Banana Cultivation: केले की खेती करते समय इन बातों का रखें खास ख्याल, पहले ही सीजन में हो जाएंगे मालामाल
Banana Cultivation: अगर आप भी केले उगाने पर विचार कर रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद मददगार हो सकती है। जी हाँ, हम केले की खेती करते समय पौधों को एक-दूसरे से अधिकतम दूरी पर रखने की बात कर रहे हैं। यह दूरी न केवल पौधों को स्वस्थ रखती है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और उपज (Crop Quality and Yield) में भी सुधार करती है। पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक संजय कुमार सिंह के अनुसार, पौधों के बीच की दूरी खेती की तकनीक, मिट्टी की बनावट, किस्म और पर्यावरण के आधार पर चुनी जानी चाहिए।

ग्रैंड नैन आदि जैसी बौनी किस्मों के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर (लगभग 4444 पौधे प्रति हेक्टेयर) की दूरी उपयुक्त मानी जाती है, जबकि मालभोग जैसी लंबी किस्मों के लिए 1.8 मीटर x 1.8 मीटर (लगभग 3200 पौधे प्रति हेक्टेयर) की दूरी बेहतर होती है। अगर किसान मिश्रित खेती कर रहे हैं, तो पौधों को 3.6 मीटर की दूरी पर लगाना चाहिए। पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखने से पर्याप्त प्रकाश और वायु संचार सुनिश्चित होता है, जिससे कीटों और बीमारियों का प्रकोप भी कम होता है।
भूमि, जलवायु और मिट्टी की वैज्ञानिक समझ होना बेहद ज़रूरी
उष्णकटिबंधीय फल केला (Tropical Fruit Banana) 15 से 35 डिग्री सेल्सियस के तापमान में पनपता है। ऐसी जगहें चुनें जहाँ पाला या तेज़ हवाएँ न पड़ें और जहाँ दिन भर धूप रहती हो। समतल या धीरे-धीरे ढलान वाली और पर्याप्त जल निकासी व्यवस्था वाली ज़मीन पर इसकी खेती की जा सकती है। केले दोमट मिट्टी में पनपते हैं क्योंकि यह नमी को अच्छी तरह से बनाए रखती है और इसमें जलभराव की समस्या नहीं होती। मिट्टी के pH के लिए आदर्श सीमा 6.0 से 7.5 है। अगर मिट्टी बहुत अम्लीय या क्षारीय है, तो जिप्सम या चूने (Gypsum or Lime) जैसे उपचारात्मक उपचारों का उपयोग करें। खेत की सफाई, ज़ोरदार जुताई और जैविक खाद से मिट्टी तैयार करने से उत्पादन का आधार मज़बूत होता है।
पौधे का चयन और रोपण तकनीक
पौधे लगाने से पहले उचित आकार के गड्ढे खोदे जाने चाहिए। 45 सेमी चौड़े या 60 सेमी गहरे गड्ढे अक्सर 1.5 x 1.5 मीटर या 2 x 2 मीटर की दूरी पर खोदे जाते हैं। खतरनाक कीड़ों और जीवाणुओं (Dangerous Insects and Bacteria) को नष्ट करने के लिए सूर्य की रोशनी पाने के लिए, इन गड्ढों को 15 दिनों तक खुला रखना चाहिए। सड़ी हुई गोबर खाद, फ्यूराडान, नीम की खली और खोदी गई मिट्टी के मिश्रण से गड्ढों को भरने के बाद, हल्का पानी देना चाहिए। केवल प्रमाणित, रोगमुक्त और स्वस्थ पौधे ही लगाएँ; यदि संभव हो, तो ऊतक-संवर्धित पौधों का उपयोग करें। पौधों के चारों ओर जैविक गीली घास (Organic Mulch) डालने से उन्हें नमी बनाए रखने और खरपतवारों को दूर रखने में मदद मिलती है।
जलभराव से बचाना बेहद जरूरी
केले की खेती (Banana Cultivation) करते समय जलभराव से बचना बेहद ज़रूरी है। पानी बचाने और नमी बनाए रखने के लिए, सुनिश्चित करें कि खेत में पर्याप्त जल निकासी हो और यदि संभव हो, तो ड्रिप सिंचाई प्रणाली का उपयोग करें। जैविक खाद, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के चयन से उत्पादन में वृद्धि होती है। किसान अपनी आय बढ़ाने के लिए खेती के पहले चार महीनों के दौरान खाली खेतों में गेंदा, फूलगोभी, मूली और हल्दी जैसी फसलें उगा सकते हैं। यह याद रखना ज़रूरी है कि कद्दूवर्गीय फसलें (Cucurbitaceous Crops) लगाने से केले के पौधों में विषाणुजनित बीमारियाँ विकसित हो सकती हैं। केले न केवल कृषि उपज बढ़ाते हैं, बल्कि वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों का उपयोग करने पर किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में भी मदद करते हैं।

