Cultivation of Arbi: इस विधि से करें अरबी की खेती, कम लागत में मिलेगा दोगुना मुनाफा
Cultivation of Arbi: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में किसानों के लिए सब्जी की बागवानी (Vegetable Gardening) का महत्व बढ़ता जा रहा है।कम लागत में सब्जी की बागवानी से अधिक मुनाफा मिल सकता है। किसान छोटे लाल मौर्य के अनुसार अरबी ऐसी ही एक सब्जी है। इसकी जड़ें और पत्तियां आसानी से बेची जा सकती हैं। यह फसल बहुत कम कीमत पर अच्छा मुनाफा देती है। अरबी ही एक ऐसी सब्जी है जिसकी जड़ें और पत्तियां लोगों को बहुत पसंद आती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे कभी-कभी घुइंया भी कहा जाता है।

इसे बोने के लिए कतार विधि का प्रयोग किया जाता है। पौधों के बीच 30 सेमी तथा पंक्तियों के बीच 45 सेमी की दूरी होनी चाहिए। कतार विधि का प्रयोग करने पर फसल की उपज अधिक होती है। बीज बोने के पांच से छह दिन बाद इसे प्रारंभिक सिंचाई (Initial Irrigation) मिलनी चाहिए। इसे उगाने के लिए सबसे अच्छी मिट्टी रेतीली दोमट मानी जाती है। इसकी खेती ठीक से न होने के कारण यह बाजार में काफी महंगी मिलती है। इससे किसानों को अच्छा मुनाफा होता है।
अरबी का बाजार मूल्य 60 रुपये प्रति किलोग्राम है
कई वर्षों से जिले के किसान अरबी की खेती (Cultivation of Arbi) कर रहे हैं। इससे उन्हें लाखों रुपये की कमाई हो रही है। किसान छोटेलाल मौर्य द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अब हम तीन बीघा में अरबी उगाते हैं। एक बीघा में करीब आठ से दस हजार रुपये खर्च होते हैं। बाजार में अरबी का कोई निश्चित मूल्य नहीं है। अरबी का प्रति किलोग्राम मूल्य 40 से 60 रुपये के बीच है।
दस महीने में फसल हो जाएगी तैयार
अरबी की खेती करना अपेक्षाकृत सरल (Relatively Simple) है। सबसे पहले खेत की जुताई की जाती है। इसके बाद थोड़ी दूरी पर अरबी बोई जाती है और जमीन को समतल किया जाता है। पौधे के उगने में 10 से 12 दिन लगते हैं। इसके बाद खाद डाली जाती है और पानी दिया जाता है। नतीजतन, कुछ ही समय में पेड़ तैयार हो जाता है। करीब 10 से 11 महीने बाद फसल दिखाई देने लगती है और उसे उखाड़कर बाजार में बेचा जा सकता है।

