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Agriculture Tips: हरी मटर की खेती से बदल सकती है किसानों की आमदनी, कम समय में मिलेगा भरोसेमंद लाभ

Agriculture Tips: अगर आप किसान हैं और रबी मौसम में ऐसी फसल की तलाश में हैं जो कम जोखिम के साथ अच्छी कमाई दे सके, तो हरी मटर एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आती है। वर्तमान समय में मौसम के बदलते स्वरूप और बढ़ती ठंड को देखते हुए यह फसल किसानों के लिए काफी अनुकूल मानी जा रही है। खास बात यह है कि हरी मटर की खेती कम समय में तैयार हो जाती है और बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में ज्यादा परेशानी नहीं होती।

Agriculture tips
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रबी मौसम में हरी मटर क्यों है फायदेमंद
रबी सीजन में तापमान गिरने लगता है और कई फसलें अत्यधिक ठंड से प्रभावित हो जाती हैं, लेकिन हरी मटर ऐसी फसल है जो ठंडे मौसम में और भी अच्छी बढ़वार करती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे ठंड बढ़ती है, वैसे-वैसे मटर के पौधों में फलियों की संख्या और गुणवत्ता में सुधार देखने को मिलता है। यही कारण है कि ठंडे इलाकों में भी इसकी खेती सफलतापूर्वक की जाती है।
छतरपुर जिले के कृषि जानकारों के अनुसार इस वर्ष ठंड सामान्य से अधिक पड़ने की संभावना है, जो हरी मटर के लिए अनुकूल मानी जा रही है।

कम जोखिम और स्थिर उत्पादन
हरी मटर की खेती का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें नुकसान की संभावना अपेक्षाकृत कम रहती है। ठंड के मौसम में इस फसल पर कीट और रोगों का प्रकोप कम देखा जाता है। खासतौर पर माहू जैसे कीट, जो अन्य दलहनी और तिलहनी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, मटर में बहुत कम असर दिखाते हैं। इससे किसानों को कीटनाशकों पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता और उत्पादन लागत भी नियंत्रित रहती है।

पोषण और मिट्टी के लिए लाभकारी
हरी मटर न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि यह मिट्टी की सेहत के लिए भी उपयोगी मानी जाती है। यह दलहनी फसल होने के कारण मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाने में सहायक होती है। इससे अगली फसल के लिए खेत की उर्वरता बनी रहती है। साथ ही मटर में प्रोटीन, फाइबर और अन्य पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं, जिससे बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है।

बाजार भाव और मुनाफे की संभावना
हरी मटर का बाजार भाव किसानों के लिए एक बड़ा आकर्षण है। सही समय पर फसल तैयार होने और अच्छी गुणवत्ता होने पर इसका मूल्य काफी अच्छा मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार हरी मटर का भाव आमतौर पर 8,000 से 12,000 रुपये प्रति क्विंटल तक देखा गया है। इस कारण कम क्षेत्रफल में खेती करने वाले किसान भी संतोषजनक आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।

सिंचाई और देखभाल के जरूरी पहलू
हरी मटर की खेती में समय पर सिंचाई और उचित देखभाल बहुत जरूरी होती है। बुवाई के बाद हल्की सिंचाई करने से बीजों का अंकुरण अच्छा होता है। इसके बाद जरूरत के अनुसार सिंचाई करनी चाहिए, ताकि खेत में नमी बनी रहे लेकिन जलभराव न हो। समय-समय पर निराई-गुड़ाई करने से पौधों को पोषण सही ढंग से मिलता है और उत्पादन बढ़ता है।

मसूर और सरसों की तुलना में मटर क्यों बेहतर
मसूर की फसल सामान्यतः सूखे वातावरण में अच्छी होती है, लेकिन अत्यधिक ठंड में इस पर माहू रोग का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह सरसों की खेती भी की जा सकती है, लेकिन पाले और कीटों से बचाव के लिए अतिरिक्त सावधानी और खर्च करना पड़ता है। इन दोनों की तुलना में हरी मटर अपेक्षाकृत सुरक्षित फसल मानी जाती है, जिसमें जोखिम कम और लाभ की संभावना अधिक रहती है।

पाले से बचाव के सरल उपाय
ठंड के मौसम में पाले से फसल को बचाना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए समय पर सिंचाई करना एक कारगर उपाय है। इसके अलावा सल्फर का छिड़काव करने से भी फसल को पाले से बचाव मिलता है और पौधों को अतिरिक्त पोषण प्राप्त होता है। इन उपायों को अपनाकर किसान अपनी हरी मटर की फसल को स्वस्थ रख सकते हैं और बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं।

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