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Double Cropping – एक ही खेत में दो फसलें उगाकर यह किसान बढ़ा रहा है अपनी आमदनी

Double Cropping – मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक किसान ने पारंपरिक खेती के तरीकों में बदलाव कर ऐसा मॉडल अपनाया है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। जैनाबाद क्षेत्र के निवासी 55 वर्षीय किसान लक्ष्मण चौहान इन दिनों अपने अनोखे खेती के तरीके के कारण चर्चा में हैं। सीमित शिक्षा के बावजूद उन्होंने अनुभव और प्रयोग के आधार पर खेती को अधिक लाभदायक बनाने का रास्ता खोज लिया है। लगभग दो दशक से खेती कर रहे लक्ष्मण चौहान बताते हैं कि उन्होंने यह काम अपने पिता से सीखा था और समय के साथ इसमें कई नए तरीके जोड़ते गए। आज उनकी खेती आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का कारण बन रही है।

Double cropping farmer income model india

खेती का अनुभव और परिवार से मिली सीख

लक्ष्मण चौहान का कहना है कि खेती उनके परिवार की परंपरा रही है। बचपन से ही उन्होंने अपने पिता के साथ खेतों में काम करते हुए खेती के विभिन्न पहलुओं को समझा। पढ़ाई उन्होंने आठवीं कक्षा तक ही की, लेकिन खेतों में काम करते-करते उन्हें फसलों, मौसम और जमीन की जरूरतों का अच्छा अनुभव हो गया।

समय के साथ उन्होंने महसूस किया कि केवल पारंपरिक तरीके से खेती करने पर आय सीमित रह जाती है। इसलिए उन्होंने खेती में बदलाव लाने का फैसला किया। नई तकनीकों और फसल प्रबंधन के तरीके अपनाकर उन्होंने धीरे-धीरे अपनी खेती को अधिक उत्पादक बना लिया। उनका मानना है कि खेती में अनुभव के साथ प्रयोग करने की भी जरूरत होती है।

12 एकड़ जमीन पर विविध फसलों की खेती

किसान लक्ष्मण चौहान के पास लगभग 12 एकड़ कृषि भूमि है, जहां वे अलग-अलग प्रकार की फसलें उगाते हैं। अपने खेत में वे मुख्य रूप से गेहूं और चना की खेती करते हैं। इसके अलावा मौसम के अनुसार सब्जियों की खेती भी करते रहते हैं।

उनका कहना है कि यदि किसान एक ही फसल पर निर्भर रहें तो जोखिम बढ़ जाता है। मौसम की मार या बाजार में कीमतों में गिरावट से नुकसान हो सकता है। इसलिए उन्होंने खेती में विविधता अपनाई है। अलग-अलग फसलों की खेती करने से उन्हें आय के कई स्रोत मिल जाते हैं और नुकसान की संभावना भी कम हो जाती है।

एक ही खेत में दो फसलों का प्रयोग

लक्ष्मण चौहान की खेती की सबसे खास बात यह है कि वे एक ही खेत में दो तरह की फसलें उगाते हैं। इस समय उन्होंने अपने खेत में गेहूं के साथ चने की फसल लगाई हुई है। इस तरीके से जमीन का पूरा उपयोग हो पाता है और उत्पादन भी बढ़ जाता है।

वे बताते हैं कि जब दो फसलें एक साथ लगाई जाती हैं तो खेत की उर्वरता का बेहतर उपयोग होता है। इससे जमीन खाली नहीं रहती और एक ही मौसम में दो तरह की उपज मिल जाती है। इस तरीके से खेती करने पर उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ लागत भी नियंत्रित रहती है। यही वजह है कि उनका यह मॉडल धीरे-धीरे अन्य किसानों का भी ध्यान आकर्षित कर रहा है।

लागत और कमाई का संतुलन

लक्ष्मण चौहान के अनुसार 12 एकड़ खेत में खेती करने के लिए उन्हें लगभग तीन लाख रुपये की लागत लगती है। इसमें बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी जैसी आवश्यक खर्च शामिल होते हैं। लेकिन अच्छी पैदावार के कारण उनकी सालाना आय करीब पांच से छह लाख रुपये तक पहुंच जाती है।

वे बताते हैं कि सही योजना और मेहनत से खेती को लाभदायक बनाया जा सकता है। यदि किसान अपनी जमीन की क्षमता के अनुसार फसल का चयन करें और समय पर देखभाल करें तो उत्पादन बेहतर मिलता है। यही वजह है कि उनकी खेती पहले की तुलना में अधिक फायदेमंद हो गई है।

आसपास के किसानों के लिए बन रहे प्रेरणा

लक्ष्मण चौहान की सफलता की चर्चा अब आसपास के गांवों तक पहुंचने लगी है। कई किसान उनके खेत देखने आते हैं और उनके तरीके के बारे में जानकारी लेते हैं। उनका मानना है कि खेती में नए प्रयोग करने से ही किसानों की आय बढ़ सकती है।

वे दूसरे किसानों को भी सलाह देते हैं कि खेती में बदलाव से डरने की बजाय नई तकनीकों को समझकर अपनाने की कोशिश करनी चाहिए। यदि सही तरीके से योजना बनाई जाए तो खेती आज भी किसानों के लिए अच्छा रोजगार और स्थिर आय का साधन बन सकती है।

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