Brinjal Farming: बैंगन की खेती से बंपर कमाई, जानिए सरगुजा के किसान की अनोखी कहानी
Brinjal Farming: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के नवानगर गाँव के एक युवा किसान ने जैविक बैंगन की खेती (Organic Eggplant Farming) से अच्छी-खासी कमाई कर एक मिसाल कायम की है। अब तक इस किसान को 2 लाख रुपये तक का मुनाफ़ा हो चुका है। अंबिकापुर संभाग मुख्यालय से मात्र 25 किलोमीटर दूर नवानगर गाँव के नामेश्वर पैकरा ने अपनी लगन और कड़ी मेहनत से पिछले कृषि रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। 12वीं कक्षा के छात्र नामेश्वर पैकरा ने अपनी ग्राफ्टेड जैविक बैंगन की खेती (Grafted Organic Brinjal Cultivation) से यह साबित कर दिया है कि अगर सही तरीके और लगन से खेती की जाए तो हज़ारों रुपये का मुनाफ़ा कमाया जा सकता है। अभी तक, उन्होंने अप्रैल में की गई खेती से 2 लाख रुपये कमाए हैं।

कटाई और खेती के तरीके
नामेश्वर पैकरा के अनुसार, उन्होंने एक एकड़ ज़मीन पर ग्राफ्टेड बैंगन की खेती के लिए गोबर की खाद (Cow Dung Manure) का इस्तेमाल किया। अप्रैल में बुवाई के बाद से अब तक लगभग तीस बार कटाई हो चुकी है। कटाई अभी भी जारी है और इसे पूरा होने में लगभग एक साल लगेगा।
लागत और कमाई
युवाओं का अनुमान है कि बैंगन उगाने में लगभग 1 लाख रुपये की लागत आती है। 30 बार कटाई के बाद, उन्हें अब तक 2 लाख रुपये तक का मुनाफ़ा हो चुका है। अगले कुछ महीनों में 2 लाख रुपये तक का मुनाफ़ा संभव है। यानी कुल मिलाकर लगभग 4 लाख रुपये की कमाई होने का अनुमान है। अंबिकापुर सब्जी मंडी में, नामेश्वर अपने बैंगन 25 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचते हैं।
उन्होंने बैंगन की खेती करने का फैसला क्यों किया?
नामेश्वर ने बताया कि 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पिता की नौकरी कर ली। किसान परिवार से आने वाले नामेश्वर हर साल बड़े पैमाने पर बैंगन उगाते हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
ज़्यादा पैसा, कम मेहनत
उनके अनुसार, बैंगन उगाने (Growing Eggplant) में ज़्यादा मेहनत नहीं लगती; कभी-कभी, खाद और देखभाल ही काफ़ी होती है। उन्होंने अब तक खेत में तीन गाड़ियां गोबर की खाद डाल दी है और लगातार जैविक कृषि पद्धतियों का उपयोग कर रहे हैं।

