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Successful Farmer: खेती नहीं बल्कि बागवानी ने बदली इस किसान की किस्मत, अब कमा रहा है मोटा मुनाफा

Successful Farmer: मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र का कृषि परिदृश्य धीरे-धीरे बदल रहा है। किसान अब पारंपरिक फसलों से आय बढ़ाने वाली फसलों और बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं। इनमें खरगोन जिले के किसान विष्णु पाटीदार भी शामिल हैं। पहले वे गेहूँ, चना, कपास और गन्ने जैसी फसलों से बहुत कम कमा पाते थे, लेकिन जब उन्होंने सीताफल (Custard Apple) का बगीचा लगाया तो सब कुछ बदल गया। उनकी ज़मीन अब सालाना लाखों रुपये की कमाई करती है और वे दूसरे किसानों के लिए एक आदर्श बन गए हैं।

Custard apple
Custard apple

किसान विष्णु पाटीदार ने बताया कि वे लंबे समय से पारंपरिक फसलें (Traditional Crops) उगाते आ रहे हैं, लेकिन वे महंगी थीं और उनसे बहुत कम लाभ मिलता था। कपास और गन्ने जैसी फसलें उगाने में बहुत मेहनत लगती है और अगर खराब मौसम आ जाए तो पूरी फसल बर्बाद हो जाती है। ऐसी परिस्थितियों में नुकसान होना आम बात थी। फिर उन्होंने खेती छोड़कर बागवानी करने का फैसला किया।

तीन एकड़ में सीताफल का बगीचा

उन्होंने बताया कि उन्होंने लगभग चौदह साल पहले तीन एकड़ ज़मीन पर सीताफल उगाना शुरू किया था। सीताफल एक ऐसी फसल है जिसे ज़्यादा पानी या मेहनत की ज़रूरत नहीं होती। गर्मियों में, सिंचाई की ज़रूरत सिर्फ़ एक या दो बार ही पड़ती है। इस फसल की खासियत यह है कि यह तूफ़ान और बारिश जैसे मौसम के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रहती है। यह बोने के बाद भी कई सालों तक फल देती रहती है।

तीन साल में पेड़ देने लगते हैं फल

उनके अनुसार, सीताफल के पेड़ (Custard Apple Trees) बीज बोने के तीन साल बाद फल देने लगते हैं। बगीचा तैयार होने के बाद भी कई सालों तक आय देता रहता है। पहले तीन सालों के दौरान और पेड़ों के पूरी तरह फैल जाने के बाद भी, खेत के खाली पड़े हिस्से में दूसरी फ़सलें लगाई जा सकती हैं। इससे अतिरिक्त कमाई भी होती है। अब वह अपने पुराने बगीचे को हटाकर बारिश के मौसम में एक नया बगीचा लगा रहे हैं।

एक बीघा में 70 हज़ार रुपये का मुनाफ़ा

इसके अलावा, विष्णु पाटीदार ने बताया कि बागवानी बारिश के मौसम में सबसे अच्छी होती है। तीन साल बाद, सीताफल के पेड़ों में फल लगने लगते हैं। फूल अक्सर मई या जून में खिलते हैं, और दिवाली के बाद फल पकने लगते हैं। इन फलों की बाज़ार में अच्छी माँग है, और ये महीने भर उपलब्ध रहते हैं। एक बीघा से लगभग सत्तर हज़ार रुपये का मुनाफ़ा होता है। यानी तीन एकड़ यानी लगभग साढ़े चार बीघा से सालाना लगभग तीन लाख रुपये की कमाई होती है।

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