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MangoFarming – आम की बागवानी शुरू करने पर किसानों को मिल रही है सरकारी सहायता

MangoFarming – उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में किसानों को बागवानी की ओर प्रोत्साहित करने के लिए उद्यान विभाग द्वारा विशेष योजना चलाई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य आम की खेती को बढ़ावा देना और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार की ओर से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे इच्छुक किसान अपने खेतों में आम के पौधे लगाकर बागवानी शुरू कर सकते हैं। विभाग का मानना है कि इस पहल से किसानों को पारंपरिक खेती के साथ एक स्थायी आय का स्रोत भी मिल सकेगा।

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बागवानी को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई योजना

राज्य सरकार द्वारा एकीकृत बागवानी मिशन के अंतर्गत यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इस योजना के तहत किसानों को फलदार पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि कृषि के साथ-साथ बागवानी को भी बढ़ावा मिल सके।

उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार आम की खेती लंबे समय तक आय देने वाली फसल मानी जाती है। एक बार पौधे स्थापित हो जाने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन मिलता रहता है। यही कारण है कि किसानों को इस दिशा में आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है।

योजना का लाभ उठाकर किसान अपने खेतों में व्यवस्थित तरीके से आम की बागवानी कर सकते हैं और आने वाले वर्षों में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

एक हेक्टेयर में इतने पौधे लगाए जा सकते हैं

उद्यान विभाग के अनुसार यदि किसान एक हेक्टेयर क्षेत्र में आम की बागवानी करना चाहते हैं, तो वे लगभग 10 गुणा 10 मीटर की दूरी पर पौधे लगा सकते हैं। इस दूरी के आधार पर एक हेक्टेयर भूमि में करीब 100 पौधों का बाग तैयार किया जा सकता है।

जिला उद्यान अधिकारी हरिशंकर राम के अनुसार जिन किसानों के पास खाली या अनुपयोगी जमीन है, वे इस योजना के तहत आम की बागवानी शुरू कर सकते हैं। इसके लिए सरकार की ओर से उन्हें लगभग 80 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

यह सहायता किसानों को पौधों की खरीद, रोपण और शुरुआती देखभाल के खर्च में मदद करती है, जिससे बागवानी शुरू करना उनके लिए आसान हो जाता है।

हाई डेंसिटी पौधों के साथ भी शुरू की जा सकती है बागवानी

योजना के अंतर्गत किसान हाई डेंसिटी पद्धति से भी आम के पौधे लगा सकते हैं। इस पद्धति में एक हेक्टेयर क्षेत्र में अधिकतम 110 पौधे लगाए जा सकते हैं। इससे कम जगह में अधिक उत्पादन की संभावना बढ़ जाती है।

उद्यान विभाग के अनुसार आम की बागवानी के लिए कुल 2 लाख रुपये तक की लागत का प्रावधान माना गया है। इस पर किसानों को 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। यह अनुदान सीधे किसानों को दो चरणों में उपलब्ध कराया जाता है।

पहली किस्त के रूप में कुल अनुदान का 60 प्रतिशत, यानी लगभग 48 हजार रुपये किसानों को दिए जाते हैं। यह राशि पौधारोपण और शुरुआती व्यवस्थाओं के लिए उपयोगी होती है।

दूसरी किस्त के लिए जरूरी शर्त

योजना के अंतर्गत दूसरी किस्त प्राप्त करने के लिए किसानों को कुछ शर्तों का पालन करना होता है। सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि लगाए गए पौधों की कम से कम 80 प्रतिशत संख्या जीवित रहनी चाहिए।

जब विभाग द्वारा निरीक्षण में पौधों की अच्छी स्थिति पाई जाती है, तब किसानों को शेष अनुदान की राशि उपलब्ध कराई जाती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि बागवानी सही तरीके से की जा रही है और पौधों की देखभाल भी ठीक प्रकार से हो रही है।

इस व्यवस्था से योजना का लाभ वास्तविक रूप से उन किसानों तक पहुंचता है जो गंभीरता से बागवानी करना चाहते हैं।

किसान ऐसे कर सकते हैं आवेदन

जो किसान इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, वे उद्यान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा इच्छुक किसान सीधे जिला उद्यान कार्यालय में जाकर भी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा कर सकते हैं।

आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभाग द्वारा पात्र किसानों का चयन किया जाता है और उन्हें योजना का लाभ दिया जाता है।

उद्यान विभाग का मानना है कि यदि किसान इस योजना का सही तरीके से उपयोग करें तो आम की बागवानी उनके लिए एक लाभदायक व्यवसाय बन सकती है। इससे न केवल कृषि आय में वृद्धि होगी बल्कि क्षेत्र में बागवानी को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा।

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