Watermelon Farming – गया में तरबूज-खरबूज से बढ़ी किसानों की आमदनी
Watermelon Farming – बिहार के गया जिले में इन दिनों तरबूज और खरबूज की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है। मानपुर, चंदौती और गुरुआ इलाके में बड़ी संख्या में किसान इस मौसमी फसल की तैयारी में जुटे हैं। कम समय में तैयार होने वाली इन फसलों ने स्थानीय स्तर पर आय का नया रास्ता खोल दिया है। खेती से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि समय पर बुवाई और वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जाए तो उत्पादन और मुनाफा दोनों बेहतर मिल सकते हैं।

समय पर जुताई और पटवन जरूरी
अनुभवी किसान धर्मेंद्र कुमार बताते हैं कि अच्छी पैदावार की शुरुआत खेत की तैयारी से होती है। सबसे पहले खेत की गहरी जुताई और समुचित पटवन की जरूरत होती है। रोटावेटर की मदद से मिट्टी को भुरभुरा बनाना फायदेमंद रहता है, जिससे पौधों की जड़ें आसानी से फैल सकें। उनके मुताबिक फरवरी के पहले पखवाड़े तक नर्सरी में तैयार पौधों को खेत में रोप देना चाहिए। जो किसान सीधे बीज बोना चाहते हैं, उनके लिए फरवरी के तीसरे सप्ताह तक का समय उपयुक्त माना जाता है।
मल्चिंग तकनीक से मिलते हैं बेहतर परिणाम
खेती में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल अब गया के किसानों के बीच आम हो गया है। मल्चिंग तकनीक का उपयोग नमी बनाए रखने और खरपतवार को नियंत्रित करने में मदद करता है। खेत में उठे हुए बेड बनाकर उन पर मल्चिंग पेपर बिछाया जाता है। इससे पानी की बचत होती है और पौधों की वृद्धि भी संतुलित रहती है। किसान बताते हैं कि इस पद्धति से फल की गुणवत्ता और आकार दोनों बेहतर मिलते हैं।
कम अवधि में तैयार होने वाली किस्में
गया क्षेत्र में उगाई जाने वाली तरबूज और खरबूज की किस्में लगभग 70 से 80 दिनों में तैयार हो जाती हैं। यानी तीन महीने के भीतर फसल बाजार के लिए तैयार हो जाती है। यह अवधि अन्य पारंपरिक फसलों की तुलना में कम है, जिससे किसानों को जल्दी आय प्राप्त होती है। स्थानीय बाजार के अलावा आसपास के जिलों में भी इन फलों की अच्छी मांग रहती है।
बढ़ती रकबा और आय
जानकारी के अनुसार, जिले में करीब 500 एकड़ में तरबूज और खरबूज की खेती की जा रही है। मौसम अनुकूल रहने और सही देखभाल के साथ किसान प्रति सीजन 15 से 20 लाख रुपये तक की आमदनी हासिल कर रहे हैं। हालांकि यह आय जमीन के आकार, उत्पादन और बाजार भाव पर निर्भर करती है। फिर भी कम समय में अधिक लाभ की संभावना ने कई किसानों को इस खेती की ओर आकर्षित किया है।
वैज्ञानिक सलाह का महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि बीज चयन, सिंचाई प्रबंधन और कीट नियंत्रण पर ध्यान देना जरूरी है। समय पर खाद और पानी देने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है। साथ ही बाजार की मांग को ध्यान में रखकर बुवाई की योजना बनाना भी लाभकारी होता है।
गया में तरबूज और खरबूज की खेती ने यह साबित किया है कि यदि सही तकनीक और समय का ध्यान रखा जाए तो मौसमी फसल भी स्थायी आय का मजबूत स्रोत बन सकती है।

