AGRICULTURE

TurmericFarming – कम लागत में हल्दी की खेती से किसानों को मिल रहा है बेहतर मुनाफा

TurmericFarming – अगर किसान कम लागत में अधिक आमदनी देने वाली खेती की तलाश में हैं, तो हल्दी एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में सामने आ रही है। पिछले कुछ समय में यह देखा गया है कि पारंपरिक फसलों के मुकाबले हल्दी की खेती किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ दे रही है। खास बात यह है कि इस फसल को उगाने के लिए बड़े खुले खेत की अनिवार्यता नहीं होती, बल्कि बाग-बगीचों के बीच खाली जमीन का उपयोग करके भी अच्छी कमाई की जा सकती है।

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कम धूप में भी संभव है अच्छी पैदावार
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार हल्दी ऐसी फसल है, जिसे पूरी धूप की आवश्यकता नहीं होती। लगभग आधी धूप वाले क्षेत्रों में भी इसकी खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। यही वजह है कि जिन किसानों के पास आम या अन्य फलदार पेड़ों के बाग हैं, वे बीच की खाली जगह का उपयोग कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि अप्रैल का महीना इसकी बुवाई के लिए उपयुक्त माना जाता है, जिससे फसल समय पर तैयार होकर बाजार में बेहतर कीमत दिला सकती है।

मिट्टी और बीज चयन का विशेष महत्व
हल्दी की अच्छी पैदावार के लिए बलुई दोमट मिट्टी को उपयुक्त माना जाता है। हालांकि, इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि खेत में पानी जमा न हो, क्योंकि जलभराव से फसल को नुकसान पहुंच सकता है। एक हेक्टेयर क्षेत्र में खेती के लिए लगभग 18 से 20 क्विंटल बीज कंद की आवश्यकता होती है। बेहतर उत्पादन के लिए उन्नत किस्मों का चयन करना भी महत्वपूर्ण है। स्वर्णा और राजेंद्र सोनिया जैसी किस्में कम समय में अधिक उत्पादन देने के लिए जानी जाती हैं।

खाद और रोपाई का सही तरीका
खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तैयारी जरूरी होती है। प्रति हेक्टेयर 20 से 25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद डालने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसल को पर्याप्त पोषण मिलता है। रोपाई करते समय पौधों के बीच उचित दूरी रखना भी जरूरी है, ताकि उनकी वृद्धि बेहतर तरीके से हो सके। वैज्ञानिक तरीके अपनाने से उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।

फसल अवधि और बाजार में मांग
हल्दी की फसल तैयार होने में लगभग आठ से नौ महीने का समय लगता है। मई-जून के दौरान इसकी बुवाई की जाती है और सही देखभाल के साथ यह अच्छी पैदावार देती है। बाजार में हल्दी की मांग पूरे साल बनी रहती है, क्योंकि इसका उपयोग मसालों के अलावा औषधीय और घरेलू उपयोग में भी होता है। यही वजह है कि किसानों को अपनी उपज बेचने में ज्यादा परेशानी नहीं होती।

कम लागत में अधिक आय की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक तरीकों से हल्दी की खेती करें, तो प्रति एकड़ 2 से 4 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ संभव है। इसकी खेती में लागत अपेक्षाकृत कम आती है, जबकि बाजार मूल्य स्थिर रहता है। छोटे और मध्यम किसानों के लिए यह खेती अतिरिक्त आय का अच्छा जरिया बन सकती है।

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