CropInsurance – फसल कटाई के बाद नुकसान पर 72 घंटे में दें सूचना, होगा बड़ा लाभ
CropInsurance – करौली जिले के किसानों के लिए फसल बीमा से जुड़ा एक अहम संदेश जारी किया गया है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कटाई के बाद खेत में रखी फसल प्राकृतिक आपदा से प्रभावित होती है, तो इसकी जानकारी 72 घंटे के भीतर देना जरूरी है। अधिकारियों का कहना है कि समय पर सूचना न देने की स्थिति में बीमा दावा प्रभावित हो सकता है। इसलिए किसानों को सतर्क रहने और तय प्रक्रिया का पालन करने की सलाह दी गई है।

कटाई के बाद भी लागू है बीमा प्रावधान
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक धर्मसिंह मीना के अनुसार, कई बार फसल काटने के बाद उसे कुछ समय के लिए खेत में ही रखा जाता है। इस दौरान अचानक तेज बारिश, बाढ़, चक्रवात या जलभराव जैसी परिस्थितियां फसल को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसी स्थिति में भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सहायता का प्रावधान है, लेकिन इसके लिए निर्धारित समय सीमा में सूचना देना अनिवार्य है। विभाग ने कहा है कि देर से सूचना देने पर दावा प्रक्रिया में दिक्कतें आ सकती हैं।
सूचना देने के लिए उपलब्ध विकल्प
फसल नुकसान की जानकारी दर्ज कराने के लिए केंद्र सरकार ने टोल फ्री नंबर 14447 जारी किया है। किसान इस नंबर पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन माध्यम से भी रिपोर्ट की जा सकती है। इसके लिए फसल बीमा पोर्टल, संबंधित बीमा कंपनी की वेबसाइट या मोबाइल ऐप का उपयोग किया जा सकता है। जिन किसानों को ऑनलाइन सुविधा में परेशानी हो, वे नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय या बीमा कंपनी के प्रतिनिधि से संपर्क कर निर्धारित प्रपत्र भरकर भी सूचना दे सकते हैं।
सूचना देते समय रखें जरूरी दस्तावेज
बीमा दावा दर्ज कराते समय कुछ दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। इनमें बीमा पॉलिसी नंबर, आधार कार्ड, भूमि संबंधी दस्तावेज जैसे खसरा-खतौनी, प्रभावित फसल की स्पष्ट तस्वीरें और नुकसान दर्शाने वाले फोटो या वीडियो शामिल हैं। विभाग का कहना है कि दस्तावेज पूरे और स्पष्ट होने से दावा प्रक्रिया तेज और सरल हो जाती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसल कटाई के बाद भी जरूरी कागजात सुरक्षित रखें।
सर्वे प्रक्रिया के बाद तय होगा मुआवजा
सूचना प्राप्त होने के बाद बीमा कंपनी के प्रतिनिधि, कृषि विभाग के अधिकारी और संबंधित किसान की मौजूदगी में खेत का निरीक्षण किया जाएगा। इस दौरान नुकसान का आकलन किया जाएगा और आवश्यक प्रपत्र भरा जाएगा। अधिकारियों ने किसानों से आग्रह किया है कि वे सर्वे के दौरान उपस्थित रहें और भरे गए प्रपत्र की एक प्रति अपने पास रखें।
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा राशि तय की जाएगी। स्वीकृति मिलने के बाद बीमा की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में जमा कर दी जाएगी। विभाग ने दोहराया है कि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में लापरवाही न बरतें और निर्धारित 72 घंटे की अवधि के भीतर सूचना अवश्य दें, ताकि योजना का लाभ समय पर मिल सके।

