Animal keeper: हरे चारे से पशुपालन में क्रांति, कम खर्च में ज्यादा लाभ का भरोसेमंद तरीका
Animal keeper: यदि आप पशुपालन से जुड़े हैं और अपने मवेशियों की सेहत, दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता को लेकर चिंतित रहते हैं, तो हरे चारे का संतुलित और सही उपयोग आपके लिए बेहद लाभकारी सिद्ध हो सकता है। आज भी कई पशुपालक जानकारी के अभाव में पशुओं को असंतुलित आहार दे देते हैं, जिससे पाल न ठहरना, दूध की मात्रा कम होना और बार-बार बीमार पड़ना जैसी समस्याएं सामने आती हैं। पशु विशेषज्ञों के अनुसार, यदि हरा चारा पशुओं के दैनिक आहार का मुख्य हिस्सा बन जाए, तो Feeding cost में भारी कमी आती है और पशुओं का Overall health बेहतर होता है। बिहार समेत देश के कई हिस्सों में किसान पहले से ही बरसीम, नेपियर, ज्वार, जई और सोरघम जैसी फसलों की खेती करते हैं, लेकिन सही मात्रा और सही तरीके की जानकारी न होने से पूरा लाभ नहीं मिल पाता।

हरे चारे से पशुओं की उत्पादकता में वृद्धि
हरा चारा मवेशियों के लिए Natural nutrition का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। इसमें मौजूद आवश्यक तत्व पशुओं की Milk yield बढ़ाने, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। नियमित रूप से हरा चारा देने से पशुओं की प्रजनन शक्ति बेहतर होती है और बछड़े भी स्वस्थ पैदा होते हैं। इससे Long term dairy profit में बढ़ोतरी होती है और पशुपालक को दवाओं पर होने वाला खर्च भी कम करना पड़ता है।
विटामिन A की कमी और उससे होने वाले नुकसान
पशु वैज्ञानिकों के अनुसार, दुधारू पशुओं के आहार में Vitamin A का होना बेहद जरूरी है। इसकी कमी से पशुओं में infertility, blindness और कमजोर immunity जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। कई बार देखा गया है कि पशु समय पर गर्भधारण नहीं कर पाते, जिसे आम भाषा में पाल न ठहरना कहा जाता है। यह स्थिति किसी भी पशुपालक के लिए चिंता का विषय बन जाती है। हरे चारे में प्राकृतिक रूप से Vitamin A भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिससे ये समस्याएं काफी हद तक खत्म हो जाती हैं।
बरसीम: पोषक तत्वों से भरपूर चारा
बरसीम को पशुपालन की दुनिया में King of forage crop कहा जाता है। यह मुख्य रूप से सर्दियों में उगाई जाने वाली दलहनी फसल है, जिसे छोटे और बड़े सभी किसान आसानी से उगा सकते हैं। बरसीम में High protein content होता है, जो मवेशियों की Muscle development और दूध उत्पादन के लिए जरूरी है। इसमें Calcium, Vitamin D और अन्य Minerals भी पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और पशुओं को लंबे समय तक स्वस्थ रखते हैं।
अन्य उपयोगी हरे चारे के विकल्प
बरसीम के अलावा जई, राई, बीन ग्रास और एजोला भी पशुओं के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं। एजोला खासतौर पर Low cost feed option के रूप में लोकप्रिय हो रहा है। इसमें मौजूद प्रोटीन और मिनरल्स पशुओं की Growth rate को तेज करते हैं। यदि इन सभी हरे चारे को संतुलित मात्रा में पशुओं को दिया जाए, तो reproductive problems, कमजोरी और मांसपेशियों के विकास में कमी जैसी समस्याएं धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं।
सही मात्रा और संतुलित आहार का महत्व
हरे चारे का लाभ तभी मिलता है, जब इसे सही मात्रा में और नियमित रूप से दिया जाए। सामान्य तौर पर एक दुधारू पशु को प्रतिदिन 30 से 40 किलो हरा चारा पर्याप्त होता है। इसके साथ 4 से 5 किलो भूसा और 1 से 1.5 किलो एजोला मिलाने से Balanced diet तैयार हो जाती है। इससे पशु न केवल स्वस्थ रहते हैं, बल्कि दूध की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार देखने को मिलता है।
पशुपालकों के लिए आर्थिक फायदे
हरा चारा अपनाने से पशुपालकों को Economic sustainability का बड़ा लाभ मिलता है। बाजार से खरीदे जाने वाले महंगे Concentrate feed पर निर्भरता कम हो जाती है। इससे Dairy farming business ज्यादा सुरक्षित और मुनाफेदार बनता है। साथ ही, स्वस्थ पशुओं से Veterinary expenses भी कम होते हैं, जो लंबे समय में किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करता है।

