Agriculture tips: सर्दियों में सब्जी उत्पादन बढ़ाने का असरदार तरीका यह पोषण मिश्रण अपनाएं
Agriculture tip: सहारनपुर जनपद सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खेती किसानों की आजीविका का मुख्य साधन है। यहां बड़ी संख्या में किसान सर्दियों के मौसम में सब्जियों की खेती करते हैं, क्योंकि इस समय बाजार में हरी और ताजी सब्जियों की मांग काफी अधिक रहती है। पत्तेदार सब्जियों का उत्पादन यदि सही तरीके से किया जाए तो किसानों को कम समय में अच्छा मुनाफा मिल सकता है। यही कारण है कि सर्दियों की खेती किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

सर्दियों में उगाई जाने वाली प्रमुख सब्जियां
सहारनपुर और आसपास के क्षेत्रों में सर्दियों के मौसम में कई प्रकार की सब्जियों की खेती की जाती है। इनमें पालक, मैथी, धनिया, मूली, गाजर, शलजम, सरसों और चना प्रमुख हैं। इन सब्जियों की खासियत यह है कि इनकी पत्तियां सीधे बाजार में बिकती हैं और इनका रंग, आकार और ताजगी ही इनका मूल्य तय करती है। यदि पत्तियां हरी, मोटी और ताजगी से भरपूर हों, तो व्यापारी इन्हें अच्छे दाम पर खरीदते हैं।
पत्तेदार सब्जियों में हरियाली का महत्व
पत्तेदार सब्जियों की खेती में हरियाली सबसे अहम भूमिका निभाती है। हरी और चमकदार पत्तियां न केवल देखने में आकर्षक होती हैं, बल्कि यह इस बात का संकेत भी होती हैं कि फसल स्वस्थ है। जिन खेतों में सब्जियों की पत्तियां पीली या कमजोर दिखाई देती हैं, वहां उत्पादन भी कम होता है और बाजार भाव भी घट जाता है। इसलिए किसान शुरू से ही फसल की सेहत पर विशेष ध्यान देते हैं।
मिट्टी और पोषण तत्वों की भूमिका
सर्दियों में मिट्टी का तापमान कम होने के कारण पौधों की जड़ों से पोषक तत्वों का अवशोषण धीमा हो जाता है। ऐसे में केवल मुख्य खादों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता। पौधों को संतुलित पोषण देने के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। ये तत्व कम मात्रा में होने के बावजूद पौधों की वृद्धि, पत्तियों के रंग और उत्पादन को सीधे प्रभावित करते हैं।
माइक्रोन्यूट्रिएंट क्यों हैं जरूरी
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पत्तेदार सब्जियों में माइक्रोन्यूट्रिएंट का विशेष महत्व है। इनमें जिंक, बोरान, कैल्शियम, सल्फर और अन्य पोषक तत्व शामिल होते हैं। जिंक पौधों की बढ़वार में मदद करता है और पत्तियों की बनावट को सुधारता है। बोरान नई पत्तियों के विकास में सहायक होता है। कैल्शियम पौधों की कोशिकाओं को मजबूत बनाता है, जिससे पत्तियां मोटी और टिकाऊ होती हैं। वहीं सल्फर पत्तियों के रंग को गहरा हरा बनाता है, जो बाजार में बेहतर कीमत दिलाने में मदद करता है।
सही समय पर छिड़काव का महत्व
माइक्रोन्यूट्रिएंट का सही समय पर प्रयोग करना उतना ही जरूरी है जितना सही मात्रा में देना। विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दियों में पत्तेदार सब्जियों पर हर 7 दिन के अंतराल पर माइक्रोन्यूट्रिएंट का छिड़काव करना चाहिए। नियमित छिड़काव से पौधों को लगातार पोषण मिलता रहता है, जिससे उनकी ग्रोथ बनी रहती है और पत्तियों का वजन भी बढ़ता है।
मिश्रित पोषण का विकल्प
यदि किसानों को बाजार में तैयार माइक्रोन्यूट्रिएंट मिश्रण आसानी से उपलब्ध न हो, तो वे वैकल्पिक रूप से संतुलित उर्वरक का उपयोग कर सकते हैं। एनपीके मिश्रण जैसे 20-20-20 या 19-19-19 का घोल बनाकर पत्तियों पर छिड़काव किया जा सकता है। यह मिश्रण नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की समान मात्रा प्रदान करता है, जिससे पौधों को संपूर्ण पोषण मिलता है और पत्तियों में तेजी से हरियाली आती है।
उत्पादन और आय में बढ़ोतरी
सही पोषण प्रबंधन अपनाने से न केवल फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है, बल्कि कुल उत्पादन भी बढ़ता है। जब पत्तियां स्वस्थ और भारी होती हैं, तो प्रति कटाई अधिक उपज मिलती है। इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ता है। सर्दियों के मौसम में जब बाजार में अच्छी सब्जियों की मांग अधिक होती है, तब यह तरीका किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो सकता है।

