AGRICULTURE

Wheat Cultivation Tips: पहली सिंचाई के बाद गेहूं की फसल में यह जरूरी काम न किया तो हो सकता है बड़ा नुकसान

Wheat Cultivation Tips: जिन किसानों ने समय पर गेहूं की बुवाई पूरी कर ली है, उनकी फसल अब पहले महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच चुकी है। यह वही समय होता है जब पहली सिंचाई दी जाती है। अधिकतर किसान इस चरण को केवल पानी देने तक ही सीमित मान लेते हैं, जबकि वास्तव में यह फसल की पूरी सेहत जांचने का सबसे सही मौका होता है। बुवाई के बाद मौसम में उतार-चढ़ाव, मिट्टी में नमी की कमी या बीज की गुणवत्ता के कारण कई बार खेत में गेहूं का जमाव एक जैसा नहीं हो पाता। कहीं पौधे घने होते हैं तो कहीं जमीन खाली रह जाती है। अगर इन खाली जगहों पर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो आगे चलकर यही कमी पैदावार को काफी हद तक घटा सकती है।

Wheat cultivation tips
Wheat cultivation tips

गेहूं की खेती में पौधों की सही संख्या और उनका समान फैलाव बहुत मायने रखता है। खेत में जहां-जहां पौधे नहीं उगे हैं, वहां जमीन बेकार चली जाती है और वही जगह उत्पादन में कमी का कारण बनती है। इसलिए पहली सिंचाई के समय खेत का बारीकी से निरीक्षण करना हर किसान के लिए बेहद जरूरी हो जाता है।

गैप फिलिंग का महत्व क्यों बढ़ जाता है

खेत में पौधों की संख्या कम होने का सीधा असर बालियों की गिनती पर पड़ता है। जब पौधे कम होंगे, तो स्वाभाविक है कि बालियां भी कम बनेंगी और कुल उत्पादन घट जाएगा। यही कारण है कि कृषि विशेषज्ञ हमेशा यह सलाह देते हैं कि खेत में एकसार पौध संख्या बनाए रखना जरूरी है। खाली स्थान छोड़ देने से न केवल पैदावार घटती है, बल्कि खरपतवार को भी पनपने का मौका मिल जाता है, जिससे फसल को अतिरिक्त नुकसान हो सकता है।

गैप फिलिंग यानी खाली जगहों पर दोबारा बीज डालना एक साधारण लेकिन बेहद असरदार उपाय है। यह तरीका फसल को संतुलित बनाता है और पूरे खेत से समान उत्पादन लेने में मदद करता है।

पहली सिंचाई के समय गैप फिलिंग क्यों करें

पहली सिंचाई के बाद मिट्टी में नमी की स्थिति सबसे अनुकूल होती है। इस समय डाले गए बीज जल्दी अंकुरित हो जाते हैं और पहले से उगे पौधों के साथ तालमेल बना लेते हैं। अगर इस अवसर को गंवा दिया गया, तो बाद में गैप फिलिंग करना मुश्किल हो जाता है और नए पौधे पिछड़ जाते हैं। यही वजह है कि पहली सिंचाई को गैप फिलिंग के लिए सबसे सही समय माना जाता है।

जो किसान इस चरण में थोड़ी मेहनत कर लेते हैं, उन्हें आगे चलकर ज्यादा फायदा मिलता है। फसल का विकास एकसार होता है और खेत देखने में भी भरा हुआ नजर आता है।

गैप फिलिंग करने की सही विधि

पहली सिंचाई के कुछ दिन बाद जब खेत में इतनी नमी रह जाए कि मिट्टी पैर में न चिपके, तब गैप फिलिंग का काम शुरू करना चाहिए। सबसे पहले खेत का चक्कर लगाकर उन जगहों को चिन्हित करें जहां गेहूं के पौधे नहीं उगे हैं। इसके बाद कुदाल या किसी नुकीले औजार से हल्की सी नाली बनाएं। हर खाली स्थान पर एक-एक बीज डालें और ऊपर से मिट्टी को हल्के हाथ से ढक दें।

इस बात का ध्यान रखें कि बीज बहुत गहराई में न जाएं, वरना अंकुरण में दिक्कत हो सकती है। सही तरीके से की गई गैप फिलिंग कुछ ही दिनों में असर दिखाने लगती है और खेत फिर से संतुलित नजर आने लगता है।

गैप फिलिंग में की जाने वाली आम गलतियां

कई किसान जल्दबाजी में या जानकारी के अभाव में दूसरी किस्म का बीज डाल देते हैं। यह एक बड़ी भूल साबित हो सकती है। अलग किस्म के गेहूं की बालियां और दाने अलग आकार के होते हैं, जिससे कटाई के बाद उपज में एकरूपता नहीं रहती। मंडी में ऐसी फसल का भाव भी कम मिल सकता है।

इसलिए हमेशा वही किस्म दोबारा बोनी चाहिए, जो पहले से खेत में लगी हो। इससे फसल एकसार रहती है और गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ता।

सही देखभाल से कैसे बढ़ेगी पैदावार

अगर किसान पहली सिंचाई के साथ-साथ गैप फिलिंग का काम सही ढंग से कर लेते हैं, तो आगे चलकर फसल ज्यादा मजबूत बनती है। पौधों की संख्या पूरी होने से खेत का पूरा पोषण उपयोग में आता है और उत्पादन में कोई कमी नहीं आती। साथ ही निराई-गुड़ाई और खाद प्रबंधन भी आसान हो जाता है।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि गेहूं की खेती में छोटी-छोटी सावधानियां बड़ा फायदा देती हैं। पहली सिंचाई के समय खेत का निरीक्षण और जरूरत पड़ने पर गैप फिलिंग करना ऐसा ही एक जरूरी कदम है, जो किसान की मेहनत को सही मायनों में सफल बनाता है।

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