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Pomegranate Farming Success story – कैंसर से जंग जीतकर महिला किसान ने बदली किस्मत

Pomegranate Farming Success story – राजस्थान के नागौर जिले के हिलोरी गांव की रहने वाली प्रेम कंवर चारण की कहानी हौसले और मेहनत की ऐसी मिसाल बन चुकी है, जो कई लोगों को प्रेरित करती है। कुछ साल पहले तक वह सामान्य ग्रामीण गृहिणी की तरह जीवन जी रही थीं। लेकिन जब उन्हें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता चला, तो उनकी जिंदगी अचानक बदल गई। इलाज के लंबे दौर और मानसिक तनाव के बीच उन्होंने खुद को संभाला और मजबूत इच्छाशक्ति के सहारे बीमारी से लड़ते हुए आखिरकार स्वस्थ हो गईं। बीमारी से उबरने के बाद उन्होंने तय किया कि अब जीवन को नए तरीके से जीना है और खुद को किसी सार्थक काम में व्यस्त रखना है। इसी सोच ने उन्हें खेती की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

Woman farmer pomegranate success story

खेती की राह आसान नहीं थी

प्रेम कंवर के सामने सबसे बड़ी चुनौती गांव की परिस्थितियां थीं। जिस इलाके में उनका खेत था, वहां पानी की कमी और जमीन की खराब स्थिति के कारण पारंपरिक खेती करना काफी कठिन माना जाता है। शुरुआत में उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि ऐसी जमीन में कौन सी फसल बेहतर हो सकती है। काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने अनार की खेती करने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने महाराष्ट्र से अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे मंगवाए और लगभग 25 बीघा जमीन में बगीचा तैयार किया। शुरुआती महीनों में बगीचे की देखभाल में काफी मेहनत लगी, लेकिन पौधों की बढ़वार देखकर उन्हें उम्मीद जगी कि यह फैसला सही साबित हो सकता है।

पहली फसल पर महामारी का असर

जब बगीचे में पहली बार अनार की अच्छी पैदावार तैयार हुई, तब देश में कोरोना महामारी का दौर शुरू हो गया। लॉकडाउन और बाजार बंद होने की वजह से कृषि उत्पादों की बिक्री लगभग ठप हो गई थी। परिवहन व्यवस्था बाधित होने के कारण प्रेम कंवर अपनी फसल बाजार तक नहीं पहुंचा सकीं। धीरे-धीरे पूरी फसल खराब हो गई और उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। उस समय यह झटका किसी भी किसान को खेती छोड़ने पर मजबूर कर सकता था। लेकिन प्रेम कंवर ने निराशा को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और दोबारा से नए संकल्प के साथ खेती में जुट गईं।

पानी की समस्या का निकाला समाधान

लगातार मेहनत के साथ उन्होंने खेती की सबसे बड़ी समस्या यानी पानी की कमी को दूर करने की योजना बनाई। उन्होंने खेत में दो बड़े कुंड बनवाए, जिनमें बरसात का पानी इकट्ठा किया जाता है। यही पानी बाद में पौधों की सिंचाई के लिए इस्तेमाल होता है। इसके अलावा ट्यूबवेल की मदद से भी जरूरत के समय पानी उपलब्ध कराया जाता है। इस व्यवस्था से बगीचे को नियमित सिंचाई मिलती रही और पौधों की गुणवत्ता बेहतर होती गई। धीरे-धीरे उनका अनार का बगीचा पूरी तरह विकसित हो गया और अच्छी पैदावार देने लगा।

उन्नत तकनीक से बदली खेती की तस्वीर

प्रेम कंवर ने केवल पारंपरिक तरीकों पर भरोसा नहीं किया, बल्कि आधुनिक खेती की तकनीकों को भी अपनाया। उन्होंने महाराष्ट्र के सोलापुर क्षेत्र में प्रचलित अनार उत्पादन के तरीकों का अध्ययन किया और उन्हें अपने खेत में लागू किया। साथ ही जालोर जिले के अनुभवी किसान खेतसिंह से मार्गदर्शन लिया। उन्होंने खेत पर आकर पूरे बगीचे की योजना बनाने में मदद की। विशेषज्ञ सलाह और लगातार मेहनत का असर यह हुआ कि आज उनका खेत एक सुव्यवस्थित बाग की तरह नजर आता है। यहां उगने वाले अनार आकार, रंग और गुणवत्ता के मामले में काफी बेहतर माने जाते हैं।

देश के साथ विदेशों तक पहुंची पैदावार

मेहनत और सही योजना का परिणाम यह रहा कि अब प्रेम कंवर के बगीचे में उगने वाले अनार की मांग देश के कई बाजारों में होने लगी है। उनकी फसल की गुणवत्ता इतनी अच्छी है कि इस वर्ष उनके अनार दुबई तक निर्यात किए गए। जानकारी के अनुसार इस सीजन में उन्हें लगभग 35 लाख रुपये की आमदनी हुई है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, बल्कि गांव के अन्य किसानों के लिए भी नई संभावनाएं खुली हैं।

खेती में रोजगार के अवसर भी बने

अनार की फसल की देखभाल और तुड़ाई के समय अतिरिक्त श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है। सर्दियों के मौसम में पौधों को ठंड से बचाने के लिए उन्हें कपड़े से ढंकना पड़ता है। वहीं फसल की तुड़ाई के दौरान पंजाब से मजदूर बुलाए जाते हैं। इस तरह उनके खेत से कई लोगों को रोजगार भी मिलता है। प्रेम कंवर का कहना है कि बीमारी के दौर ने उन्हें जीवन की अहमियत समझाई और संघर्ष करने की ताकत दी। आज उनकी सफलता की कहानी आसपास के किसानों और खासकर ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

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