुरस्कार से सम्मानित किया।
आज वे:
कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), रोहतास
कृषि विभाग, उद्यान विभाग, ATMA, मृदा संरक्षण विभाग
द्वारा मास्टर ट्रेनर के रूप में किसानों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
नई पीढ़ी के किसानों के लिए प्रेरणा
श्री विजय बहादुर सिंह की कहानी यह सिखाती है कि:
बंजर भूमि कोई अभिशाप नहीं
सही मार्गदर्शन और तकनीक से खेती लाभ का सौदा बन सकती है
नवाचार ही किसान की असली ताकत है
आज वे न सिर्फ रोहतास जिले बल्कि पूरे बिहार के किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं।

