Guava Farming – अमरूद की खेती में साल में तीन बार फल, विशेषज्ञों ने बताए जरूरी उपाय
Guava Farming – अमरूद की खेती को देश के कई हिस्सों में किसानों के लिए लाभदायक फल उत्पादन के रूप में देखा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस फसल की खासियत यह है कि इसमें साल में एक बार नहीं बल्कि तीन अलग-अलग समय पर फूल और फल आते हैं। सही देखभाल और वैज्ञानिक तरीके अपनाने से किसान अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं। पश्चिम चंपारण जिले के मझौलिया प्रखंड के बनकट मुसहरी गांव के किसान और शांभवी बायोटेक के संस्थापक रविकांत पांडे बताते हैं कि अमरूद के पौधों का विकास चक्र अन्य फलों की तुलना में थोड़ा अलग होता है, इसलिए इसकी देखभाल भी उसी अनुसार करनी होती है।

साल में तीन बार आता है फूल और फल
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अमरूद के पौधों में वर्ष के दौरान तीन अलग-अलग चरणों में फूल और फल विकसित होते हैं। पहला चरण फरवरी और मार्च के महीनों में शुरू होता है, जब पौधों पर फूल आते हैं और इसके बाद जून-जुलाई के आसपास फल बनने लगते हैं। यह मौसम शुरुआती उत्पादन के रूप में देखा जाता है।
दूसरा चरण जून और जुलाई के महीनों में शुरू होता है। इस समय आने वाले फूलों से तैयार होने वाले फल आमतौर पर सर्दियों के मौसम में पकते हैं। सर्दियों में मिलने वाला अमरूद अक्सर स्वाद और गुणवत्ता के लिहाज से बेहतर माना जाता है, इसलिए बाजार में इसकी मांग भी अधिक रहती है।
तीसरे चरण को कृषि विशेषज्ञ हस्त बहार के नाम से जानते हैं। इस अवधि में सर्दियों के दौरान पौधों पर फूल लगते हैं और बसंत ऋतु तक फल तैयार हो जाते हैं। इस तरह पूरे साल अलग-अलग समय पर उत्पादन होने से किसानों को लगातार आमदनी का अवसर मिलता है।
शुरुआती फलों को हटाना पौधों के लिए बेहतर
विशेषज्ञों का कहना है कि पौधा रोपण के बाद शुरुआती समय में अधिक मात्रा में फल लेना पौधों के लिए उचित नहीं होता। यदि छोटे पौधों पर बहुत ज्यादा फल आने लगें तो उनकी वृद्धि प्रभावित हो सकती है और फलों की गुणवत्ता भी कमजोर हो सकती है।
इसी कारण कृषि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पहली बार जब फूलों के बाद छोटे फल बनने लगें तो उनकी समय पर छंटाई कर देनी चाहिए। इससे पौधे पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता और उसकी जड़ें तथा तना मजबूत बनने में मदद मिलती है। लंबे समय में यह तरीका बेहतर उत्पादन देने में सहायक साबित होता है।
पौधों की छंटाई और सिंचाई पर विशेष ध्यान जरूरी
अमरूद के पौधों की सही वृद्धि के लिए नियमित छंटाई और समय पर सिंचाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। वर्तमान मौसम में जब पौधों पर पहली बार फूल निकलने लगते हैं, उस समय किसानों को विशेष रूप से पानी की व्यवस्था और पौधों की देखभाल पर ध्यान देना चाहिए।
छोटे पौधों पर अधिक भार पड़ने से कई बार शाखाएं झुक जाती हैं या टूट भी सकती हैं। इसलिए छंटाई के माध्यम से अनावश्यक टहनियों को हटाना जरूरी होता है। इससे पौधे का संतुलित विकास होता है और आगे चलकर बेहतर फल उत्पादन की संभावना बढ़ती है।
संतुलित शाखा संरचना से बढ़ती है पैदावार
फलदार पौधों की अच्छी पैदावार के लिए शाखाओं का संतुलित विकास बेहद जरूरी माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार अमरूद के पौधे में मुख्य तने से केवल तीन से चार मजबूत शाखाएं ही रखनी चाहिए। यही शाखाएं आगे चलकर फल देने वाली मुख्य संरचना बनाती हैं।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि कोई शाखा दूसरी शाखा के ठीक ऊपर या नीचे न हो। यदि ऐसा होता है तो ऊपरी शाखा की छाया नीचे वाली शाखा पर पड़ती है, जिससे नीचे का हिस्सा कमजोर रह जाता है और वहां फल कम लगते हैं। संतुलित दूरी बनाए रखने से पौधे के सभी हिस्सों में समान रूप से वृद्धि होती है।
कटे हिस्सों की सुरक्षा भी जरूरी
छंटाई के बाद पौधों के कटे हुए हिस्सों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कटे स्थान पर बुझा हुआ चूना, कॉपर सल्फेट और पानी को मिलाकर तैयार किया गया मिश्रण लगाया जाए। यह लेप पौधे को संक्रमण से बचाने में मदद करता है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान अमरूद की खेती में वैज्ञानिक पद्धति अपनाएं, समय पर छंटाई करें और पौधों की सही देखभाल करें, तो यह फसल लंबे समय तक स्थिर आय का अच्छा स्रोत बन सकती है। फल उत्पादन के क्षेत्र में यह खेती किसानों के लिए लाभदायक विकल्प के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

