AGRICULTURE

Strawberry: छत पर आसान तरीकों से स्ट्रॉबेरी उगाने की संपूर्ण घरेलू गाइड

Strawberry: आज के समय में लोग ताजे और रसायन मुक्त फलों को लेकर पहले से अधिक जागरूक हो गए हैं। इसी कारण घर पर फल और सब्जियां उगाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। स्ट्रॉबेरी ऐसा फल है जो स्वाद, सेहत और कमाई तीनों के लिहाज से बेहद उपयोगी माना जाता है। खास बात यह है कि इसे खेत के साथ-साथ घर की छत, बालकनी या आंगन में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। झारखंड के पलामू जिले के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र चियांकी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, पलामू क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती लगातार बढ़ रही है क्योंकि यह कम लागत में अच्छी पैदावार देती है और बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है।

Strawberry
Strawberry

स्ट्रॉबेरी में भरपूर मात्रा में विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और आवश्यक खनिज तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। यह फल हृदय को स्वस्थ रखने, आंखों की रोशनी बेहतर करने और त्वचा को चमकदार बनाने में भी सहायक माना जाता है। घर पर स्ट्रॉबेरी उगाने से न केवल शुद्ध और ताजा फल मिलता है, बल्कि यह एक अच्छी और सकारात्मक जीवनशैली को भी बढ़ावा देता है।

सही स्थान का चयन क्यों जरूरी है
स्ट्रॉबेरी के पौधों के लिए स्थान का चुनाव सबसे अहम चरण होता है। यह पौधा हल्की ठंडी जलवायु और पर्याप्त रोशनी में अच्छी तरह विकसित होता है। घर की छत या बालकनी में ऐसा स्थान चुनें जहां सुबह की धूप सीधे मिले और दिन में कम से कम चार से छह घंटे सूर्य की रोशनी पहुंच सके। बहुत अधिक तेज धूप या पूरी छांव में रखने से पौधे की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। साथ ही, उस जगह पर हवा का अच्छा प्रवाह होना चाहिए ताकि नमी अधिक समय तक न ठहरे और फंगल रोगों का खतरा न बने।

पौधे या रनर से उगाने का सही तरीका
स्ट्रॉबेरी उगाने के लिए बीज, पौधे और रनर तीनों विकल्प उपलब्ध होते हैं। हालांकि बीज से उगाने की प्रक्रिया लंबी और धैर्य वाली होती है, इसलिए नए लोगों के लिए यह थोड़ा कठिन हो सकता है। नर्सरी से तैयार पौधे या रनर लाकर लगाना ज्यादा आसान और सफल माना जाता है। रनर दरअसल स्ट्रॉबेरी पौधे से निकलने वाली पतली शाखाएं होती हैं, जिनसे नया पौधा तैयार हो जाता है। पलामू और आसपास के क्षेत्रों में विंटर डॉन किस्म के पौधे घरेलू खेती के लिए उपयुक्त माने जाते हैं क्योंकि इनमें फल अच्छे आकार और स्वाद के होते हैं।

गमले और मिट्टी की सही तैयारी
स्ट्रॉबेरी के पौधे की जड़ें ज्यादा गहराई तक नहीं जातीं, लेकिन फिर भी गमले की गहराई कम से कम आठ से दस इंच होनी चाहिए। आप चाहें तो ग्रो बैग का भी उपयोग कर सकते हैं। गमले के नीचे जल निकासी के लिए छेद होना अनिवार्य है, ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके। मिट्टी हल्की, भुरभुरी और पोषक तत्वों से भरपूर होनी चाहिए। इसके लिए उपजाऊ मिट्टी, सड़ी हुई गोबर की खाद और थोड़ी बालू मिलाकर मिश्रण तैयार करें। मिट्टी का पीएच स्तर हल्का अम्लीय होना सबसे बेहतर रहता है।

रोपाई और पौधों की दूरी का ध्यान
जब मिट्टी और गमला तैयार हो जाए, तब पौधे की रोपाई करें। पौधे को दो से तीन इंच की गहराई में लगाएं और इस बात का ध्यान रखें कि जड़ें पूरी तरह ढक जाएं। पौधे का ऊपरी भाग मिट्टी के अंदर न दबे। यदि एक से अधिक पौधे लगा रहे हैं, तो उनके बीच बीस से तीस सेंटीमीटर की दूरी रखें। सही दूरी रखने से पौधों को फैलने और फल देने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है।

पानी, खाद और नियमित देखभाल
स्ट्रॉबेरी के पौधों को न तो बहुत अधिक पानी चाहिए और न ही बिल्कुल सूखा रखा जाना चाहिए। मिट्टी में हल्की नमी बनी रहनी चाहिए। गर्मियों में आवश्यकता अनुसार पानी दें और सर्दियों में पानी की मात्रा कम रखें। महीने में एक बार हल्की जैविक खाद देना पौधों के लिए फायदेमंद होता है। कीट या रोग दिखने पर रासायनिक दवाओं के बजाय नीम तेल या जैविक घोल का छिड़काव करें। इससे फल सुरक्षित और स्वादिष्ट रहते हैं।

फल आने की अवधि और तुड़ाई
स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाने के लगभग साठ से नब्बे दिनों के भीतर फल देना शुरू कर देते हैं। जब फल पूरी तरह लाल रंग का हो जाए और हल्का नरम महसूस हो, तब उसकी तुड़ाई करें। घर पर उगी स्ट्रॉबेरी स्वाद में बेहतर और पूरी तरह सुरक्षित होती है। सही देखभाल के साथ एक पौधा लंबे समय तक फल देता रहता है और छत पर हरियाली भी बनाए रखता है।

Back to top button