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Success Story: जानें उस किसान के बारे में, जिन्होंने बागवानी और वानिकी से बदल दी अपनी किस्मत की तस्वीर

Success Story: श्रीमती शकुन्तला देवी, पति श्री सुरेश मंडल, ग्राम फतेहपुर, पंचायत जामुखरैया, प्रखंड झाझा, जिला जमुई की निवासी हैं। सीमांत किसान होने के कारण, उनके परिवार की सारी जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। वे मजदूरी करके अपने बच्चों को पढ़ाती थीं और परिवार का भरण-पोषण करती थीं। खेती से उनका सालभर का गुजारा नहीं हो पाता था। केवल साल में दो बार फसल बेचकर वे मामूली लाभ अर्जित कर पाती थीं। इसके कारण वे हमेशा परिवार की खुशहाली के लिए चिंतित रहती थीं।

Success story

आत्मा कार्यक्रम से परिचय और प्रेरणा

पंचायत जामुखरैया में आयोजित आत्मा आम सभा में श्रीमती शकुन्तला देवी भी उपस्थित हुईं। इस कार्यक्रम का संचालन प्रखंड तकनीकी प्रबंधक श्री पुष्पेन्द्र नाथ और सहायक तकनीकी प्रबंधक ने किया। सभा में कृषक हित समूह, कृषि, उद्यान और वानिकी से जुड़ी योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई। इसी मौके पर उन्होंने अन्य किसानों के साथ विचार विमर्श किया और “माँ शारदा स्वयं सहायता समूह” का निर्माण किया। यह समूह उन्हें उन्नत खेती की ओर प्रेरित (Motivation) करने वाला पहला कदम था।

कृषि में नवीन तकनीकों को अपनाना

श्रीमती शकुन्तला देवी ने आत्मा कर्मियों के मार्गदर्शन में आधुनिक खेती में अपनी रुचि विकसित की। उन्होंने अपने आस-पास के किसानों के साथ चर्चा की और तय किया कि समूह के माध्यम से नवीन तकनीकों का लाभ उठाया जाएगा। उन्होंने 1.25 एकड़ भूमि पर उद्यान कृषि (Agriculture) और वानिकी को अपनाया। इस योजना के तहत उन्होंने विभिन्न कृषि घटकों का इस्तेमाल किया: धान्य फसलें, बागवानी फसलें, चारा उत्पादन और सागवान की खेती।

भूमि का स्मार्ट उपयोग और फसल चयन

श्रीमती शकुन्तला देवी ने अपनी भूमि का वैज्ञानिक तरीके से विभाजन किया। 50% भूमि पर धान्य फसलें (Crop) , 20% भूमि पर बागवानी फसलें (भिंडी, विन्स, मकई, बैंगन, पपीता और कदूवर्गीय सब्जियाँ), 5% भूमि पर चारा उत्पादन और शेष भूमि पर पशुपालन एवं मशरूम उत्पादन किया। इस स्मार्ट विभाजन से उनकी आय में सुधार हुआ और अब उन्हें सालभर आमदनी होने लगी।

आय में वृद्धि और आर्थिक सशक्तिकरण

उद्यान कृषि और वानिकी अपनाने के बाद, श्रीमती शकुन्तला देवी की सालाना आय (Income) लगभग 45,000 रुपये से बढ़कर 2.15 लाख रुपये हो गई। यह चार गुना वृद्धि उनके मेहनत और आत्मा परियोजना के सहयोग का परिणाम थी। उन्होंने FYM और हरी खाद का प्रयोग बढ़ाया और रासायनिक उर्वरक कम किया, जिससे मिट्टी की जल धारण क्षमता और उर्वरा शक्ति में वृद्धि हुई।

वैज्ञानिक खेती के लाभ और आसपास के किसानों पर प्रभाव

श्रीमती शकुन्तला देवी का कहना है कि उनका वैज्ञानिक खेती अपनाना आस-पास के किसानों के लिए प्रेरणा (Success Story) बन गया है। अब उनके गांव के कई किसान भी आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। वे सभी आत्मा पदाधिकारियों के संपर्क में रहकर तकनीक (Technology) सीख रहे हैं।

उत्पादन और बाजार में बिक्री

श्रीमती शकुन्तला देवी ने अपने उत्पादन को झाझा बाजार (Market) में बेचकर मुनाफा कमाया। पहले केवल रवि और खरीफ फसल से आय होती थी, लेकिन अब सालभर उनकी आमदनी जारी रहती है। उनके उत्पाद में धान्य, बागवानी फसलें, चारा और मशरूम शामिल हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई बल्कि उनके जीवन में खुशहाली भी आई।

समूह के माध्यम से सामूहिक उन्नति

माँ शारदा स्वयं सहायता समूह के निर्माण से, सभी सदस्य किसानों ने एक-दूसरे के अनुभव से सीखना शुरू किया। आत्मा परियोजना के अंतर्गत साझा ज्ञान, नई तकनीकों और कृषि सुधार के उपायों ने समूह (Group) की सफलता सुनिश्चित की। इससे समुदाय में सहयोग और खेती की गुणवत्ता दोनों बढ़ी।

कृषि में सतत सुधार और भविष्य की योजना

श्रीमती शकुन्तला देवी अब नई तकनीकों को अपनाने और भूमि की उपज बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं। वे जल संरक्षण, जैविक खाद और उन्नत बीज का प्रयोग करके अपनी खेती को और अधिक लाभकारी बना रही हैं। उनका लक्ष्य है कि भविष्य में उनकी आय और स्थायी (Sustainability) हो और उनके गांव के अन्य सीमांत किसान भी लाभान्वित हों।

आत्मा परियोजना के प्रति आभार

श्रीमती शकुन्तला देवी विशेष रूप से आत्मा परियोजना के पदाधिकारियों, प्रबंधक और तकनीकी सहायकों का धन्यवाद करती हैं। उनका मानना है कि उनके मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग (Support) के बिना यह सफलता संभव नहीं थी। उन्होंने अपने जीवन और परिवार की खुशहाली में असाधारण बदलाव देखा।

 

 

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