ProtectedFarming – किसानों को पॉली हाउस पर मिल रहा है 50 प्रतिशत का अनुदान
ProtectedFarming – शिवपुरी सहित प्रदेश के कई जिलों में बदलते मौसम ने खेती को जोखिम भरा बना दिया है। कभी अचानक बारिश, तो कभी ओलावृष्टि और तेज धूप फसलों को नुकसान पहुंचा देती है। ऐसे हालात में राज्य सरकार किसानों को संरक्षित खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इस पद्धति में फसल को खुले खेत की बजाय विशेष ढांचे के भीतर उगाया जाता है, जिससे मौसम का सीधा असर कम होता है। सरकार पॉली हाउस, शेडनेट हाउस और प्लास्टिक मल्चिंग जैसी तकनीकों पर आर्थिक सहायता दे रही है, ताकि किसान कम जोखिम में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकें।

पॉली हाउस निर्माण पर आधी लागत सरकार देगी
उद्यानिकी विभाग ने पॉली हाउस स्थापना के लिए स्पष्ट लागत मानक तय किए हैं। 500 से 1008 वर्ग मीटर क्षेत्र तक पॉली हाउस बनाने पर 935 रुपये प्रति वर्ग मीटर की लागत निर्धारित की गई है। इस राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा सरकार वहन करेगी। 1008 से 2080 वर्ग मीटर तक लागत 890 रुपये प्रति वर्ग मीटर मानी गई है, जिस पर भी आधा अनुदान मिलेगा। वहीं 2080 से 4000 वर्ग मीटर तक 844 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से सहायता दी जाएगी। इससे किसान अपेक्षाकृत कम निवेश में आधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ा सकते हैं और मौसम के उतार-चढ़ाव से फसल को सुरक्षित रख सकते हैं।
शेडनेट हाउस से फसलों को अतिरिक्त सुरक्षा
शेडनेट हाउस ऐसी संरचना है, जो तेज धूप, भारी बारिश और ओलों से फसल को बचाती है। सरकार अधिकतम 4000 वर्ग मीटर तक शेडनेट हाउस बनाने के लिए 710 रुपये प्रति वर्ग मीटर की लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान दे रही है। शुरुआती खर्च कम होने से छोटे और मध्यम किसान भी इस तकनीक को अपना सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि संरक्षित वातावरण में सब्जी और फूलों की खेती अधिक लाभकारी साबित होती है, क्योंकि उत्पादन स्थिर रहता है और गुणवत्ता बेहतर मिलती है।
प्लास्टिक मल्चिंग से नमी संरक्षण और उत्पादन में बढ़ोतरी
खेती में प्लास्टिक मल्चिंग का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इस तकनीक से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है और खरपतवार की वृद्धि कम होती है। परिणामस्वरूप पानी की बचत होती है और फसल का विकास बेहतर होता है। सरकार अधिकतम दो हेक्टेयर तक प्लास्टिक मल्चिंग के लिए 0.32 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की लागत पर 50 प्रतिशत सहायता दे रही है। सब्जी और बागवानी करने वाले किसानों के लिए यह उपाय विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है।
उत्तम गुणवत्ता की पौध पर भी सहायता
यदि किसान संरक्षित ढांचे में उन्नत किस्म की सब्जी या फूलों की पौध लगाना चाहते हैं, तो इस पर भी अनुदान उपलब्ध है। 4000 वर्ग मीटर तक 140 रुपये प्रति वर्ग मीटर की लागत निर्धारित की गई है, जिसमें आधी राशि सरकार देगी। इससे किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली पौध लगाने का अवसर मिलेगा और उत्पादन की बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।
आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज
योजना का लाभ उन जिलों में उपलब्ध है, जहां इसे लागू किया गया है। इच्छुक किसान अपने जिले के उद्यानिकी कार्यालय में संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के साथ आधार कार्ड, खेत से संबंधित दस्तावेज, बैंक पासबुक की प्रति, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), पासपोर्ट आकार का फोटो और आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर जमा करना होगा। अधिकारियों की सलाह है कि किसान आवेदन से पहले सभी शर्तें ध्यान से पढ़ लें, ताकि प्रक्रिया में किसी प्रकार की दिक्कत न आए।
राज्य सरकार का मानना है कि संरक्षित खेती अपनाने से किसानों की आय स्थिर हो सकती है और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाला नुकसान कम किया जा सकता है। बदलते मौसम के दौर में यह पहल किसानों के लिए सहारा बन सकती है।

