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Farming Success Story: सीकर के इस किसान ने तकनीक से बदल डाली अपनी तकदीर, रेगिस्तान की मिट्टी में उगाया ‘गुलाबी सोना’

Dragon Fruit Farming Success Story: राजस्थान के सीकर जिले के नीमकाथाना क्षेत्र में खेती की पारंपरिक परिभाषा अब बदल रही है। छावनी के एक युवा और प्रगतिशील किसान पंकज सैनी ने अपनी सूझबूझ और आधुनिक दृष्टिकोण से रेगिस्तानी इलाके में ड्रैगन फ्रूट का बगीचा तैयार कर सबको हैरान कर दिया है। उन्होंने कम पानी वाले इस क्षेत्र में (Agricultural Innovation) को अपनाकर यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो बंजर जमीन से भी सोना उपजाया जा सकता है। क्षेत्र के पहले ड्रैगन फ्रूट उत्पादक बनकर पंकज ने अन्य किसानों के लिए मुनाफे का एक नया द्वार खोल दिया है।

Farming success story

डिजिटल युग की प्रेरणा और परिवार का साथ

पंकज सैनी के पिता असर सिंह सैनी एक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, जिन्होंने हमेशा अपने बेटे के नए विचारों को प्रोत्साहन दिया। पंकज को इस अनूठी खेती का विचार किसी किताब से नहीं, बल्कि (Social Media Influence) के जरिए यूट्यूब पर वीडियो देखते समय आया था। वीडियो देखने के बाद जब उन्होंने अपनी इस योजना को परिवार के सामने रखा, तो सभी ने एक स्वर में उनकी रुचि का सम्मान किया। आज पंकज की मेहनत रंग ला रही है और उनका यह प्रयोग नीमकाथाना क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन चुका है।

हवाई मार्ग से आया ‘विदेशी फल’ का कुनबा

अपनी योजना को अमली जामा पहनाने के लिए पंकज ने संसाधनों की परवाह नहीं की और गुणवत्ता पर ध्यान दिया। उन्होंने हैदराबाद से 500 और गुजरात से 1300 उत्तम किस्म के पौधे मंगवाए, जिन्हें साल 2022 में (Air Cargo Logistics) के माध्यम से जयपुर लाया गया। एक पौधे की लागत लगभग 85 रुपये पड़ी और देखते ही देखते 150 गुणा 85 फीट के क्षेत्र में लगभग 1800 पौधों का एक विशाल उद्यान खड़ा हो गया। यह पंकज के अटूट साहस का ही परिणाम था कि उन्होंने एक ऐसी फसल पर दांव लगाया जिसे राजस्थान में बहुत कम लोग जानते थे।

निवेश और बुनियादी ढांचे का मजबूत ढांचा

खेती को व्यवसाय की तरह देखने वाले पंकज ने शुरुआती चरण में करीब 3 से साढ़े 3 लाख रुपये का निवेश किया। ड्रैगन फ्रूट के पौधों को सहारा देने के लिए उन्होंने लोहे के पिलर और (Trellis Farming System) का उपयोग किया ताकि पौधों का विकास सही दिशा में हो सके। यह आधुनिक ढांचा न केवल पौधों को सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि फल आने पर उनके वजन को संभालने में भी सक्षम है। उनकी यह वैज्ञानिक पद्धति ही आज उनके बगीचे की सफलता का मुख्य आधार बनी हुई है।

बूंद-बूंद सिंचाई से पानी की भारी बचत

सीकर जैसे इलाकों में जहां पानी की किल्लत एक बड़ी चुनौती है, वहां ड्रैगन फ्रूट की खेती किसी वरदान से कम नहीं है। पंकज बताते हैं कि इस फसल को सात दिन में केवल एक बार ही सिंचाई की जरूरत पड़ती है, जिससे (Water Conservation) के लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। एलोवेरा जैसे दिखने वाले इन कांटेदार पौधों को बहुत कम पानी की दरकार होती है, जो राजस्थान की जलवायु के हिसाब से पूरी तरह अनुकूल है। कम लागत और कम पानी में अधिक उत्पादन ही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।

खेत से ही शुरू हो जाता है व्यापार का सिलसिला

पंकज की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए मंडियों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। उनकी फसल की गुणवत्ता इतनी शानदार है कि (Local Traders) खुद चलकर उनके खेत तक पहुंचते हैं और उचित दाम पर फल खरीद लेते हैं। एक पौधे से औसतन चार किलो फल का उत्पादन हो रहा है, जिसने पंकज की आर्थिक स्थिति को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। आज उनका खेत न केवल उत्पादन का केंद्र है, बल्कि एक व्यापारिक हब भी बन गया है।

जैविक खेती और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए पंकज रसायनों के बजाय जैविक तरीकों पर अधिक भरोसा करते हैं। वे पौधों को फंगस और अन्य बीमारियों से बचाने के लिए ट्राइकोडरमा, कल्चर और विभिन्न (Organic Pesticides) का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके साथ ही, सिंचाई के लिए उन्होंने ड्रिप इरिगेशन प्रणाली को अपनाया है, जो पौधों की जड़ों तक सीधे पानी पहुंचाती है। इन जैविक उपायों के कारण उनके फल न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि बाजार में उनकी मांग भी बहुत अधिक रहती है।

चुनौतियों को मात देकर हासिल किया मुकाम

सफलता की यह राह पंकज के लिए इतनी आसान नहीं थी; शुरुआत में जानकारी की कमी के कारण उनके 15-20 पौधे खराब हो गए थे। उस समय परिवार में भी सफलता को लेकर (Risk Assessment) की शंकाएं पैदा हुई थीं, लेकिन पंकज का हौसला नहीं डगमगाया। उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा और आज स्थिति यह है कि वे खुद अपने खेत में नए पौधे तैयार कर रहे हैं। अब उनका पूरा परिवार और क्षेत्र के लोग उनके इस साहसिक फैसले पर गर्व महसूस करते हैं।

लाखों की कमाई और नवाचार का सम्मान

ड्रैगन फ्रूट का एक फल फिलहाल उन्हें करीब 130 रुपये का पड़ता है, जबकि बाजार में इसकी कीमत दोगुनी तक होती है। इस गणित के हिसाब से पंकज अब सालाना (Annual Farm Income) के रूप में लाखों रुपये कमा रहे हैं। उद्यान विभाग के अधिकारी भी उनके इस नवाचार की प्रशंसा कर रहे हैं और इसे जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। सरकार की बूंद-बूंद सिंचाई योजना के तहत इस तरह की खेती को बढ़ावा देने से जिले के अन्य किसानों की आय में भी बड़ा उछाल आने की संभावना है।

भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत

पंकज सैनी आज केवल एक किसान नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक बन चुके हैं। जिलेभर के किसान अब उनसे संपर्क कर रहे हैं ताकि वे भी अपनी पारंपरिक खेती को बदलकर (Modern Agriculture) की ओर कदम बढ़ा सकें। पंकज की कहानी यह संदेश देती है कि यदि तकनीक और मेहनत का सही तालमेल हो, तो खेती आज भी सबसे मुनाफे वाला सौदा साबित हो सकती है। उनकी सफलता ने साबित कर दिया है कि राजस्थान का किसान अब वैश्विक स्तर की फसलों को उगाने के लिए तैयार है।

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