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Fish Farming: दोस्त के इस एक सलाह से बदल गई किसान की जिंदगी, अब घर बैठे कमा रहा है खूब पैसा

Fish Farming: एक विचार में आपकी ज़िंदगी बदलने की ताकत होती है। रायबरेली के शिवगढ़ कस्बे के किसान देव नारायण सिंह की भी ऐसी ही स्थिति थी, जिनकी ज़िंदगी एक दोस्त के सुझाव से बदल गई। अब वह घर बैठे आराम से अच्छी कमाई कर सकते हैं। दरअसल, देव नारायण सिंह का दावा है कि एक दिन अपने दोस्त रमेश से मिलने उनके घर गए तो रमेश ने उन्हें पारंपरिक अनाज की खेती छोड़कर मछली पालन करने की सलाह दी। उन्होंने अपने दोस्त देव नारायण सिंह को बताया कि मछली पालन (Fisheries) एक बेहद लाभदायक पेशा है। बहुत कम लागत में, इससे अच्छी-खासी कमाई हो सकती है। उनके सुझाव पर ही उन्होंने मछली पालन शुरू किया। नतीजतन, अब वह पारंपरिक खेती से ज़्यादा पैसा कमा रहे हैं।

Fish farming

मछली पालन (Fisheries) पिछले 30 सालों से कर रहे हैं

वह बताते हैं कि वह पिछले लगभग 20 सालों से अपनी 2.5 एकड़ ज़मीन पर मछली पालन कर रहे हैं। वह मत्स्य पालन विभाग (Department of Fisheries) से बहुत सस्ते दामों पर फिश फ्राई खरीदते हैं, जहाँ वह उन्हें ले जाते हैं। इसके लिए उन्हें बाहर जाने की भी ज़रूरत नहीं पड़ती।

कम खर्च में ज़्यादा कमाई

किसान ने बताया कि 2.5 एकड़ ज़मीन की कीमत 80 से 90 हज़ार रुपये के बीच है। वहीं, इस खर्च के मुक़ाबले साल में 2.5 से 3 लाख रुपये आसानी से कमाए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि वे तालाब में पकाई गई मछलियों को लखनऊ समेत गोरखपुर के बाज़ारों में बेचते हैं।

पारंपरिक खेती की तुलना में ज़्यादा आर्थिक लाभ

उनके अनुसार, मछली पालन पारंपरिक खेती (Traditional Farming) से ज़्यादा मुनाफ़ा देता है। इसलिए इसमें सिर्फ़ एक बार का खर्च आता है। साल के बाकी दिनों में कोई शुल्क नहीं लगता। इसके अलावा, वे अपने खेतों में मछलियों का चारा भी बनाते हैं। इसके लिए वे गेहूँ के आटे और हरे चारे का इस्तेमाल करते हैं। वे ग्रास कटर, रोहू और कतला जैसी मछलियाँ पालते हैं।

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