AGRICULTURE

OrganicFarming – यहाँ जानें बिना केमिकल 5 किलो की पत्तागोभी उगाने की विधि

OrganicFarming – रांची के एक किसान ने अपने खेत में ऐसी पत्तागोभी उगाई है, जिसका वजन पांच किलो तक पहुंच गया। खास बात यह है कि इस फसल में न तो यूरिया का इस्तेमाल किया गया और न ही किसी रासायनिक दवा का। किसान मनोज बताते हैं कि थोड़ी समझदारी और नियमित देखभाल से बिना केमिकल के भी बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है। उनका कहना है कि खेती में धैर्य और मिट्टी की सही तैयारी सबसे अहम भूमिका निभाती है।

Organic farming 5kg cabbage success

मिट्टी की तैयारी है पहली शर्त

मनोज के अनुसार, बड़े आकार की पत्तागोभी के लिए जमीन की गुणवत्ता पर खास ध्यान देना जरूरी है। खेत को कम से कम दो से तीन बार अच्छी तरह जोता जाता है, ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए। जुताई के बाद कुछ दिन खेत को धूप में खुला छोड़ दिया जाता है, जिससे मिट्टी में मौजूद हानिकारक तत्व कम हो सकें। उनका मानना है कि मिट्टी जितनी उपजाऊ और संतुलित होगी, फसल उतनी ही बेहतर होगी। इसी चरण में खेत को समतल करना और ढेले तोड़ना भी जरूरी होता है।

केले और रसोई अपशिष्ट से तैयार खाद

रासायनिक उर्वरक की जगह मनोज जैविक खाद का उपयोग करते हैं। वह बताते हैं कि केले के छिलके और रसोई से निकलने वाले जैविक अपशिष्ट से तैयार खाद मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद करती है। केले के अवशेष में पोटैशियम और कैल्शियम जैसे तत्व होते हैं, जो पौधों की वृद्धि में सहायक माने जाते हैं। इसके साथ थोड़ा चूना मिलाने से मिट्टी का पीएच स्तर संतुलित रहता है। गोबर खाद और केंचुआ खाद भी नियमित रूप से डाली जाती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है।

सिंचाई में संतुलन जरूरी

मनोज का कहना है कि ज्यादा पानी देना फसल के लिए नुकसानदेह हो सकता है। पत्तागोभी के पौधों को दो से तीन दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई पर्याप्त होती है। खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे जड़ें सड़ सकती हैं। समय-समय पर खेत की निगरानी भी जरूरी है, ताकि खरपतवार को तुरंत हटाया जा सके। आधुनिक उपकरणों की मदद से यह काम आसान हो जाता है।

धूप और सुरक्षा पर नजर

पत्तागोभी की अच्छी बढ़वार के लिए पर्याप्त धूप जरूरी है। खुले खेत में सामान्यतः रोशनी की कमी नहीं होती, लेकिन पौधों की नियमित निगरानी जरूरी है। कीड़े-मकोड़े या पक्षियों से फसल को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए किसान लगातार खेत का निरीक्षण करते हैं। मनोज कहते हैं कि फसल के आसपास रहकर उसकी स्थिति पर नजर रखना मेहनत का काम है, लेकिन यही मेहनत बेहतर उत्पादन का आधार बनती है।

तीन से पांच किलो तक का उत्पादन

इन सभी उपायों का पालन करने पर मनोज का दावा है कि पत्तागोभी का वजन तीन किलो से कम नहीं होता और अनुकूल परिस्थितियों में यह चार से पांच किलो तक पहुंच सकता है। उनका अनुभव बताता है कि जैविक तरीके अपनाकर भी अच्छी पैदावार संभव है। जरूरत है तो बस मिट्टी की समझ, नियमित देखभाल और संतुलित पोषण की।

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