Disabled Marriage Promotion Scheme: दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की ओर एक मजबूत कदम
Disabled Marriage Promotion Scheme: दिव्यांग व्यक्तियों का जीवन भी सम्मान, सुरक्षा और समान अवसरों से भरा हो, इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक सराहनीय पहल की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित The main objective of the plan is to ensure करना है कि दिव्यांग नागरिक भी वैवाहिक जीवन में किसी तरह के सामाजिक या आर्थिक भेदभाव का सामना न करें और वे भी सामान्य नागरिकों की तरह सुखद दांपत्य जीवन जी सकें। इसी सोच के साथ दिव्यांग विवाह को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया गया है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।

योजना की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
लंबे समय से समाज में दिव्यांग व्यक्तियों Persons with disabilities in society को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और नकारात्मक धारणाएं बनी हुई हैं। इन्हीं धारणाओं का असर उनके विवाह जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों पर भी पड़ता है। कई परिवार दिव्यांग बच्चों की शादी को बोझ मानते हैं या फिर इसे टालते रहते हैं। विशेष रूप से दिव्यांग महिलाओं को इस स्थिति में दोहरे भेदभाव का सामना करना पड़ता है। सरकार की यह योजना इसी मानसिकता को बदलने और दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।
प्रोत्साहन राशि का प्रावधान
इस योजना के अंतर्गत यदि कोई दिव्यांग व्यक्ति If a disabled person is किसी सामान्य व्यक्ति से विवाह करता है, तो सरकार द्वारा उसे 1.50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। वहीं यदि दिव्यांग–दिव्यांग विवाह होता है, तो यह राशि बढ़ाकर 2.50 लाख रुपये कर दी गई है। यह पूरी रकम पति और पत्नी के संयुक्त बैंक खाते में सीधे डीबीटी माध्यम से भेजी जाएगी। योजना के अनुसार इस राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा पांच वर्षों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट में रखना अनिवार्य होगा, ताकि दंपती को भविष्य में आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा मिल सके।
सामाजिक सोच में बदलाव की पहल
दिव्यांग कल्याण विभाग द्वारा जारी शासन निर्णय के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक The objective of this plan is purely economic सहायता देना ही नहीं है, बल्कि समाज में व्याप्त उस सोच को भी बदलना है जो दिव्यांगता को असमर्थता से जोड़कर देखती है। विभाग के अनुसार, कई बार दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अनुचित रिश्ते तय कर दिए जाते हैं या उनकी पसंद और इच्छा को नजरअंदाज कर दिया जाता है। यह योजना दिव्यांगों के आत्मसम्मान को बढ़ाने और उन्हें स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए प्रेरित करने का माध्यम बनेगी।
पात्रता से जुड़ी आवश्यक शर्तें
योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी पात्रता शर्तें तय Essential eligibility criteria have been set की गई हैं। वर या वधू के पास कम से कम 40 प्रतिशत दिव्यांगता का वैध UDID कार्ड होना अनिवार्य है। इसके साथ ही दिव्यांग वर या वधू में से कम से कम एक का महाराष्ट्र का स्थायी निवासी होना जरूरी है। विवाह दोनों पक्षों का पहला विवाह होना चाहिए। यदि कोई तलाकशुदा है, तो यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उसने पहले इस योजना का लाभ न लिया हो। विवाह का कानूनी पंजीकरण अनिवार्य है और विवाह के एक वर्ष के भीतर आवेदन करना जरूरी होगा।
आवेदन प्रक्रिया और चयन प्रणाली
योजना के लिए आवेदन सभी आवश्यक दस्तावेजों The application includes all the necessary documents के साथ संबंधित जिले के कार्यालय में जमा करना होगा। लाभार्थियों का चयन जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाएगा। चयनित आवेदकों की सूची दिव्यांग कल्याण आयुक्त, पुणे को भेजी जाएगी, जहां से स्वीकृति के बाद प्रोत्साहन राशि वितरित की जाएगी। यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी गई है ताकि वास्तविक जरूरतमंदों को ही इसका लाभ मिल सके।
आवश्यक दस्तावेजों की सूची
आवेदन करते समय दिव्यांगता प्रमाण पत्र Time disability certificate जिसमें कम से कम 40 प्रतिशत दिव्यांगता दर्शाई गई हो, अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र का निवास प्रमाण पत्र, विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और संयुक्त बैंक खाते का विवरण देना होगा। सभी दस्तावेज सही और वैध होने चाहिए, ताकि आवेदन में किसी तरह की देरी या अस्वीकृति न हो।

