VegetableFarming – लखीमपुर में कद्दू की खेती से बढ़ रही किसानों की आमदनी
VegetableFarming – उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ सब्जी उत्पादन की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। कम लागत में बेहतर आमदनी की संभावना ने किसानों को इस दिशा में प्रेरित किया है। खासतौर पर गर्मियों के मौसम में कद्दू की खेती किसानों के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरी है। स्थानीय बाजारों में इसकी लगातार मांग और कम जोखिम वाली फसल होने के कारण किसान इसे बड़े पैमाने पर उगा रहे हैं।

मिट्टी और मौसम कद्दू की खेती के लिए अनुकूल
कद्दू की खेती के लिए दोमट और बलुई दोमट मिट्टी को उपयुक्त माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी का पीएच स्तर 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए। यह फसल लगभग 60 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को कम समय में उत्पादन मिल जाता है। गर्मियों के मौसम में इसकी मांग और बढ़ जाती है, क्योंकि लोग इस दौरान हल्की और हरी सब्जियों को ज्यादा पसंद करते हैं।
किसान आजम का अनुभव और उत्पादन मॉडल
स्थानीय किसान आजम बताते हैं कि इस समय वे करीब तीन एकड़ भूमि में कद्दू की खेती कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह फसल कम मेहनत में बेहतर परिणाम देती है। बाजार में कद्दू का खुदरा भाव 25 से 30 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रहा है, जबकि थोक मंडियों में यह 15 से 20 रुपये प्रति किलो के बीच बिक रहा है। लगातार मांग के कारण उन्हें अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती।
कम लागत में बेहतर मुनाफे का गणित
किसान आजम के मुताबिक, एक एकड़ में कद्दू की खेती करने पर करीब 7 हजार रुपये का खर्च आता है। वहीं, सही देखभाल और अनुकूल मौसम में इससे लगभग 1 लाख रुपये तक की आमदनी संभव है। यह अनुपात किसानों के लिए इसे एक लाभकारी विकल्प बनाता है। पिछले दो दशकों से सब्जी खेती कर रहे आजम बताते हैं कि कद्दू की फसल में कीटों का प्रकोप अपेक्षाकृत कम होता है, जिससे अतिरिक्त खर्च भी कम हो जाता है।
बाजार में स्थिर मांग से किसानों को राहत
कद्दू को कई क्षेत्रों में कुम्हड़ा के नाम से भी जाना जाता है और इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है। इसके बीज भी बाजार में उपयोगी माने जाते हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है। गर्मियों में इसकी खपत और बढ़ जाती है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलती है। यही कारण है कि अब अधिक किसान इस फसल को अपने खेती मॉडल में शामिल कर रहे हैं।
सब्जी खेती की ओर बढ़ता रुझान
लखीमपुर खीरी में बदलते कृषि रुझानों के बीच किसान अब ऐसी फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो कम समय में तैयार हों और बाजार में उनकी अच्छी मांग हो। कद्दू की खेती इसी दिशा में एक उदाहरण बन रही है। यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि खेती को एक स्थिर और व्यावसायिक स्वरूप देने में भी योगदान दे रही है।

