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Farming Success story- युवा किसान ने तरबूज की खेती से बनाया कमाई का नया रास्ता

Farming Success story- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो खेती में बदलाव और नई सोच की मिसाल बन रही है। यहां के युवा लेखमनी साहू ने पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर तरबूज की खेती अपनाई और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई। उच्च शिक्षा हासिल करने के बावजूद जब उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता नहीं मिली, तब उन्होंने निराश होने के बजाय खेती को एक नए अवसर के रूप में देखा।

Watermelon farming success story chhattisgarh

शिक्षा के बाद खेती की ओर बढ़ा कदम

लेखमनी साहू ने स्टेनोग्राफी, अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर और कानून की पढ़ाई पूरी की है। लंबे समय तक उन्होंने सरकारी नौकरियों के लिए तैयारी की, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर उन्होंने अपने विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया। इसी दौरान उन्हें यह समझ आया कि खेती को आधुनिक नजरिए से अपनाया जाए तो यह भी एक स्थायी आय का जरिया बन सकती है।

गर्मी में बढ़ती मांग ने दिया नया विचार

गर्मी के मौसम में तरबूज की मांग को देखते हुए उन्होंने इस फसल को चुनने का निर्णय लिया। शुरुआत में यह उनके लिए पूरी तरह नया अनुभव था, लेकिन उन्होंने सीखने की प्रक्रिया को जारी रखा। स्थानीय किसानों और अपने परिचितों से सलाह लेकर उन्होंने खेती की बारीकियां समझीं और धीरे-धीरे इस क्षेत्र में खुद को तैयार किया।

कम पानी में बेहतर उत्पादन का विकल्प

लेखमनी के अनुसार, धान की तुलना में तरबूज की खेती में पानी की आवश्यकता कम होती है। इससे लागत भी नियंत्रित रहती है और उत्पादन भी संतोषजनक मिलता है। यही कारण है कि वे अन्य किसानों को भी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ वैकल्पिक फसलों पर ध्यान देने की सलाह देते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पानी की उपलब्धता सीमित है।

पहली फसल से मिला सीखने का अनुभव

उन्होंने बताया कि यह उनकी पहली फसल थी, इसलिए शुरुआत में उन्हें बहुत अधिक मुनाफा नहीं हुआ। हालांकि, इस दौरान उन्हें खेती की कई महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलीं। बेहतर परिणाम के लिए उन्होंने गुणवत्ता वाले बीज का चयन किया और खेती के तरीकों में सुधार किया। इसके चलते उनकी फसल की गुणवत्ता अच्छी रही।

उत्पादन और गुणवत्ता में संतुलन

उत्पादन के आंकड़ों पर नजर डालें तो उनकी फसल में लगभग 60 प्रतिशत तरबूज बड़े आकार के हैं, जिनका वजन 4 से 5 किलो तक है। वहीं, करीब 40 प्रतिशत फल मध्यम आकार के हैं, जिनका वजन 2 से 3 किलो के बीच है। यह संतुलन बाजार में मांग के अनुसार बेहतर बिक्री में मदद करता है।

बाजार में बिक्री के अलग तरीके

स्थानीय बाजार में तरबूज की कीमत 25 से 30 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है, लेकिन लेखमनी अपने खेत से सीधे 15 रुपये प्रति किलो की दर से बिक्री कर रहे हैं। इसके बावजूद उनके उत्पाद की मांग बनी हुई है। वे अपने तरबूज को ट्रैक्टर के जरिए बाजार तक पहुंचाते हैं। कुछ हिस्सा मंडी में बेचते हैं, जबकि बाकी सड़क किनारे खुद बिक्री कर अतिरिक्त आमदनी हासिल करते हैं।

नई सोच से बदल रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था

लेखमनी साहू का यह प्रयास दिखाता है कि सही योजना और मेहनत के साथ खेती को भी लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर नई फसलों और तकनीकों को अपनाने से किसानों के लिए आय के नए रास्ते खुल रहे हैं। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि ऐसे प्रयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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