Capsicum Farming – लखीमपुर खीरी में किसानों की बढ़ती रुचि से बदली खेती की तस्वीर
Capsicum Farming – उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में खेती का स्वरूप तेजी से बदलता नजर आ रहा है। परंपरागत फसलों के बजाय अब किसान सब्जियों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उन्हें कम लागत में बेहतर आमदनी हासिल हो रही है। खासतौर पर शिमला मिर्च जैसी नकदी फसल ने किसानों के बीच अपनी मजबूत जगह बना ली है। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बड़े शहरों में इसकी लगातार मांग बनी रहने के कारण यह किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है।

आधुनिक तकनीकों ने खेती को बनाया लाभकारी
जिले के कई किसान अब नेट हाउस और पॉलीहाउस जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन संरक्षित ढांचों में खेती करने से फसलों को मौसम और कीटों से सुरक्षा मिलती है, जिससे उत्पादन बेहतर होता है। खास बात यह है कि इन तकनीकों के जरिए किसान बेमौसम सब्जियां भी उगा सकते हैं, जिससे उन्हें बाजार में अच्छा दाम मिलता है। उद्यान विभाग भी किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है और नेट हाउस लगाने पर 50 से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है।
ड्रिप और मल्चिंग से बढ़ी उत्पादन क्षमता
किसान अब पारंपरिक सिंचाई पद्धति को छोड़कर ड्रिप इरिगेशन और मल्चिंग तकनीक अपना रहे हैं। इन तकनीकों के जरिए पानी की बचत होती है और पौधों को जरूरी पोषक तत्व सीधे जड़ों तक पहुंचते हैं। इससे न केवल उत्पादन बढ़ता है बल्कि गुणवत्ता भी बेहतर होती है। कई किसान इन तरीकों को अपनाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं और आसपास के किसानों के लिए उदाहरण बन रहे हैं।
इजराइल से मिली प्रेरणा ने बदली दिशा
निघासन क्षेत्र के प्रगतिशील किसान विक्रमेंद्र प्रसाद भल्ला ने बताया कि उनकी सोच में बदलाव एक विदेश यात्रा के बाद आया। कुछ साल पहले इजराइल जाने के दौरान उन्होंने वहां की आधुनिक खेती पद्धतियों को करीब से देखा। वहां किसानों को कम संसाधनों में ज्यादा उत्पादन करते देखकर उन्होंने भी इसी दिशा में काम करने का निर्णय लिया। लौटने के बाद उन्होंने नेट हाउस में शिमला मिर्च की खेती शुरू की और नई तकनीकों को अपनाया।
लागत और बाजार तक पहुंच का गणित
विक्रमेंद्र प्रसाद भल्ला के अनुसार, वे करीब 1000 वर्ग मीटर के पॉलीहाउस में शिमला मिर्च की खेती कर रहे हैं, जहां लगभग 3200 पौधे लगाए गए हैं। एक एकड़ में इसकी खेती के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये तक का निवेश करना पड़ता है। बाजार में शिमला मिर्च की कीमत 50 से 60 रुपये प्रति किलो के बीच बनी रहती है। उनके उत्पाद की मांग सिर्फ स्थानीय मंडियों तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली जैसे बड़े बाजारों तक भी पहुंच रही है, जिससे उनकी आय में इजाफा हुआ है।
एक सीजन में लाखों की आमदनी संभव
अगर मौसम और फसल की स्थिति अनुकूल रहे तो शिमला मिर्च की खेती से एक सीजन में एक एकड़ से 5 से 6 लाख रुपये तक की कमाई की जा सकती है। एक पौधे से औसतन 2 किलो तक उत्पादन मिल जाता है। ड्रिप सिस्टम के जरिए पानी और खाद की आपूर्ति नियंत्रित तरीके से होती है, जिससे फसल स्वस्थ रहती है। वहीं नेट हाउस में खेती करने से बाहरी कीटों का खतरा कम हो जाता है और पानी की बर्बादी भी घटती है।
बदलती सोच से खेती में नए अवसर
लखीमपुर खीरी के किसानों का यह बदलता रुख दिखाता है कि अगर सही तकनीक और जानकारी का इस्तेमाल किया जाए तो खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। शिमला मिर्च जैसी फसलों के जरिए किसान अब पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर नई संभावनाओं की ओर बढ़ रहे हैं। यह बदलाव न केवल उनकी आय बढ़ा रहा है बल्कि कृषि क्षेत्र में एक नई दिशा भी तय कर रहा है।

