AGRICULTURE

Jharkhand rural economy: झारखंड में योजनाबद्ध खेती से किसानों की आय बढ़ाने के प्रभावी तरीके

Jharkhand rural economy: झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत आधार खेती और किसानी है। राज्य की बड़ी आबादी आज भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। इसके बावजूद कई किसान पारंपरिक सोच Despite this, many farmers have traditional thinking और बिना पूर्व योजना के खेती शुरू कर देते हैं। मौसम में बदलाव, वर्षा की अनिश्चितता, मिट्टी की उर्वरता में कमी और बाजार भाव की सही जानकारी न होना किसानों को आर्थिक नुकसान की ओर ले जाता है। कई बार किसान ऐसी फसल चुन लेते हैं, जिसमें लागत अधिक और मुनाफा कम होता है। इन सभी कारणों से खेती लाभ का साधन बनने के बजाय संघर्ष का कारण बन जाती है।

Jharkhand rural economy
Jharkhand rural economy

योजनाबद्ध खेती की आवश्यकता

खेती को लाभकारी बनाने के लिए सबसे जरूरी है सही योजना। जमीन की प्रकृति, पानी की उपलब्धता, The nature of the land, the availability of water श्रम क्षमता और निवेश को ध्यान में रखकर यदि खेती की जाए, तो जोखिम काफी हद तक कम हो सकता है। योजनाबद्ध खेती से किसान अपनी आय को स्थिर बना सकते हैं और लंबे समय तक आर्थिक सुरक्षा हासिल कर सकते हैं। आधुनिक कृषि तकनीक, वैज्ञानिक सलाह और समयबद्ध मॉडल अपनाकर खेती को व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है।

व्यावसायिक खेती का संतुलित मॉडल

हजारीबाग के गोरियाकरमा स्थित आईसीएआर केंद्र ICAR center located in Goria Karma के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पंकज कुमार सिन्हा के अनुसार, बिना स्पष्ट दिशा और योजना के खेती शुरू करना किसानों के लिए सबसे बड़ा नुकसान है। उन्होंने किसानों के लिए अलग-अलग समय अवधि के खेती मॉडल तैयार किए हैं, ताकि हर किसान अपनी क्षमता के अनुसार निर्णय ले सके। इन मॉडलों की अवधि दो घंटे से लेकर बीस साल तक की है। इससे किसान अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह की आय की योजना बना सकते हैं।

लंबी अवधि के लिए महुआ आधारित खेती

झारखंड की टांड़ भूमि के लिए महुआ की खेती एक बेहतरीन विकल्प है। बीस साल की योजना के तहत महुआ के पेड़ लगाए जा सकते हैं। सघन बागवानी पद्धति से एक एकड़ भूमि One acre of land under intensive horticulture में 60 से 80 पौधे लगाए जा सकते हैं। महुआ के फूल और बीज बाजार में अच्छी कीमत पर बिकते हैं। वर्तमान समय में एक पेड़ से हर साल 5,000 से 10,000 रुपये तक की आमदनी संभव है। जब पेड़ पूरी तरह विकसित हो जाते हैं, तो एक एकड़ से सालाना 4 से 8 लाख रुपये तक की आय हो सकती है।

दस साल की योजना में बांस और आम की खेती

जो किसान मध्यम अवधि की योजना Farmers’ medium-term plan बनाना चाहते हैं, उनके लिए आम का बाग और बांस की खेती उपयुक्त है। आम के बाग के साथ देसी मुर्गी पालन जोड़ने से आय के दो स्रोत बन जाते हैं। वहीं बांस की खेती में शुरुआती दो साल देखभाल की जरूरत होती है, लेकिन उसके बाद यह लगातार आमदनी देने वाली फसल बन जाती है। एक एकड़ बांस की खेती से किसान हर साल अच्छी कमाई कर सकते हैं।

तीन साल में मुनाफा देने वाली बागवानी फसलें

जल्दी लाभ पाने की इच्छा The desire to gain quick profits रखने वाले किसानों के लिए अमरूद, सीताफल और अनानास जैसी बागवानी फसलें बेहतर विकल्प हैं। इन फसलों में शुरुआती निवेश थोड़ा अधिक होता है, लेकिन तीन साल के भीतर प्रति एकड़ 2 से 3 लाख रुपये तक की आय संभव है। कम लागत में बेहतर विकल्प के रूप में ड्रैगन फ्रूट की खेती भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसके पौधे दो साल में फल देने लगते हैं और एक एकड़ से 5 से 6 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है।

मशरूम उत्पादन से अतिरिक्त आय

जो किसान सीमित जमीन या कम मेहनत में आय चाहते हैं, उनके लिए मशरूम उत्पादन Mushroom production एक अच्छा विकल्प है। घर के अंदर लगभग 600 वर्ग फीट जगह में मशरूम उगाया जा सकता है। इसका उत्पादन चक्र लगभग 60 दिन का होता है और बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है। इससे घर बैठे नियमित आमदनी प्राप्त की जा सकती है।

फूड प्रोसेसिंग से गांव में रोजगार

तेजी से मुनाफा कमाने के लिए फूड प्रोसेसिंग Food processing for profit भी एक प्रभावी साधन है। टमाटर का सॉस, मिर्च का अचार, आम का मुरब्बा जैसे उत्पाद बनाकर बाजार में बेचे जा सकते हैं। यह काम दो सप्ताह के भीतर आय देना शुरू कर देता है। इसके अलावा गांवों से किसानों के उत्पाद इकट्ठा कर शहरों या अपार्टमेंट क्षेत्रों में बेचने से एक व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 1,000 रुपये और महीने में 30,000 रुपये तक कमा सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ता है।

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