AGRICULTURE

Strawberries have made the farmer rich: पलामू के किसान ने बदली खेती की तस्वीर, स्ट्रॉबेरी से रच रहा आय का नया मॉडल

Strawberries have made the farmer rich: पलामू जिले के सगालिम गांव में रहने वाले किसान परमेंद्र कुमार ने खेती की पारंपरिक सोच से आगे बढ़ते हुए एक साहसिक और प्रेरणादायक कदम inspirational steps उठाया है। वर्षों तक गन्ने की खेती करने के बाद उन्होंने पहली बार आधुनिक तरीके से स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की है। यह पहल केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में बदलते कृषि रुझानों और किसानों की नई सोच को भी दर्शाती है। आज के समय में जब खेती की लागत बढ़ रही है और पारंपरिक फसलों से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा, ऐसे में नकदी फसलों की ओर बढ़ना किसानों के लिए एक व्यवहारिक विकल्प बनता जा रहा है।

Strawberries have made the farmer rich

पारंपरिक खेती से आधुनिक कृषि की ओर कदम

परमेंद्र कुमार लंबे समय से गन्ने की खेती कर रहे थे, लेकिन लगातार बढ़ती लागत और सीमित मुनाफे ने उन्हें कुछ नया सोचने के लिए मजबूर किया। इसी दौरान उन्हें उद्यान विभाग से जुड़े कृषि विशेषज्ञों Connected agricultural experts से संपर्क का अवसर मिला। विशेषज्ञों ने उन्हें स्ट्रॉबेरी जैसी उन्नत और लाभकारी फसल के बारे में जानकारी दी और इसके बाजार की संभावनाओं से अवगत कराया। सही मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग मिलने के बाद उन्होंने यह तय किया कि वे पारंपरिक खेती छोड़कर आधुनिक कृषि पद्धति को अपनाएंगे।

विशेषज्ञों का मार्गदर्शन बना आत्मविश्वास की वजह

नई फसल अपनाने में शुरुआती डर और असमंजस स्वाभाविक था। स्ट्रॉबेरी की खेती उनके लिए बिल्कुल नया अनुभव थी। लेकिन उद्यान विभाग से जुड़े विशेषज्ञों ने समय Experts have the time-समय पर उन्हें तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण और प्रेरणा दी। सरकारी योजनाओं और विभागीय सहयोग ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया। सही सलाह और निरंतर निगरानी के कारण उन्होंने जोखिम को समझदारी से अवसर में बदल दिया।

2.5 एकड़ में ऑर्गेनिक स्ट्रॉबेरी की खेती

परमेंद्र कुमार ने अपनी 2.5 एकड़ भूमि में स्ट्रॉबेरी की ऑर्गेनिक खेती शुरू की। इस पूरी परियोजना में करीब 4 लाख रुपये की लागत आई। पौधे महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र The plants are from the Nashik region of Maharashtra से मंगाए गए, जिन्हें वैज्ञानिक विधि से खेत में लगाया गया। खेत की तैयारी, सिंचाई व्यवस्था, मल्चिंग और पौधों की दूरी जैसी सभी प्रक्रियाएं आधुनिक कृषि तकनीक के अनुसार अपनाई गईं। खास बात यह है कि पूरी खेती ऑर्गेनिक पद्धति से की जा रही है, जिसमें रासायनिक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया गया।

उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान

स्ट्रॉबेरी की खेती में गुणवत्ता का विशेष महत्व Special importance होता है। परमेंद्र कुमार ने पौधों की नियमित देखभाल, समय पर सिंचाई और प्राकृतिक तरीकों से रोग नियंत्रण पर ध्यान दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि उनकी फसल न केवल देखने में आकर्षक है, बल्कि स्वाद और ताजगी के मामले में भी बाजार की मांग पर खरी उतरती है। वर्तमान में उनके खेत से प्रतिदिन लगभग 30 से 35 किलो स्ट्रॉबेरी का उत्पादन हो रहा है।

बाजार में मजबूत मांग और बेहतर कीमत

उत्पादित स्ट्रॉबेरी Produced strawberries को झारखंड, बिहार और कोलकाता जैसे बड़े बाजारों में भेजा जा रहा है। वहां इसे लगभग 300 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है। अच्छी कीमत और नियमित मांग के कारण परमेंद्र कुमार को पारंपरिक फसलों की तुलना में कहीं अधिक आय प्राप्त हो रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सही फसल चयन और बाजार की समझ किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकती है।

अन्य किसानों के लिए प्रेरणा की मिसाल

परमेंद्र कुमार की यह पहल आसपास के किसानों nearby farmers के लिए प्रेरणा बन रही है। अब क्षेत्र के अन्य किसान भी पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक और लाभकारी फसलों के बारे में जानकारी लेने लगे हैं। यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। यदि किसान सही तकनीक, प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग का लाभ उठाएं, तो खेती एक लाभकारी व्यवसाय बन सकती है।

भविष्य की योजनाएं और संभावनाएं

सफल शुरुआत के बाद परमेंद्र कुमार भविष्य Parmendra Kumar Future में स्ट्रॉबेरी की खेती का दायरा बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। साथ ही वे अन्य उन्नत फसलों और मूल्य संवर्धन पर भी विचार कर रहे हैं, ताकि आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकें। उनकी यह सोच आधुनिक कृषि उद्यमिता की ओर एक मजबूत कदम है।

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