AGRICULTURE

Modern Fish Farming: मछली पालन से किसान कमा सकते हैं लाखों का मुनाफा, एक्सपर्ट ने बताए तरीके

Modern Fish Farming: आज के समय में जब खेती की लागत बढ़ रही है, मछली पालन किसानों के लिए एक बेहतरीन मुनाफे वाला व्यवसाय बनकर उभरा है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जूलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद अफजल खान के अनुसार, भविष्य की खाद्य जरूरतों को पूरा करने में जलीय संसाधनों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होने वाली है। मछली न केवल आय का एक स्थायी स्रोत है, बल्कि यह मानव शरीर के लिए उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का सबसे सस्ता माध्यम भी है। जो किसान (Aquaculture Business Growth) में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह समय नई तकनीकों को अपनाकर अपनी किस्मत बदलने का है।

Modern fish farming

पॉलीकल्चर तकनीक से बढ़ाएं मछलियों की पैदावार

डॉ. अफजल खान बताते हैं कि भारत में मुख्य रूप से इंडियन मेजर कार्प्स जैसे कतला, रोहू और मृगल की मांग सबसे अधिक रहती है। इन विभिन्न प्रजातियों को एक साथ एक ही तालाब में पालने की विधि को ‘पॉलीकल्चर’ कहा जाता है। इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि तालाब के अलग-अलग स्तरों का उपयोग (Resource Optimization Strategy) के तहत हो जाता है, जिससे कुल उत्पादन में भारी वृद्धि होती है। इसके अलावा, कम कांटे वाली पंगास मछली भी अब किसानों की पहली पसंद बन रही है क्योंकि यह बहुत कम समय और सीमित स्थान में तैयार हो जाती है।

आधुनिक तकनीक और फीड मैनेजमेंट का महत्व

मछली पालन को व्यावसायिक रूप देने के लिए अब टैंक और कंट्रोल्ड सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। तालाब में ऑक्सीजन की मात्रा बनाए रखने के लिए एरेटर का इस्तेमाल अनिवार्य होता जा रहा है। वहीं, मछलियों के भोजन के लिए (Nutritional Feed Formulation) पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध तेलहन की खली (ऑयल केक) प्रोटीन का एक बेहतरीन और सस्ता स्रोत है। इसके साथ ही, इंड्यूस्ड ब्रीडिंग तकनीक के माध्यम से किसान अब स्वयं उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का उत्पादन कर सकते हैं, जिससे उनकी बाहरी निर्भरता कम होती है।

सरकार की सहायता और मत्स्य संपदा योजना

मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना चलाई जा रही है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को नया तालाब बनाने, फीड मिल स्थापित करने और आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए (Government Subsidy Support) प्रदान की जाती है। इस वित्तीय मदद और तकनीकी प्रशिक्षण से छोटे किसान भी बड़े स्तर पर एक्वाकल्चर शुरू कर सकते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि ब्लू रिवॉल्यूशन के माध्यम से देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया जाए और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार लाया जाए।

इंटीग्रेटेड फिश फार्मिंग: एक साथ कई फायदे

भविष्य की खेती के लिए ‘इंटीग्रेटेड फिश फार्मिंग’ एक क्रांतिकारी तकनीक साबित हो रही है। इसमें मछली पालन के साथ-साथ बत्तख पालन, पशुपालन या सब्जियों की खेती एक ही स्थान पर की जाती है। उदाहरण के लिए, बत्तखों का मलमूत्र तालाब के लिए (Natural Fertilizer Production) का काम करता है, जिससे मछलियों के लिए प्राकृतिक भोजन ‘प्लैंकटन’ पैदा होता है। यह चक्र न केवल लागत को कम करता है, बल्कि एक ही जमीन से किसान को कई प्रकार की आय प्राप्त होती है।

भविष्य की खाद्य सुरक्षा और प्रोटीन की जरूरत

बढ़ती जनसंख्या और घटती कृषि योग्य भूमि के कारण दुनिया के सामने सस्ते प्रोटीन की आपूर्ति करना एक बड़ी चुनौती है। मछली प्रोटीन का सबसे शुद्ध और आसानी से पचने वाला स्रोत है। डॉ. खान का मानना है कि जैसे-जैसे लोग (Health Awareness Trends) के प्रति जागरूक हो रहे हैं, मछली की मांग वैश्विक स्तर पर और बढ़ेगी। ऐसे में फिश कल्चर न केवल आर्थिक लाभ का जरिया है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए पोषण सुनिश्चित करने का एक सशक्त माध्यम भी है।

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