Farming Tips: गोड्डा की बंजर जमीन से हरियाली तक मेहनत और समझदारी से बदली खेती की तस्वीर
Farming Tips: गोड्डा जिले के पथरगामा प्रखंड के हरकट्टा गांव में रहने वाले किसान नसीब मुर्मू ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच सकारात्मक हो और मेहनत सही दिशा में की जाए, तो खेती किस्मत बदलने का साधन बन सकती है। जिस जमीन को लोग अनुपयोगी और बंजर मानते थे, उसी भूमि से उन्होंने मिर्च की खेती कर न सिर्फ अच्छी आमदनी की, बल्कि आसपास के किसानों के लिए एक नई राह भी दिखाई। उनकी यह कहानी ग्रामीण खेती, आधुनिक तकनीक और आत्मविश्वास का बेहतरीन उदाहरण है।

बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने की शुरुआत
नसीब मुर्मू के पास लगभग 10 कट्ठा जमीन थी, जो पहले पूरी तरह पथरीली और ऊबड़-खाबड़ थी। उस जमीन पर न तो फसल उगाने की संभावना दिखती थी और न ही कोई निवेश करने को तैयार था। लेकिन नसीब ने हार मानने के बजाय मिट्टी की जांच करवाई और धीरे-धीरे उसमें सुधार की प्रक्रिया शुरू की। उन्होंने जैविक खाद, गोबर खाद और मिट्टी सुधारक उपायों का इस्तेमाल कर जमीन की गुणवत्ता बढ़ाई। समय के साथ जमीन में नमी रोकने की क्षमता आई और खेती के लिए आधार तैयार हुआ।
वैज्ञानिक तरीके से मिर्च की खेती
जब जमीन खेती योग्य बनी, तब नसीब मुर्मू ने मिर्च की खेती को चुना। इसके पीछे उनका उद्देश्य कम लागत में अधिक मुनाफा कमाना था। उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से पौध रोपण किया और फसल की दूरी, खाद प्रबंधन और समय पर निराई-गुड़ाई पर विशेष ध्यान दिया। मिर्च के पौधों की देखरेख नियमित रूप से की गई, जिससे पौधे स्वस्थ रहे और उत्पादन बेहतर हुआ। खास बात यह रही कि प्रति पौधा लागत लगभग एक रुपये के आसपास ही आई।
कृषि विज्ञान केंद्र से मिला मार्गदर्शन
इस पूरी प्रक्रिया में नसीब मुर्मू को कृषि विज्ञान केंद्र से निरंतर सहयोग मिला। उन्हें जीविका हासा परियोजना के तहत आधुनिक खेती की जानकारी दी गई। परियोजना से जुड़े विशेषज्ञ समय-समय पर खेत का निरीक्षण करते रहे और फसल प्रबंधन, कीट नियंत्रण तथा रोग से बचाव के उपाय बताते रहे। इस तकनीकी मार्गदर्शन ने नसीब की खेती को मजबूत आधार दिया और नुकसान की संभावना को काफी हद तक कम कर दिया।
टपक सिंचाई से पानी और लागत दोनों की बचत
खेती में पानी की समस्या को देखते हुए नसीब मुर्मू ने टपक सिंचाई प्रणाली का इस्तेमाल किया। इस प्रणाली से पौधों को आवश्यकतानुसार पानी मिलता है और बेवजह पानी की बर्बादी नहीं होती। इससे न केवल जल संरक्षण हुआ, बल्कि बिजली और श्रम की लागत भी कम हुई। टपक सिंचाई के कारण पौधों की बढ़वार अच्छी हुई और मिर्च की गुणवत्ता भी बेहतर रही, जिससे बाजार में सही दाम मिल सका।
तीन महीने में दिखा मेहनत का परिणाम
करीब तीन महीने की मेहनत के बाद मिर्च की तुड़ाई शुरू हुई। शुरुआती बिक्री से ही नसीब मुर्मू को अच्छे संकेत मिलने लगे। अब तक वे लगभग साठ हजार रुपये की आमदनी कर चुके हैं। बाजार में मिर्च की मांग बनी रहने के कारण उन्हें अपनी उपज बेचने में कोई दिक्कत नहीं हुई। स्थानीय बाजार के साथ-साथ आसपास के इलाकों में भी उनकी मिर्च की बिक्री हो रही है।
आने वाले समय में बढ़ेगी आमदनी
नसीब मुर्मू का मानना है कि अप्रैल तक मिर्च की तुड़ाई जारी रहेगी और तब तक कुल कमाई करीब डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच सकती है। उनका कहना है कि अगर मौसम अनुकूल रहा और फसल प्रबंधन सही तरीके से चलता रहा, तो यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। वे आगे चलकर दूसरी सब्जियों की खेती करने की भी योजना बना रहे हैं, ताकि साल भर आय का स्रोत बना रहे।
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
नसीब मुर्मू की सफलता की चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है। आसपास के किसान उनकी खेती देखने आ रहे हैं और उनसे सलाह ले रहे हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि बंजर जमीन भी सही तकनीक और मेहनत से सोना उगल सकती है। सरकारी योजनाओं और कृषि विशेषज्ञों की मदद लेकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं और खेती को लाभ का व्यवसाय बना सकते हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा
ऐसी पहलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती हैं। जब किसान आधुनिक खेती अपनाते हैं और जोखिम को समझदारी से संभालते हैं, तो गांवों में रोजगार और आत्मनिर्भरता बढ़ती है। नसीब मुर्मू जैसे किसान यह दिखाते हैं कि खेती सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि भविष्य की मजबूत आर्थिक नींव भी बन सकती है।

