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Saffron cultivation indoors in India :कम जगह में लाखों की कमाई का सुनहरा मौका

Saffron cultivation indoors in India: केसर को लाल सोना कहा जाता है और आज के समय में इसकी कीमत 7 से 10 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुँच जाती है। पहले यह सिर्फ जम्मू-कश्मीर की ठंडी वादियों में ही उगाया जाता था, लेकिन अब हाइड्रोपोनिक्स और एरोपोनिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों की वजह से महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा, ओडिशा, बिहार जैसे राज्यों में भी लोग अपने घर, छत या छोटी सी जगह में साल भर केसर उगा रहे हैं। मौसम की मार झेलने की जरूरत नहीं, कीट-पतंगे कम और क्वालिटी हमेशा बेहतरीन रहती है। अगर आप भी कम जगह में ज्यादा मुनाफा चाहते हैं तो इनडोर केसर की खेती आपके लिए सबसे शानदार विकल्प बन सकती है।

Saffron cultivation indoors in india
Saffron cultivation indoors in india

इनडोर केसर की खेती सीखने के लिए ट्रेनिंग कहाँ मिलती है?

देश के कई हिस्सों में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की ट्रेनिंग उपलब्ध है। हरियाणा के पंचकूला स्थित अकरशक केसर इंस्टिट्यूट में ऑफलाइन कोर्स चलता है जिसमें थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल भी करवाया जाता है। इसके अलावा ffreedom.com जैसे प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन कोर्स भी हैं जिनमें लाइव सेशन और एक्सपर्ट से सवाल-जवाब का मौका मिलता है।

कोर्स की फीस आमतौर पर 6,000 से 16,000 रुपये तक रहती है। कई जगह कोर्स के साथ कॉर्म (केसर के बल्ब), ट्रे और शुरुआती सप्लाई भी दी जाती है। ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में कोर्स पूरा होने के बाद भी सपोर्ट मिलता रहता है। ट्रेनिंग में तापमान नियंत्रण, नमी बनाए रखना, सही कॉर्म चुनना, हाइड्रोपोनिक्स और एरोपोनिक्स सिस्टम लगाना सिखाया जाता है।

शुरुआती निवेश कितना लगेगा?

100 स्क्वायर फीट की छोटी यूनिट के लिए कुल खर्चा 4 से 6 लाख रुपये तक आता है। इसमें रैक, एलईडी लाइट्स, एयर कंडीशनर, ह्यूमिडिफायर, ट्रे आदि शामिल होते हैं। अगर एरोपोनिक्स सिस्टम लगवाते हैं तो 5-7 लाख तक जा सकता है, जबकि हाइड्रोपोनिक्स में 3-5 लाख में भी अच्छा सेटअप बन जाता है।

केसर के कॉर्म 600 से 1200 रुपये किलो मिलते हैं और छोटी यूनिट के लिए 100-200 किलो चाहिए। अच्छी बात यह है कि सरकार की MIDH स्कीम के तहत 35-50% तक सब्सिडी मिल जाती है, पहाड़ी इलाकों में तो 100% तक भी मिल सकती है। बिहार, राजस्थान, ओडिशा जैसे राज्यों में जमीन और बिजली का खर्चा कम होने से सेटअप सस्ता पड़ता है।

जरूरी उपकरण कौन-कौन से हैं?

सफलता के लिए कुछ बेसिक चीजें बहुत जरूरी हैं – मल्टी लेयर रैक, फुल स्पेक्ट्रम एलईडी लाइट्स (800-1000 रुपये प्रति पीस), ह्यूमिडिफायर और डीह्यूमिडिफायर (25,000 रुपये तक), प्लास्टिक ट्रे (500-1000 रुपये), तापमान और नमी सेंसर। कई किसान अब ऑटोमेशन सिस्टम भी लगा रहे हैं जिससे मोबाइल से ही सबकुछ कंट्रोल हो जाता है, इसका खर्चा 50,000 से 1 लाख तक आता है।

सालाना खर्चा और मेंटेनेंस

बिजली का बिल सबसे बड़ा खर्चा है – 4500 से 7000 रुपये महीना। गुजरात-राजस्थान जैसे धूप वाले राज्यों में सोलर पैनल लगवाकर इसे काफी कम किया जा सकता है। मजदूरी सालाना 8,000-10,000 रुपये तक रहती है क्योंकि ज्यादातर काम खुद ही हो जाता है। कीट नियंत्रण और खाद पर 10-20 हजार रुपये सालाना लग जाते हैं। कुल मिलाकर पहले साल के बाद सालाना खर्चा बहुत कम रह जाता है।

मुनाफा कितना होगा?

100 स्क्वायर फीट में साल भर में 350 से 500 ग्राम तक केसर तैयार हो जाता है। कीमत अगर 7-10 लाख प्रति किलो भी मानें तो 2.5 से 5 लाख रुपये तक की कमाई आसानी से हो जाती है। प्रॉफिट मार्जिन 80-90% तक रहता है। शहरों में डायरेक्ट कस्टमर को बेचने पर और भी ज्यादा फायदा होता है। ऑर्गेनिक केसर पर 20-30% अतिरिक्त प्रीमियम मिल जाता है। कई किसान तो निर्यात भी कर रहे हैं जहाँ 10-15 लाख प्रति किलो तक दाम मिल रहा है।

सरकार से कितनी मदद मिल सकती है?

MIDH के अलावा कई राज्यों में अलग से सब्सिडी और कम ब्याज पर लोन मिल रहा है। गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश में क्रॉप इंश्योरेंस भी उपलब्ध है। MSME रजिस्ट्रेशन करवाने पर और भी फायदा होता है।

सफल किसानों की कहानियाँ

महाराष्ट्र के हर्ष पाटिल सिर्फ 15×15 फीट में सालाना 1 लाख कमा रहे हैं। हरियाणा के सिंधु ब्रदर्स ने 225 स्क्वायर फीट में 10 लाख तक की कमाई की। ओडिशा की रेणु अग्रवाल जैसी महिला उद्यमी भी लाखों कमा रही हैं। उत्तर प्रदेश के रमेश गोस्वामी महीने के 6 लाख तक कमा रहे हैं। ये सभी उदाहरण बताते हैं कि सही तरीके से किया जाए तो 1-2 साल में पूरा निवेश निकल आता है।

आगे बढ़ने का रास्ता

शुरुआत छोटे स्तर पर करें, पहले 50-100 स्क्वायर फीट से शुरू करके अनुभव लें। सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स और लोकल मार्केट में सीधे बेचें। वर्टिकल फार्मिंग अपनाएँ तो एक ही जगह में कई गुना ज्यादा पैदावार हो सकती है। आज के समय में इनडोर केसर की खेती न सिर्फ मुनाफे का धंधा है बल्कि भविष्य का सबसे सुरक्षित और स्थायी बिजनेस भी है।

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