Guava cultivation: कम जोखिम में स्थायी कमाई का जरिया बना अमरूद का बाग रामपुर के किसान की सफलता कहानी
Guava cultivation: रामपुर जिले के एक किसान ने परंपरागत खेती से हटकर अमरूद Guava, a departure from traditional farming की बागवानी को अपनाया और इसे अपनी स्थायी आय का मजबूत साधन बना लिया। इस किसान का नाम सद्दीक है, जिन्होंने अपने खेत में आधुनिक सोच और सही किस्मों के चयन के साथ अमरूद की खेती शुरू की। आज उनका बाग न केवल स्थानीय किसानों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह दिखाता है कि सही योजना और देखभाल से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है।

अमरूद की उन्नत किस्मों का चयन
सद्दीक ने अपने खेत में एल-49 और गोल्डन किस्म के करीब 700 अमरूद के पेड़ लगाए हैं। इन किस्मों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें कीट संक्रमण की संभावना बेहद कम होती है। इसके अलावा इनका स्वाद और आकार बाजार की मांग के अनुरूप होता है। अच्छी क्वालिटी के कारण इन फलों को बेचने में किसी तरह की परेशानी नहीं आती और व्यापारी खुद खरीदने के लिए संपर्क करते हैं।
दो साल में शुरू हुआ उत्पादन
अमरूद की खेती का एक बड़ा फायदा यह है कि इसमें ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता। सद्दीक के अनुभव के अनुसार, पौधे लगाने के लगभग दो साल बाद ही पेड़ों पर फल आना शुरू हो गया था। शुरुआती समय में उत्पादन सीमित था, लेकिन जैसे-जैसे पेड़ बड़े और मजबूत होते गए, फलों की संख्या और वजन दोनों में बढ़ोतरी होती चली गई।
लंबे समय तक देने वाली फसल
एक बार जब अमरूद का पेड़ Guava tree पूरी तरह तैयार हो जाता है, तो यह कई वर्षों तक लगातार उत्पादन देता है। सद्दीक बताते हैं कि सही रखरखाव के साथ एक बाग लंबे समय तक आमदनी का भरोसेमंद साधन बन सकता है। यही वजह है कि अमरूद की खेती को वे भविष्य की सुरक्षित खेती मानते हैं।
सही देखभाल से बढ़ता मुनाफा
अमरूद के बाग की देखभाल बहुत जटिल नहीं होती। समय पर सिंचाई, संतुलित खाद Timely irrigation and balanced fertilizer और जरूरत के अनुसार हल्की दवा देने से पेड़ स्वस्थ रहते हैं। सद्दीक के बाग में लगे पेड़ अब पूरी तरह उत्पादन देने लगे हैं। औसतन एक पेड़ से 4 से 5 क्विंटल तक अमरूद प्राप्त हो जाता है, जिससे कुल उत्पादन काफी अच्छा हो जाता है।
साल में दो बार होती है फसल
अमरूद की खेती का एक और बड़ा लाभ यह है कि इससे साल में दो बार फसल मिलती है। पहली फसल बरसात के मौसम में आती है, जबकि दूसरी सर्दियों में। सर्दियों में तैयार Prepared for winter होने वाला अमरूद स्वाद में ज्यादा मीठा और लंबे समय तक टिकने वाला होता है। इसी कारण सर्दियों की फसल बाजार में बेहतर दाम दिलाती है।
बाजार तक आसान पहुंच
सद्दीक के बाग से अमरूद दिल्ली, हल्द्वानी, मुरादाबाद Delhi, Haldwani, Moradabad और बरेली जैसे बड़े बाजारों तक पहुंचता है। अच्छी क्वालिटी और सही वजन के कारण व्यापारी सीधे बाग से ही माल उठाना पसंद करते हैं। इससे किसान को मंडी के झंझट और अतिरिक्त खर्च से भी राहत मिलती है।
लागत कम, फायदा ज्यादा
बाग की देखभाल पर हर छह महीने में लगभग दस हजार रुपये Approximately ten thousand rupees every six months का खर्च आता है, जिसमें खाद, पानी और दवाइयों का खर्च शामिल होता है। इसके मुकाबले आमदनी कई गुना अधिक होती है। मौजूदा समय में अमरूद का बाजार भाव लगभग 80 रुपये प्रति किलो तक चल रहा है, जिससे कुल मुनाफा लाखों रुपये तक पहुंच जाता है।
नए किसानों के लिए बेहतरीन विकल्प
सद्दीक का मानना है कि अमरूद की खेती Guava cultivation उन किसानों के लिए आदर्श है जो कम जोखिम में लंबे समय तक स्थिर आय चाहते हैं। सही किस्मों का चयन, नियमित देखभाल और बाजार की समझ के साथ अमरूद का बाग कई वर्षों तक परिवार का खर्च और बचत दोनों संभाल सकता है।

