AGRICULTURE

CapsicumFarming – इंडो-इजरायल तकनीक से रंगीन शिमला मिर्च खेती में बढ़ी आमदनी

CapsicumFarming – बिहार के किसानों के बीच खेती के तौर-तरीकों में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। पारंपरिक खेती के बजाय अब आधुनिक तकनीकों को अपनाकर किसान बेहतर आमदनी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। नालंदा जिले के चंडी स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में इंडो-इजरायल तकनीक के जरिए रंगीन शिमला मिर्च की खेती एक सफल उदाहरण बनकर उभरी है। यहां लाल और पीली शिमला मिर्च की पैदावार ने किसानों को बाजार में बेहतर कीमत दिलाने का रास्ता खोला है।

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बेहतर कीमत से किसानों को मिला आर्थिक फायदा

सामान्य हरी शिमला मिर्च जहां बाजार में आमतौर पर 30 से 40 रुपये प्रति किलो बिकती है, वहीं रंगीन शिमला मिर्च की कीमत 80 से 150 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। इस अंतर ने किसानों की आय में सीधा असर डाला है। चंडी सेंटर से जुड़े किसानों का कहना है कि कम समय में अधिक लाभ मिलने के कारण इस खेती की ओर रुचि तेजी से बढ़ी है।

पॉलीहाउस तकनीक से बढ़ी फसल की अवधि

सेंटर के साइड इंचार्ज भूषण प्रसाद सिंह के मुताबिक, पॉलीहाउस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ फसल की लंबी अवधि है। जहां पारंपरिक खेती में शिमला मिर्च की फसल लगभग चार महीने तक ही रहती है, वहीं इस आधुनिक तरीके से इसे करीब आठ महीने तक लिया जा सकता है। नियंत्रित वातावरण में फसल को मौसम के उतार-चढ़ाव से भी काफी हद तक सुरक्षा मिलती है।

मौसम की मार से सुरक्षित रहती है खेती

खुले खेतों में खेती अक्सर बारिश, तापमान और अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों से प्रभावित होती है। इसके विपरीत, पॉलीहाउस के अंदर नियंत्रित तापमान और नमी के कारण फसल सुरक्षित रहती है। यही वजह है कि यहां उत्पादित शिमला मिर्च का उत्पादन जुलाई तक भी जारी रह सकता है, जिससे किसानों को लगातार आय मिलती रहती है।

प्रशिक्षण से किसानों में बढ़ा भरोसा

चंडी स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अब तक करीब 35 हजार किसानों को आधुनिक खेती की ट्रेनिंग दे चुका है। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को बीज चयन, पौध प्रबंधन और बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन की जानकारी दी जाती है। इससे किसानों में नई तकनीक अपनाने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

कम लागत में अधिक उत्पादन की संभावना

इस तकनीक की एक खास बात यह भी है कि इसमें सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर उत्पादन संभव है। कम श्रम और नियंत्रित वातावरण में फसल की गुणवत्ता अच्छी रहती है, जिससे बाजार में इसकी मांग बनी रहती है। सही बीज और देखभाल के साथ यह खेती अलग-अलग प्रकार की मिट्टी में भी की जा सकती है।

बदलती खेती ने बदली किसानों की तस्वीर

आधुनिक तकनीक अपनाने के बाद कई किसान आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं। पारंपरिक खेती में जहां जोखिम अधिक था, वहीं इस पद्धति ने उन्हें स्थिर आय का विकल्प दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह नई तकनीकों को बढ़ावा मिलता रहा, तो आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में और भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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