GOVERNMENT SCHEMES

PM Kisan Samman Nidhi: किसानों की सहायता से जुड़ी सरकारी धनराशि और बैंक दायित्वों पर वास्तविक स्थिति

PM Kisan Samman Nidhi: किसानों की आय को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना Prime Minister Kisan Samman Nidhi Scheme आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक बड़ा आधार बन चुकी है। इस योजना के तहत पात्र किसानों के खातों में सालाना छह हजार रुपये सीधे ट्रांसफर किए जाते हैं, जिससे खेती से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलती है। हाल ही में 21वीं किस्त जारी की गई, जिसके बाद एक अहम सवाल फिर सामने आया—क्या किसी बैंक का बकाया लोन न चुकाने पर किसान की इस सरकारी सहायता को रोका जा सकता है? तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में आए एक फैसले ने इस प्रश्न का स्पष्ट उत्तर दिया है।

Pm kisan samman nidhi

नीलगिरी जिले का मामला और उसकी पृष्ठभूमि

नीलगिरी के किसान के. भोजराज के बैंक खाते में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना Prime Minister Kisan Samman Nidhi Yojana in Bhojraj’s bank account के तहत कुल 16000 रुपये भेजे गए थे। किसान पर बैंक का कुछ कर्ज बाकी था, जिसके कारण सहकारी बैंक ने इन पैसों तक उनकी पहुंच रोक दी। किसान ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए जिला उपभोक्ता निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई। यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण बन गया क्योंकि यह देशभर में लाखों किसानों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

आयोग का स्पष्ट और महत्वपूर्ण फैसला

मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने यह निर्णय दिया कि किसी भी बैंक को केंद्र सरकार द्वारा भेजी जाने वाली लाभ राशि को रोकने का अधिकार नहीं है। आयोग के अनुसार यह धनराशि किसान According to the commission, this amount is given to the farmer  के लिए निर्धारित सरकारी सहायता है, जो किसी भी तरह के बैंक लोन या बकाया से जुड़ी शर्तों से प्रभावित नहीं हो सकती। इसलिए बैंक को यह राशि तुरंत जारी करने का आदेश दिया गया। यह फैसला किसानों के अधिकारों को और मजबूत करता है और यह स्थापित करता है कि सरकारी सहायता राशि पूरी तरह किसान की होती है, जिसे कोई संस्था रोक नहीं सकती।

बैंक पर हर्जाने की जिम्मेदारी

बैंक ने अपनी ओर से यह दलील दी थी कि किसान ने ई-केवाईसी e-KYC पूरी नहीं की और पुराने लोन को भी नहीं चुकाया, इसलिए पैसा रोका गया। आयोग ने इन तर्कों को अस्वीकार करते हुए न केवल राशि लौटाने को कहा, बल्कि किसान को मानसिक एवं आर्थिक परेशानी के लिए अतिरिक्त 2000 रुपये हर्जाने के रूप में देने का आदेश भी दिया। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि बैंकिंग प्रक्रियाओं और सरकारी योजनाओं के बीच उचित संतुलन बनाए रखना संस्थाओं की जिम्मेदारी है।

किन परिस्थितियों में रुक सकती है योजना की राशि

इस निर्णय के बाद यह तो स्पष्ट हो गया कि बैंक लोन का बकाया होना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि Amount of Prime Minister Kisan Samman Nidhi रोकने का आधार नहीं बन सकता। लेकिन कुछ स्थितियां वास्तव में ऐसी हैं जिनमें राशि रुक सकती है। सबसे पहली आवश्यकता यह है कि किसान का e-KYC पूरा होना चाहिए, क्योंकि इसके बिना डीबीटी प्रक्रिया सफल नहीं होती। बैंक खाता आधार संख्या से लिंक होना भी जरूरी है, ताकि ट्रांसफर में कोई बाधा न आए। इसके अलावा जिन किसानों की फार्मर आईडी तैयार नहीं है या जिन्होंने पात्रता से जुड़ी आवश्यक शर्तों को पूरा नहीं किया है, उनकी किस्त अस्थायी रूप से रोकी जा सकती है। आने वाली 22वीं किस्त प्राप्त करने के लिए इन औपचारिकताओं को समय पर पूरा करना अत्यंत आवश्यक है।

किसानों के लिए इससे मिलने वाला संकेत

नीलगिरी का यह फैसला किसानों को यह भरोसा देता है कि सरकार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता किसी अन्य आर्थिक दायित्व से प्रभावित नहीं होगी। यह किसानों के वित्तीय स्वतंत्रता अधिकार Financial Freedom Rights और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की पारदर्शिता का मजबूत उदाहरण है। साथ ही यह मामला बताता है कि यदि किसी किसान के साथ बैंक या किसी संस्था द्वारा गलत व्यवहार किया जाता है, तो उपभोक्ता आयोग में न्याय पाने का अधिकार हमेशा उपलब्ध है।

 

 

Back to top button